Saturday, 21 Mar 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > गणगौर 2026: सौभाग्य के लिए जानें व्रत की तिथि और पूजा विधि
व्रत और त्योहार

गणगौर 2026: सौभाग्य के लिए जानें व्रत की तिथि और पूजा विधि

Ekta Mishra
Last updated: March 20, 2026 11:57 am
Ekta Mishra
Share
गणगौर पर्व पर महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में शिव-पार्वती की पूजा करते हुए और श्रृंगार सामग्री अर्पित करते हुए
गणगौर 2026: शिव-पार्वती की पूजा से पाएं सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन
SHARE

चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला गणगौर का पर्व राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर भारत के कई हिस्सों में बड़े भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है। यह पर्व विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन का प्रतीक है, वहीं कुंवारी कन्याओं के लिए मनचाहे वर की प्राप्ति का शुभ अवसर माना जाता है।

गणगौर 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में गणगौर व्रत 21 मार्च, शनिवार को रखा जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि 21 मार्च को सुबह 02 बजकर 30 मिनट पर आरंभ होगी और इसी दिन रात 11 बजकर 56 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इस दिन रवि योग का विशेष संयोग भी बन रहा है, जिसे पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

गणगौर का धार्मिक महत्व
गणगौर शब्द “गण” और “गौर” से मिलकर बना है, जिसमें “गण” का अर्थ भगवान शिव और “गौर” का अर्थ माता पार्वती से है। यह पर्व शिव और शक्ति के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या के बाद भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था, इसलिए यह दिन विशेष रूप से दांपत्य सुख और सौभाग्य से जुड़ा हुआ है।

महिलाओं के लिए विशेष महत्व
चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन आने वाला यह पर्व महिलाओं के लिए किसी महापर्व से कम नहीं होता। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।

गणगौर पूजा विधि
गणगौर के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी या लकड़ी की प्रतिमा स्थापित करें। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की वस्तुएं जैसे मेहंदी, चूड़ियां, सिंदूर और बिंदी अर्पित करें और भगवान शिव को पीले वस्त्र व अक्षत चढ़ाएं।

पूजा के दौरान रोली, अक्षत, फूल और जल से विधिवत पूजन करें। नवरात्रि के दौरान बोए गए जवारे इस पूजा में विशेष रूप से उपयोग किए जाते हैं। माता को फल, मिठाई और विशेष रूप से घेवर का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

पूजा से जुड़ी परंपराएं
पूजा के दौरान गणगौर व्रत की कथा सुनना या पढ़ना अत्यंत शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर गणगौर के गीत गाती हैं और सामूहिक रूप से पूजा करती हैं। अंतिम दिन शाम को महिलाएं गाते-बजाते हुए किसी पवित्र नदी या सरोवर पर जाकर ईसर-गौर की प्रतिमा का विसर्जन करती हैं।

गणगौर पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सामंजस्य को मजबूत करने का संदेश भी देता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चे प्रेम और समर्पण से जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता प्राप्त की जा सकती है।

TAGGED:Gangaur 2026Gangaur Festivalhindu festivalIndian TraditionsMarried Women FestivalNavratri SpecialPuja Vidhi HindiReligious ContentShiv Parvati PujaTeej Tyohar
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article काशी के दुर्गा घाट स्थित माँ ब्रह्मचारिणी मंदिर में पूजा करते श्रद्धालु, गंगा तट के पास दिव्य वातावरण माँ ब्रह्मचारिणी: तप, संयम और ज्ञान की देवी, काशी के दिव्य मंदिरों का महत्व
Next Article बुध ग्रह मार्गी होने से मेष, वृषभ, मिथुन, कुंभ और मीन राशि के लिए तरक्की और नए अवसर का संकेत बुध मार्गी 2026: इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे तरक्की के नए रास्ते
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

ganesh chturthi
व्रत और त्योहार

ज्येष्ठ माह की पहली संकष्टी चतुर्थी व्रत कब रखा जाएगा?

By दिव्यसुधा
चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते श्रद्धालु, सफेद वस्त्र और पूजा सामग्री के साथ
अन्य

चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी की साधना से पाएं मन की शांति और ग्रहों का संतुलन

By Ekta Mishra
बुध प्रदोष व्रत 2025 पर भक्त शिवलिंग की पूजा करते हुए
व्रत और त्योहार

बुध प्रदोष व्रत 2025: तिथि, शुभ योग और भगवान शिव पूजा का समय

By दिव्यसुधा
महानंदा नवमी 2025 पूजा-विधि, तिथि, महत्व और व्रत के लाभ – मां महानंदा की पूजा
व्रत और त्योहार

महानंदा नवमी 2025: तिथि, महत्व, पूजा-विधि और चमत्कारिक लाभ

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?