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दिव्य सुधा > वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा > ईशान कोण वास्तु महत्व: बुद्धि और मानसिक स्वास्थ्य
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

ईशान कोण वास्तु महत्व: बुद्धि और मानसिक स्वास्थ्य

Ekta Mishra
Last updated: January 28, 2026 1:08 pm
Ekta Mishra
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ईशान कोण में मंदिर का वास्तु, मानसिक स्वास्थ्य और बुद्धि के लिए शुभ दिशा
ईशान कोण में मंदिर या पूजा स्थल को साफ और व्यवस्थित रखना मानसिक स्वास्थ्य और निर्णय क्षमता के लिए लाभकारी है।
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वास्तु शास्त्र में ईशान कोण, यानी उत्तर-पूर्व दिशा, केवल पूजा और धार्मिक क्रियाओं का केंद्र नहीं है, बल्कि इसे बुद्धि, विवेक और मानसिक स्वास्थ्य का प्रमुख केंद्र माना गया है। कहा जाता है कि इस दिशा में कोई भी वास्तु दोष सीधे व्यक्ति के सोचने-समझने, निर्णय लेने और मानसिक संतुलन पर असर डालता है। जब बुद्धि प्रभावित होती है, तो व्यक्ति सही समय पर सही निर्णय नहीं ले पाता। इसके परिणामस्वरूप जीवन में अनावश्यक परेशानियां उत्पन्न होती हैं और समस्याओं की जड़ तक पहचान करना कठिन हो जाता है।

ईशान कोण को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखें
वास्तु शास्त्र के अनुसार, चाहे ईशान कोण में मंदिर हो या न हो, इसे हमेशा हल्का, साफ और व्यवस्थित रखना आवश्यक है। स्वच्छ और व्यवस्थित ईशान कोण व्यक्ति की बुद्धि को तेज करता है और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाता है। यदि इस दिशा में गंदगी, अव्यवस्था या अकारण अड़चनें हों, तो मानसिक बोझ और तनाव बढ़ने लगता है।

ईशान कोण में रंगों का महत्व
ईशान कोण में सबसे बड़ा वास्तु दोष रसोई, टॉयलेट, स्टोर रूम या लाल रंग का अत्यधिक प्रयोग माना गया है। लाल रंग की अधिकता क्रोध और चिड़चिड़ेपन को बढ़ाती है, जबकि हल्का पीला रंग बुद्धि और मानसिक संतुलन के लिए उपयोगी माना गया है। यदि इस दिशा में स्टोर रूम हो, तो व्यक्ति हमेशा मानसिक बोझ महसूस करता है और पारिवारिक रिश्तों में तनाव उत्पन्न होता है। कुछ मामलों में ऐसे घरों में बच्चों में मानसिक असंतुलन की समस्या भी देखी जाती है।

ईशान कोण और मंदिर से जुड़े वास्तु नियम

  1. मंदिर में लाल रंग का अधिक प्रयोग न करें। भगवान के वस्त्र छोड़कर दीवारों या सजावट में लाल रंग से बचें।
  2. इस दिशा में हल्का नीला, हरा, सफेद या क्रीम रंग शुभ माना गया है।
  3. पूजा करते समय आपका मुख हमेशा पूर्व या उत्तर की ओर होना चाहिए। भगवान की मूर्तियां भी पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करके रखें।
  4. मंदिर को अत्यधिक सजावटी न बनाएं। इसे सरल, साफ और व्यवस्थित रखें। टूटी-फूटी मूर्तियां या फटी हुई तस्वीरें न रखें।
  5. मंदिर में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। अगरबत्ती या दीपक से धुआं इतना न हो कि वातावरण भारी महसूस हो।
  6. पूजा में उपयोग होने वाली वस्तुएं जैसे दीपक, घंटी, माला आदि केवल पूजा के लिए ही रखें। मंदिर के पास बाथरूम या सीढ़ियां नहीं होनी चाहिए।
  7. मंदिर में बासी फूल या पुराना प्रसाद न रखें।


ईशान कोण में सही वास्तु का पालन करने से न केवल मानसिक स्वास्थ्य मजबूत होता है, बल्कि बुद्धि और निर्णय क्षमता में भी सुधार आता है। यह दिशा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक संतुलन लाती है। यदि आप अपने घर या कार्यस्थल में ईशान कोण को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखते हैं, तो जीवन में सुख-शांति और संतुलन बना रहता है।

TAGGED:ईशान कोणउत्तर-पूर्व दिशापूजा स्थल वास्तुबुद्धि बढ़ाने के उपायमंदिर वास्तुमानसिक स्वास्थ्यवास्तु शास्त्र
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