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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > गोवर्धन पूजा 2025: क्यों मनाया जाता है यह पर्व, जानिए महत्व, तिथि और पूजा विधि
व्रत और त्योहार

गोवर्धन पूजा 2025: क्यों मनाया जाता है यह पर्व, जानिए महत्व, तिथि और पूजा विधि

दिव्यसुधा
Last updated: October 14, 2025 3:07 pm
दिव्यसुधा
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गोवर्धन पूजा 2025 पूजा विधि और महत्व
गोवर्धन पूजा 2025: श्रद्धा और भक्ति के साथ गोवर्धन पर्वत की पूजा करते भक्त
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पांच दिवसीय दीपावली पर्व के दौरान दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। इसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है। यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण की उस लीला की याद में मनाया जाता है जब उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों को इंद्र देव के प्रकोप से बचाया था। यह दिन प्रकृति, अन्न और पशुधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का प्रतीक है।

गोवर्धन पूजा 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वर्ष 2025 में गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को मनाई जाएगी। प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 21 अक्टूबर शाम 5:54 बजे होगा और समाप्ति 22 अक्टूबर शाम 8:16 बजे तक रहेगा। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:30 बजे से 8:47 बजे तक रहेगा। इस दौरान भक्त भगवान कृष्ण, गायों और गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं।

गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा

कथा के अनुसार, वृंदावन में ग्रामीण इंद्र देव की पूजा करते थे ताकि वर्षा हो और खेती अच्छी हो। श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि वर्षा का वास्तविक कारण प्रकृति, पेड़-पौधे, नदियां और पर्वत हैं। जब लोगों ने केवल इंद्र की पूजा करना बंद किया, तो इंद्र देव क्रोधित हुए और भारी वर्षा भेजी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर सभी को सुरक्षित किया। इसी घटना की स्मृति में हर वर्ष गोवर्धन पूजा का आयोजन किया जाता है।

गोवर्धन पूजा की विधि

सुबह स्नान करके घर को शुद्ध करें। आंगन में गोबर या मिट्टी से गोवर्धन पर्वत का प्रतीक बनाएं और इसे फूल, पत्तियों और दीपों से सजाएं। इस पर्व पर 56 भोग या अन्नकूट के रूप में विभिन्न व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित करें। गायों और बछड़ों की पूजा करें और उन्हें हरी घास तथा गुड़ खिलाएं। अंत में आरती करें और भोग वितरण करें।

इस दिन क्या करें और क्या न करें

इस दिन क्या करें

ब्रज या किसी गोवर्धन मंदिर में दर्शन करें।
अन्न और गौसेवा करें।
अन्नकूट प्रसाद का वितरण करें।

इस दिन क्या न करें:

किसी का अपमान या तर्क-वितर्क न करें।
मांसाहार और शराब का सेवन न करें।
अन्न का अपव्यय न करें।

गोवर्धन पूजा का महत्व

गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति, अन्न और पशुधन के प्रति कृतज्ञता का संदेश देती है। यह केवल धार्मिक पर्व नहीं बल्कि पर्यावरणीय पर्व भी है। यह बताता है कि मानव और प्रकृति का संबंध अटूट है। यह पर्व नम्रता, सहयोग और पर्यावरण प्रेम का संदेश देता है। जैसे श्रीकृष्ण ने दिखाया, सच्चा देवता वही है जो जीवों की रक्षा करता है और भय पैदा नहीं करता।

गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने, पर्यावरण की रक्षा करने और जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

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