सावन का महीना भगवान शिव की पूजा और आत्मिक शुद्धि का समय होता है। इस दौरान लोग व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और साधारण व संयमित जीवन अपनाते हैं। इसलिए भोजन में भी विशेष सावधानी रखी जाती है। धार्मिक ग्रंथों और आयुर्वेद के अनुसार कुछ चीजें इस महीने में नहीं खानी चाहिए। इनसे परहेज करना शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है। आइए जानते हैं सावन में किन चीजों से बचना चाहिए और क्यों।
नमक का परहेज
सावन में व्रत के दौरान सादा नमक नहीं खाया जाता। इसकी जगह सेंधा नमक का प्रयोग किया जाता है। मान्यता है कि सादा नमक मन को चंचल बनाता है और व्रत की पवित्रता को भंग कर सकता है। जबकि सेंधा नमक सात्विक होता है और व्रत के लिए उपयुक्त माना जाता है।
सावन में हरी पत्तेदार सब्जियों से क्यों रखें दूरी?
सावन के महीने में पालक, मेथी और बथुआ जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों से परहेज करना चाहिए। इस मौसम में इनमें कीटाणु और संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। धार्मिक रूप से भी ये तामसिक मानी जाती हैं और साधना में बाधा डाल सकती हैं, इसलिए इनसे दूरी बनाना उचित है।
सावन में मांसाहार से करें परहेज?
सावन का महीना भक्ति, संयम और शुद्धता का प्रतीक है। इस दौरान मांस, मछली और अंडे जैसे मांसाहारी भोजन से परहेज करना चाहिए। इससे न केवल आध्यात्मिक शुद्धता बनी रहती है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है। इसलिए मांसाहार से दूरी रखना उचित माना जाता है।
लहसुन और प्याज से रखें दुरी
लहसुन और प्याज को तामसिक माना जाता है, जो मन को चंचल बनाते हैं और भक्ति या ध्यान में एकाग्रता में बाधा डालते हैं। इसलिए सावन में व्रत या पूजा के दौरान इनका सेवन नहीं करना चाहिए। ये शुद्धता और सात्विकता बनाए रखने के नियमों के खिलाफ हैं।
दही और ताजे दुग्ध उत्पाद
सावन में दही, पनीर और मलाई जैसी चीजें जल्दी खराब हो सकती हैं, जिससे पाचन पर बुरा असर पड़ता है। दही कफ और वात बढ़ाने वाला होता है, जिससे सर्दी, खांसी या अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इन चीजों से परहेज करना बेहतर माना गया है।
सावन में आहार से जुड़े नियम केवल धार्मिक कारणों से नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी सही माने गए हैं। इस मौसम में सात्विक और हल्का भोजन पचने में आसान होता है और शरीर को रोगों से बचाता है। शुद्ध और संयमित भोजन मन को शांत रखता है, जिससे ध्यान और पूजा में मन लगता है। इससे शिव भक्ति में श्रद्धा और एकाग्रता बनी रहती है। इसलिए सावन में संतुलित और सात्विक भोजन को महत्व दिया जाता है।