भारतीय राजनीति और सनातन संस्कृति के क्षेत्र में गहरी छाप छोड़ने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व सांसद और श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख स्तंभ डॉ. रामविलास वेदांती जी महाराज का आज निधन हो गया। रीवा के एक अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल राजनीतिक जगत, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र को भी अपूरणीय क्षति हुई है।
डॉ. रामविलास वेदांती का जन्म 7 अक्टूबर 1958 को मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गुढ़वा गांव में हुआ था। प्रारंभ से ही उनका झुकाव धर्म, अध्यात्म और राष्ट्रसेवा की ओर रहा। संत परंपरा से जुड़े रहते हुए उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे अयोध्या धाम स्थित वशिष्ठ आश्रम के पूज्य संत के रूप में भी विख्यात थे।
राम जन्मभूमि आंदोलन में ऐतिहासिक भूमिका
डॉ. वेदांती का नाम राम मंदिर आंदोलन के उन प्रमुख नेताओं में शामिल है, जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा इस आंदोलन को समर्पित कर दिया। 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुए बाबरी ढांचा विध्वंस मामले में जिन नेताओं पर मुकदमा चला, उनमें वे भी शामिल थे। यह आंदोलन उनके लिए केवल राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और राष्ट्रीय अस्मिता का प्रश्न था। वर्षों तक चले न्यायिक संघर्ष के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्हें अन्य आरोपियों के साथ बरी कर दिया।
राजनीतिक जीवन और जनप्रतिनिधि के रूप में योगदान
डॉ. रामविलास वेदांती ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर उत्तर प्रदेश से लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1996 में वे मछलीशहर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद 12वीं लोकसभा में उन्होंने प्रतापगढ़ सीट से जीत दर्ज की। संसद में रहते हुए उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को मुखरता से उठाया। उनका राजनीतिक सफर संत-राजनेता की उस परंपरा का प्रतीक था, जिसमें सत्ता को साधन माना गया, लक्ष्य नहीं। वे हमेशा कहते थे कि राजनीति का उद्देश्य समाज को दिशा देना और संस्कृति की रक्षा करना होना चाहिए।
सीएम योगी का भावुक श्रद्धांजलि संदेश
डॉ. वेदांती के निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख स्तंभ और वशिष्ठ आश्रम के पूज्य संत का गोलोकगमन सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने इसे “एक युग का अवसान” बताते हुए कहा कि धर्म, समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित उनका त्यागमय जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा रहेगा।
सनातन चेतना की अमिट विरासत
डॉ. रामविलास वेदांती केवल एक नेता नहीं, बल्कि विचार और आस्था के प्रतीक थे। उनका जीवन रामभक्ति, राष्ट्रसेवा और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को समर्पित रहा। उनका जाना भले ही भौतिक रूप से एक रिक्तता छोड़ गया हो, लेकिन उनके विचार, संघर्ष और योगदान सनातन परंपरा में सदैव जीवित रहेंगे।
प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि वे दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और उनके अनुयायियों व शोकसंतप्त परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।