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दिव्य सुधा > featured > जीवित्पुत्रिका व्रत 2025 : मातृशक्ति की आस्था और संकल्प का पर्व
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जीवित्पुत्रिका व्रत 2025 : मातृशक्ति की आस्था और संकल्प का पर्व

दिव्यसुधा
Last updated: September 14, 2025 11:44 am
दिव्यसुधा
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मां की आस्था, संतान की दीर्घायु – जितिया व्रत 2025
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Highlights
  • संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए माताओं का अटूट व्रत।
  • 14 सितंबर 2025 को देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा जितिया व्रत।
  • निर्जला उपवास और पारंपरिक पूजा-विधि से जुड़ा यह पर्व मातृशक्ति के त्याग का प्रतीक।

जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जितिया पर्व भी कहा जाता है, माताओं द्वारा संतान की दीर्घायु, सुरक्षा और समृद्धि के लिए किए जाने वाला एक प्रमुख पर्व है। यह व्रत मातृशक्ति की अटूट आस्था, त्याग और संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष यह पर्व रविवार, 14 सितंबर 2025 को बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।

नहाय-खाय से होती है व्रत की शुरुआत

इस व्रत से एक दिन पहले ‘नहाय-खाय’ की परंपरा निभाई जाती है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व माताएं शुद्ध आहार ग्रहण कर अगले दिन सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक निर्जला उपवास का संकल्प लेती हैं।

व्रत की तिथि व समय

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 14 सितंबर रविवार सुबह 05:04 बजे होगा और समापन 15 सितंबर सोमवार सुबह 03:06 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार 14 सितंबर को ही व्रत किया जाएगा। यह पर्व खासतौर पर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और बंगाल में बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

पूजा सामग्री

इस व्रत के लिए विशेष सामग्रियों की आवश्यकता होती है –

  • कुश से जीमूतवाहन की प्रतिमा
  • गाय के गोबर से चील और सियारिन की आकृति
  • अक्षत (चावल), पेड़ा व अन्य मिठाइयां
  • दूर्वा की माला, श्रृंगार सामग्री, सिंदूर
  • पुष्प, पान, सुपारी, लौंग, इलायची
  • फल-फूल, गांठ वाला धागा, धूप-दीप
  • बांस के पत्ते, सरसों का तेल

पूजा विधि

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • सूर्य भगवान को स्नान कराकर अर्घ्य अर्पित करें।
  • भगवान के समक्ष दीपक व धूप जलाकर प्रसाद अर्पित करें।
  • गोबर व मिट्टी से चील-सियारिन की प्रतिमा और कुश से जीमूतवाहन की प्रतिमा बनाकर पूजन करें।
  • शुभ मुहूर्त में व्रत कथा अवश्य सुनें।
  • पूजन के बाद आरती कर प्रसाद बांटें।
  • अगले दिन पारण कर दान-दक्षिणा अवश्य दें।

शुभ मुहूर्त 2025

  • ब्रह्म मुहूर्त : 04:33 AM – 05:19 AM
  • प्रातः संध्या : 04:56 AM – 06:05 AM
  • अभिजित मुहूर्त : 11:52 AM – 12:41 PM
  • विजय मुहूर्त : 02:20 PM – 03:09 PM
  • गोधूलि मुहूर्त : 06:27 PM – 06:51 PM
  • सायाह्न संध्या : 06:27 PM – 07:37 PM

व्रत मंत्र

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते,
देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः

पौराणिक कथा

जितिया व्रत की कथा चील और सियारिन से जुड़ी है। मान्यता है कि चील ने पूरे नियम और श्रद्धा से यह व्रत किया, जबकि सियारिन ने छल किया। अगले जन्म में चील शीलावती और सियारिन कर्पूरावतिका बनीं। शीलावती को व्रत के पुण्य से सात पुत्र प्राप्त हुए, जबकि कर्पूरा को संतान सुख नहीं मिला। बाद में भगवान जीमूतवाहन की कृपा और इस व्रत के प्रभाव से कर्पूरा को भी संतान की प्राप्ति हुई। तभी से इस व्रत का महत्व और भी बढ़ गया।

आरती

“ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन…”
(इस आरती में सूर्य देव की स्तुति और आशीर्वाद के लिए प्रार्थना की जाती है।)

सावधानियां : क्या करें और क्या न करें

  • व्रत के दिन पूर्ण नियम, श्रद्धा और शुद्धता का पालन करें।
  • व्रत के दौरान झूठ बोलने, छल करने या किसी को कष्ट देने से बचें।
  • व्रत कथा और पूजा सामग्री में कोई कमी न रखें।
  • व्रत के अंत में पारण व दान-दक्षिणा अवश्य करें।

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