Tuesday, 24 Mar 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > अन्य > गोवर्धन पूजा 2025 : जानिए कब है तारीख, महत्व और विधि
अन्य

गोवर्धन पूजा 2025 : जानिए कब है तारीख, महत्व और विधि

दिव्यसुधा
Last updated: October 18, 2025 4:35 pm
दिव्यसुधा
Share
गोवर्धन पूजा 2025 – भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की दिव्य लीला और अन्नकूट उत्सव
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की स्मृति में मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा पर्व — भक्ति और प्रकृति सम्मान का प्रतीक।
SHARE

दीपावली के बाद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा का पावन पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की उस लीला की स्मृति में मनाया जाता है जब उन्होंने गोकुलवासियों की रक्षा के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया था। इसीलिए इसे अन्नकूट पर्व भी कहा जाता है। इस दिन भक्तजन भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन महाराज और गौमाता की पूजा करते हैं।

गोवर्धन पूजा 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 21 अक्तूबर 2025, शाम 5 बजकर 54 मिनट से होगा और इसका समापन 22 अक्तूबर 2025, रात 8 बजकर 16 मिनट पर होगा। इस आधार पर गोवर्धन पूजा का पर्व 22 अक्तूबर, बुधवार को मनाया जाएगा।

पूजा का शुभ मुहूर्त

दोपहर 03:13 मिनट से शाम 05:49 मिनट तक रहेगा। इस दिन स्वाति नक्षत्र और प्रीति योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष के अनुसार यह योग अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस दिन सूर्यदेव तुला राशि में और चंद्रमा का गोचर भी वहीं होगा, जिससे पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।

गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में गोवर्धन पर्वत को प्रकृति और जीवन के संरक्षण का प्रतीक माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पूजा के माध्यम से हमें यह संदेश दिया कि हमें प्रकृति, गौमाता और अन्न की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि यही हमारे जीवन का आधार हैं। इस दिन भक्तजन गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाते हैं और उसमें दीपक जलाते हैं। घरों में अन्नकूट का भोग लगाया जाता है, जिसमें खीर, पूरी, पंजीरी, बताशे और तरह-तरह के व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इन व्यंजनों को श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज को अर्पित किया जाता है।

गोवर्धन पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके घर के आंगन या मंदिर स्थान को साफ करें।
  • शुभ मुहूर्त के अनुसार गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं।
  • अब उस पर रोली, चावल, पुष्प, जल, दूध और केसर अर्पित करें।
  • गोवर्धन महाराज और भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए दीपक जलाएं।
  • अब पूरे परिवार के साथ गोवर्धन की परिक्रमा करें और आरती करें।
  • पूजा के अंत में भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें और प्रसाद वितरित करें।

मान्यता है कि जो भक्त गोवर्धन पूजा के दिन श्रद्धा भाव से भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा करते हैं, उनके जीवन में संपन्नता, सुख और सुरक्षा बनी रहती है।

गोवर्धन पूजा का संदेश

गोवर्धन पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है। यह हमें सिखाती है कि हमें प्रकृति की पूजा, गौसेवा और अन्न का आदर करना चाहिए। यह पर्व हमें यह भी याद दिलाता है कि सच्चा धर्म वही है जो मानवता, करुणा और सेवा पर आधारित हो।

गोवर्धन पूजा से जुड़ी मान्यता

पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव की पूजा के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा का प्रस्ताव रखा, तो इंद्रदेव क्रोधित हो गए और उन्होंने गोकुल पर प्रचंड वर्षा कर दी। तब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर सभी ब्रजवासियों को सुरक्षित स्थान प्रदान किया। सात दिनों तक लगातार वर्षा होने के बाद जब इंद्रदेव ने श्रीकृष्ण की शक्ति और भक्ति को स्वीकार किया, तभी से गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू हुई।

इस दिन करें ये शुभ कार्य

  • सूर्योदय के समय सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • तुलसी के पौधे में दीपक जलाएं।
  • गौमाता की सेवा करें और उन्हें हरी घास या गुड़ खिलाएं।
  • घर में अन्नकूट का भोग लगाएं और प्रसाद बांटें।
  • जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र दान करें।
  • इस दिन न करें ये भूलें
  • घर को गंदा न रखें, यह अशुभ माना जाता है।
  • तामसिक भोजन (मांस, मदिरा आदि) का सेवन न करें।
  • किसी का अपमान न करें, विशेषकर गाय या ब्राह्मण का।

TAGGED:Govardhan Puja 2025Govardhan Puja Date 2025Govardhan Puja in HindiGovardhan Puja MuhuratGovardhan Puja Vidhiअन्नकूट पर्व 2025गोवर्धन पूजा का महत्वगोवर्धन पूजा तिथिगोवर्धन पूजा विधिश्रीकृष्ण गोवर्धन लीला
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article Deepawali 2025 : चारों युगों में दीपावली, अंधकार से प्रकाश की अनंत यात्रा
Next Article गोवर्धन पूजा 2025 पूजा विधि और महत्व गोवर्धन पूजा 2025: क्यों मनाया जाता है यह पर्व, जानिए महत्व, तिथि और पूजा विधि
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

shanidev
अन्य

शनिवार के दिन धन के संकट के लिए करें ये 4 उपाय, मिलेगी शनिदेव की कृपा

By दिव्यसुधा
hanuman ji
अन्य

Hanuman ji : हनुमान जी को “संकटमोचन” क्यों कहा जाता है।

By दिव्यसुधा
भोजन के बाद शतपावली करने का महत्व और आयुर्वेदिक लाभ
अन्य

शतपावली का महत्व: भोजन के बाद 100 कदम चलने का आयुर्वेदिक और आध्यात्मिक रहस्य

By दिव्यसुधा
अन्य

Harnessing the Body’s Natural Processes for Lifelong Health

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?