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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > दुर्गा सप्तशती पाठ: जीवन से पाप, भय और संकट दूर करता है दुर्गा सप्तशती पाठ
सनातन धर्म

दुर्गा सप्तशती पाठ: जीवन से पाप, भय और संकट दूर करता है दुर्गा सप्तशती पाठ

दिव्यसुधा
Last updated: September 24, 2025 2:51 pm
दिव्यसुधा
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मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने श्रद्धा से दुर्गा सप्तशती पाठ करते भक्त
मां दुर्गा की उपासना से मिलती है शक्ति, शांति और सफलता
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नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना और भक्ति का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने के साथ ही दुर्गा सप्तशती पाठ का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि यह पाठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि जीवन के हर संकट से उबरने का दिव्य उपाय है।

क्या है दुर्गा सप्तशती?
दुर्गा सप्तशती को चंडी पाठ भी कहा जाता है। यह ग्रंथ मार्कण्डेय पुराण का हिस्सा है और इसमें मां दुर्गा की महिमा, उनके पराक्रम और असुरों पर विजय का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसमें कुल 700 श्लोक हैं, जो साधक को आध्यात्मिक बल और आंतरिक शांति प्रदान करते हैं। नवरात्रि के दिनों में इस पाठ का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। कहते हैं कि श्रद्धा से किया गया यह पाठ मां दुर्गा की कृपा जल्दी प्राप्त कराता है और साधक के जीवन से सभी विघ्न-बाधाएं दूर करता है।

दुर्गा सप्तशती पाठ करने के प्रमुख लाभ

  1. पापों का नाश – शास्त्रों में वर्णित है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं। यह पाठ मनुष्य की आत्मा को शुद्ध करता है और मन को शांति प्रदान करता है।
  2. भय और संकट से मुक्ति – अगर जीवन में लगातार समस्याएं, शत्रु बाधाएं या भय का माहौल बना रहता है, तो सप्तशती का पाठ करने से राहत मिलती है। यह साधक को नकारात्मक शक्तियों से बचाता है और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
  3. धन और समृद्धि की प्राप्ति – मां दुर्गा को लक्ष्मी स्वरूप भी कहा जाता है। इसलिए सप्तशती का पाठ करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है। दरिद्रता और आर्थिक संकट दूर होते हैं और जीवन में नए अवसर मिलने लगते हैं।
  4. स्वास्थ्य लाभ – सप्तशती पाठ से मानसिक तनाव कम होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कई लोग मानते हैं कि यह गंभीर बीमारियों और कष्टों से मुक्ति दिलाता है।
  5. आध्यात्मिक उन्नति – यह पाठ साधक के भीतर भक्ति, श्रद्धा और आत्मबल को प्रबल करता है। इससे ईश्वर के प्रति विश्वास गहरा होता है और साधक को आत्मिक शांति की अनुभूति होती है।

नवरात्रि में पाठ का महत्व
नवरात्रि के पावन दिनों में हर दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का विशेष महत्व है। इन दिनों साधक को मां दुर्गा की उपासना और मंत्रों की शक्ति का कई गुना फल प्राप्त होता है।

कब और कैसे करें दुर्गा सप्तशती पाठ?

  • पाठ शुरू करने से पहले स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाकर श्रद्धा से पाठ आरंभ करें।
  • पूरा पाठ एक बार में करना श्रेष्ठ माना जाता है।
  • यदि समय की कमी हो, तो इसे सात दिनों या नौ दिनों में भी पूरा किया जा सकता है।
  • पाठ करते समय मन को एकाग्र रखें और श्रद्धा भाव के साथ मां दुर्गा का ध्यान करें।

दुर्गा सप्तशती पाठ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि साधक के जीवन को पवित्र और सार्थक बनाने का मार्ग है। यह पापों का नाश करता है, भय और संकट से मुक्ति दिलाता है, साथ ही समृद्धि और स्वास्थ्य का मार्ग खोलता है। नवरात्रि के शुभ अवसर पर श्रद्धा और भक्ति भाव से यदि दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाए तो मां दुर्गा की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है और जीवन सुख, शांति और सफलता से भर जाता है।

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