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दिव्य सुधा > अन्य > घोड़े की नाल की अंगूठी: शनि दोष, नियम और चमत्कारी लाभ
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घोड़े की नाल की अंगूठी: शनि दोष, नियम और चमत्कारी लाभ

दिव्यसुधा
Last updated: December 27, 2025 1:28 pm
दिव्यसुधा
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शनि दोष शांति के लिए घोड़े की नाल से बनी अंगूठी ज्योतिष में प्रभावशाली उपाय
शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति का शक्तिशाली ज्योतिषीय उपाय – घोड़े की नाल की अंगूठी
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ज्योतिषशास्त्र में शनि ग्रह को कर्म, न्याय, अनुशासन और संघर्ष का कारक माना गया है। शनि की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को परिश्रम के अनुरूप सफलता देती है जबकि प्रतिकूल स्थिति जीवन में बाधा, विलंब और मानसिक तनाव उत्पन्न कर सकती है। ऐसे में शनि के अशुभ प्रभावों को शांत करने और उनके शुभ फल प्राप्त करने के लिए घोड़े की नाल से बनी अंगूठी को अत्यंत प्रभावशाली उपाय माना गया है।

घोड़े की नाल और शनि ग्रह का संबंध
मान्यता है कि घोड़े की नाल में शनि की ऊर्जा विद्यमान होती है विशेषकर काले घोड़े की नाल में। यही कारण है कि शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या या कुंडली में शनि की पीड़ा के समय घोड़े की नाल की अंगूठी धारण करने की सलाह दी जाती है। यह अंगूठी शनि की नकारात्मक ऊर्जा को संतुलित कर जीवन में स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करती है।

किस दिन पहननी चाहिए घोड़े की नाल की अंगूठी
शनि से संबंधित होने के कारण इसे धारण करने का सर्वोत्तम दिन शनिवार माना गया है। विशेष रूप से शनि अमावस्या के दिन इसे पहनना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यदि शनि अमावस्या उपलब्ध न हो, तो किसी भी शनिवार को शुभ मुहूर्त में इसे धारण किया जा सकता है। सही दिन पर अंगूठी पहनने से इसके प्रभाव शीघ्र दिखाई देने लगते हैं।

घोड़े की नाल की अंगूठी पहनने की विधि
अंगूठी को धारण करने से पूर्व उसका शुद्धिकरण अत्यंत आवश्यक माना गया है। शनिवार के दिन प्रातः स्नान के बाद घोड़े की नाल की अंगूठी को दूध, शहद, तिल का तेल, सरसों का तेल और गंगाजल से शुद्ध करें। इसके पश्चात शनि महाराज के मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र जाप के बाद श्रद्धा और एकाग्रता के साथ शनि देव का ध्यान करते हुए अंगूठी धारण करें। यह विधि शनि की कृपा प्राप्त करने में सहायक मानी जाती है।

अंगूठी बनवाते समय ध्यान रखने योग्य बातें
यदि घोड़े की नाल से स्वयं अंगूठी बनवाई जा रही हो, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसे अग्नि में तपाकर न बनाया जाए। मान्यता है कि आग में तपाने से नाल की शुभ ऊर्जा नष्ट हो जाती है। अंगूठी को केवल ठुकवाकर बनवाना ही उचित माना गया है। साथ ही, हमेशा काले घोड़े की नाल से बनी अंगूठी ही धारण करनी चाहिए, क्योंकि इससे शनि का अनुकूल प्रभाव अधिक मिलता है।

किस उंगली में पहनें घोड़े की नाल की अंगूठी
ज्योतिष के अनुसार हाथ की मध्यमा उंगली शनि की उंगली मानी जाती है। इसलिए घोड़े की नाल की अंगूठी हमेशा दाहिने या बाएं हाथ की मध्यमा उंगली में ही धारण करनी चाहिए। इसी नियम के अनुसार नाव की कील से बनी अंगूठी भी मध्यमा उंगली में पहनी जाती है।

किन लोगों को पहननी चाहिए यह अंगूठी
जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनि लग्न स्वामी हों, राशि स्वामी हों या भाग्य भाव में स्थित हों, उनके लिए यह अंगूठी विशेष लाभकारी मानी जाती है। इसके अलावा जिनकी कुंडली में शनि पीड़ित हों, कार्यों में बार-बार बाधाएं आ रही हों, करियर में स्थिरता न मिल रही हो या मानसिक तनाव बना रहता हो, वे भी इस अंगूठी को धारण कर सकते हैं।

घोड़े की नाल की अंगूठी पहनने के लाभ
घोड़े की नाल की अंगूठी धारण करने से आर्थिक समस्याओं में कमी आती है और कार्यों में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। यह अंगूठी व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा, भय और अस्थिरता से बचाने में सहायक मानी जाती है। शनि के शुभ प्रभाव मिलने से जीवन में अनुशासन, धैर्य और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। साथ ही, घोड़े की नाल को घर के मुख्य द्वार पर लगाने से भी शनि की प्रतिकूल दृष्टि से रक्षा होने की मान्यता है।

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