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दिव्य सुधा > वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा > हस्तरेखा विज्ञान : अंगूठे का महत्व और संकेत
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

हस्तरेखा विज्ञान : अंगूठे का महत्व और संकेत

Ekta Mishra
Last updated: February 13, 2026 1:37 pm
Ekta Mishra
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हस्तरेखा विज्ञान में अंगूठे के प्रकार और उनका आध्यात्मिक महत्व
अंगूठे की बनावट से जानें इच्छा शक्ति और व्यक्तित्व के रहस्य
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हस्तरेखा विज्ञान में अंगूठे को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसे केवल शारीरिक अंग नहीं, बल्कि इच्छा शक्ति, आत्मबल और निर्णय क्षमता का प्रतीक माना जाता है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार अंगूठे का सीधा संबंध मस्तिष्क से होता है, इसलिए इसकी बनावट और संरचना व्यक्ति की मानसिक प्रवृत्तियों को दर्शाती है। ऐसा माना जाता है कि केवल अंगूठे की लंबाई, मोटाई, झुकाव और तर्जनी उंगली के साथ बनने वाले कोण को देखकर किसी व्यक्ति के स्वभाव, सोच और जीवन की दिशा के बारे में बहुत कुछ जाना जा सकता है।

हस्तरेखा विज्ञान में अंगूठे को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बांटकर देखा जाता है – अधिक कोण, समकोण और न्यूनकोण। इन तीनों प्रकारों की बनावट अलग-अलग संकेत देती है। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।

तर्जनी के साथ अधिक कोण बनाने वाला अंगूठा
जब अंगूठा तर्जनी उंगली के साथ मिलकर अधिक कोण बनाता है, तो वह देखने में लंबा, पतला और आकर्षक प्रतीत होता है। इसे सात्विक प्रवृत्ति का प्रतीक माना जाता है। ऐसे अंगूठे वाले लोग सामान्यतः कोमल हृदय, मधुर स्वभाव और संवेदनशील व्यक्तित्व के होते हैं। इनके भीतर रचनात्मकता की गहरी भावना होती है। ये लोग कला, संगीत, लेखन, अभिनय या अन्य सृजनात्मक क्षेत्रों में विशेष रुचि रखते हैं।

जीवन के शुरुआती वर्षों में इन्हें कुछ संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है। परिवार या परिस्थितियों के कारण चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और सकारात्मक सोच के कारण ये आगे बढ़ने में सफल होते हैं। ये लोग परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाने की क्षमता रखते हैं और घर-परिवार में सामंजस्य बनाए रखने का प्रयास करते हैं।

अत्यधिक लंबा अंगूठा क्या संकेत देता है
यदि अधिक कोण बनाने वाला अंगूठा अत्यधिक लंबा हो और उसकी लंबाई तर्जनी उंगली के दूसरे पोर से ऊपर निकल जाए, तो इसे संतुलन की दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता। ऐसे लोगों को जीवन में बड़ी उपलब्धियों के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ सकता है। कभी-कभी ये लोग अत्यधिक आदर्शवादी हो जाते हैं, जिससे व्यवहारिक जीवन में कठिनाइयां उत्पन्न हो सकती हैं।

हालांकि यदि अंगूठे की लंबाई संतुलित और उचित अनुपात में हो, तो यह बुद्धिमत्ता, विवेक और कला-प्रेम का संकेत देता है। ऐसे लोगों के मित्र कम होते हैं, लेकिन जो भी होते हैं वे सच्चे और विश्वासयोग्य होते हैं। कठिन समय में यही मित्र उनका साथ निभाते हैं।

तर्जनी के साथ समकोण बनाने वाला अंगूठा
जो अंगूठा तर्जनी के साथ मिलकर समकोण बनाता है, वह देखने में मजबूत, सीधा और संतुलित होता है। यह पीछे की ओर अधिक नहीं झुकता। ऐसे लोग कर्मप्रधान स्वभाव के माने जाते हैं। ये बातें कम और काम अधिक करने में विश्वास रखते हैं। जीवन में जो लक्ष्य निर्धारित करते हैं, उसे पाने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं।

इनका स्वभाव स्पष्टवादी होता है। इन्हें क्रोध जल्दी आ सकता है, परंतु उतनी ही शीघ्रता से शांत भी हो जाते हैं। यह गुण इन्हें संतुलित व्यक्तित्व प्रदान करता है। ऐसे लोग अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव रखते हैं। समाज सेवा, नेतृत्व और जिम्मेदारी निभाने में ये आगे रहते हैं। दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर ये सफलता प्राप्त करते हैं।

तर्जनी के साथ न्यूनकोण बनाने वाला अंगूठा
जब अंगूठा तर्जनी के साथ मिलकर न्यूनकोण बनाता है, तो उसकी लंबाई सामान्य से कम हो सकती है और उसका आकार कुछ असंतुलित दिखाई दे सकता है। ऐसे अंगूठे वाले लोग स्वभाव से थोड़ा अंतर्मुखी या निराशावादी हो सकते हैं। जीवन में इन्हें आर्थिक या मानसिक संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है।

धर्म और आध्यात्मिक कार्यों में इनकी रुचि कभी-कभी कम दिखाई देती है, लेकिन यदि ये सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास को अपनाएं तो अपने जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। इन्हें सफलता पाने के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ता है। कभी-कभी कार्यों में सुस्ती भी देखने को मिलती है, परंतु सही मार्गदर्शन और आत्मबल से ये भी जीवन में ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकते हैं।

कर्म और आत्मबल ही सच्चा आधार
यह समझना आवश्यक है कि हस्तरेखा विज्ञान संभावनाओं और प्रवृत्तियों का संकेत देता है, न कि अंतिम सत्य। अंगूठे की बनावट व्यक्ति की इच्छा शक्ति और मानसिक झुकाव को दर्शा सकती है, लेकिन जीवन की दिशा हमारे कर्म, सोच और प्रयासों से तय होती है।

यदि किसी प्रकार की बनावट में कमी प्रतीत हो, तो उसे निराशा का कारण न मानें। सकारात्मक सोच, सत्कर्म और ईश्वर में विश्वास के साथ हर व्यक्ति अपने जीवन को सफल और संतुलित बना सकता है। अंततः हमारा आत्मबल और कर्म ही हमारे भाग्य के सच्चे निर्माता हैं।

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