सनातन धर्म में हनुमान जी को सबसे बलशाली और बुद्धिमान देवता माना जाता है। हनुमान जी को भगवान शिव का रूद्र अवतार भी कहा गया है, जिनका जन्म रामायण काल में भगवान श्रीराम की सहायता के लिए हुआ था। ऐसा माना जाता है कि कलयुग में केवल हनुमान जी ही सभी देवताओं में जीवित हैं और उन्हें अमरता का वरदान प्राप्त है। हिन्दू धर्म में हनुमान जी की पूजा दुख, संकट और बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए की जाती है। हनुमान चालीसा में उनकी महिमा का वर्णन किया गया है। हनुमान जी की आरती का विशेष महत्व है, जो मनोवांछित फल, मानसिक शांति और जीवन में सफलता दिलाती है। तो आइये जानते है हनुमान जी आरती करने की विधि और उससे प्राप्त होने वाले लाभों के बारे में।
सभी देवी-देवताओं की आरती का महत्व
हनुमान जी की आरती करने से पूर्व यह समझना जरूरी है कि आरती का महत्व क्या है। प्राचीन हिन्दू धर्म में माना जाता है कि आरती करने का अर्थ है श्रद्धा भाव से अपने पूज्य देवता की भक्ति में लीन होना और उन्हें प्रसन्न करना। आरती के माध्यम से भक्त अपने आराध्य देव की सभी शक्तियों को अपने ऊपर अनुभव करते हैं और उनके आशीर्वाद का लाभ प्राप्त करते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि आराध्य देव का स्मरण करने से हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो और आत्मा प्रकाशित होकर सही मार्ग पर चले। मंत्र उच्चारण ना भी किया जाए, फिर भी आरती करने से पूजा सिद्ध हो जाती है और मन को शांति प्राप्त होती है।
श्री हनुमान जी की आरती करने के लाभ
हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार किसी भी देवता की पूजा उनकी आरती के बिना अधूरी मानी जाती है। परम बलशाली श्री हनुमान की आरती भक्तों को भय, चिंता और दुःख से मुक्ति दिलाती है। आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और सुख-समृद्धि आती है जिससे मानसिक शांति बनी रहती है।
- हनुमान जी की नियमित आरती करने से घर में सकारात्मक शक्तियां आती हैं और नकारात्मकता दूर होती है।
- किसी प्रकार का डर या भय सताने पर हनुमान जी की आरती कर सभी भयों से मुक्ति पाई जा सकती है।
- श्री हनुमान लला की आरती करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
- हनुमान जी की नित्य आरती करने से मानसिक चिंताओं से मुक्ति मिलती है।
- जीवन में खुशहाली आती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
- आरती करने के दौरान व्यक्ति के आसपास प्रकाश का सुरक्षा कवच बन जाता है जो नकारात्मक शक्तियों से बचाता है।
- हनुमान जी की आरती करने से भक्तों में तामसिक प्रवृतियों का अंत और सात्विक प्रवृति का प्रवेश होता है।
- पूजा के दौरान यदि कोई गलती हो जाए तो उसकी भरपाई आरती करके पूरी की जा सकती है।
बजरंगबली की आरती करने की सही विधि
हनुमान जी की आरती के लिए हमेशा तांबे, पीतल या चांदी की थाली का प्रयोग करें।- आरती में किसी ठोस धातु या आटे से बने दीये का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- घी, कपूर के साथ रूई की पांच बातियों को थाल में रखें।
- थाल में फूल, प्रसाद के लिए बूंदी और अक्षत भी रख सकते हैं।
- आरती के लिए एक, पांच या सात दीयों का प्रयोग किया जा सकता है।
- दीये में इस्तेमाल की जाने वाली बाती की संख्या एक, पांच या सात होनी चाहिए।
- हनुमान जी को आरती का थाल दिखाते हुए आरती करें।
- आरती के समय परिवार के सभी सदस्यों का उपस्थित होना अनिवार्य है।
- आरती शुरू करने से पूर्व विधि पूर्वक हनुमान जी की पूजा अर्चना करें।
- आरती हमेशा साफ-सुथरे वस्त्र पहनकर ही करें।
- आरती के दौरान शंख की हुंकार और घंटी का प्रयोग करें।
- आरती के समय मन को कहीं और भटकने न दें।
- आरती समाप्त होने के बाद उपस्थित सभी सदस्य दोनों हाथों से थाल के ऊपर हाथ फेरते हुए आरती लें।
- हनुमान जी की आरती सुबह या शाम के समय ही करें।