हिंदू धर्म में पंचक को एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय अवधि माना गया है। यह वह समय है जब चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में भ्रमण करता है और कुल पांच नक्षत्रों धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती से होकर गुजरता है। यह संयोग ही पंचक कहलाता है और आमतौर पर इसे शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार, पंचक के दिनों में विवाह, गृह प्रवेश, निर्माण कार्य, यात्राएं और कई मांगलिक संस्कार नहीं किए जाते।
लेकिन इस बार नवंबर के महीने में लगने वाला पंचक अपने आप में खास है। यह पंचक 27 नवंबर 2025 को दोपहर 2 बजकर 07 मिनट से शुरू होकर 1 दिसंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट तक चलेगा। सबसे खास बात यह है कि यह पंचक गुरुवार के दिन शुरू हो रहा है और ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, गुरुवार से आरंभ होने वाले पंचक को “दोषरहित पंचक” कहा जाता है। ऐसे पंचक में पारंपरिक अशुभता नहीं मानी जाती और कई शुभ काम बाधामुक्त किए जा सकते हैं।
गुरुवार से शुरू होने वाला पंचक क्यों होता है शुभ?
गुरुवार बृहस्पति ग्रह का दिन माना जाता है और बृहस्पति को देवगुरु की उपाधि दी गई है। जब पंचक की शुरुआत इसी दिन होती है, तो यह ऊर्जा को संतुलित कर देता है और पंचक के दोष स्वतः शांत माने जाते हैं। इसीलिए इस अवधि को विष्णु और बृहस्पति से जुड़ी सकारात्मकता का समय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे पंचक में किए गए कार्यों पर नकारात्मक ग्रह प्रभाव नहीं पड़ता और व्यक्ति शुभ परिणाम प्राप्त कर सकता है।
दोषरहित पंचक में क्या करना वर्जित रहता है?
भले ही यह पंचक शुभ हो, परंतु कुछ कार्य अब भी वर्जित माने गए हैं:
• घर की छत डालना या निर्माण कार्य करना
• दक्षिण दिशा की यात्रा
• लकड़ी इकट्ठा करना
• चारपाई बनाना
• दाह संस्कार करना
इन पांच कार्यों को “पंचक के वर्जित कर्म” कहा जाता है और इनसे बचना ही श्रेयस्कर माना जाता है।
किन कार्यों को किया जा सकता है? दोषमुक्त पंचक में निम्नलिखित शुभ कार्य किए जा सकते हैं:
• विवाह
• गृह प्रवेश
• वाहन या संपत्ति की खरीद
• धार्मिक आयोजन
• नामकरण, मुंडन और अन्य संस्कार
ज्योतिषियों का मानना है कि इस पंचक में शुभ ग्रहों की स्थिति के कारण शुभ कार्यों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आती।
पंचक में कौन से मंत्र करें शुभ?
- शिव पंचाक्षरी मंत्र: ॐ नमः शिवाय
- महामृत्युंजय मंत्र: जीवन रक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक शांति हेतु प्रभावी
- गणेश मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः — बाधाओं को दूर करने वाला
माना जाता है कि इन मंत्रों के जाप से पंचक दोष और अधिक शांत होते हैं तथा व्यक्ति के कार्यों में सफलता मिलती है।
संक्षेप में नवंबर 2025 का पंचक हर दृष्टि से विशेष है। गुरुवार से आरंभ होने वाला यह पंचक शुभ कार्यों का मार्ग खोलता है और पारंपरिक भय को दूर करता है। देवगुरु बृहस्पति की कृपा से यह अवधि आध्यात्मिकता, पूजा और सकारात्मक शुरुआतों के लिए अत्यंत शुभ मानी जाएगी।