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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > धनतेरस 2025: कब है, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
व्रत और त्योहार

धनतेरस 2025: कब है, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: October 26, 2025 5:59 pm
दिव्यसुधा
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पांच दिवसीय दीपावली उत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है और इसका समापन भाई दूज पर होता है। हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। यह दिन धन, स्वास्थ्य और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इस अवसर पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन बर्तन, सोना-चांदी या झाड़ू जैसी चीज़ें खरीदना शुभ माना जाता है क्योंकि इसे समृद्धि और सौभाग्य का संकेत माना गया है।

धनतेरस 2025 की तारीख और तिथि

इस वर्ष धनतेरस 18 अक्टूबर, शनिवार के दिन मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर को दोपहर 12:20 बजे से होगा और यह 19 अक्टूबर को दोपहर 1:52 बजे समाप्त होगी। शास्त्रों में कहा गया है कि जिस दिन प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि व्याप्त होती है, उसी दिन धनतेरस मनानी चाहिए। ऐसे में इस बार 18 अक्टूबर का दिन धनतेरस पूजा और खरीदारी के लिए सबसे शुभ रहेगा। हालांकि, जिन लोगों से इस दिन खरीदारी न हो सके, वे 19 अक्टूबर दोपहर 1:52 बजे तक भी शुभ कार्य कर सकते हैं। इस बार भक्तजन दोनों दिनों में पूजा और खरीदारी कर सकेंगे।

धनतेरस के शुभ मुहूर्त

18 अक्टूबर 2025, शनिवार को प्रदोष काल का समय सबसे शुभ रहेगा। शुभ मुहूर्त: शाम 4:48 बजे से 6:18 बजे तक। यह समय भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की आराधना के लिए उत्तम रहेगा।

18 अक्टूबर चौघड़िया मुहूर्त

चल चौघड़िया: दोपहर 12:06 से 1:31 तक
लाभ चौघड़िया: 1:31 से 2:57 तक
अमृत चौघड़िया: 2:57 से 4:22 तक
लाभ चौघड़िया (शाम): 5:48 से 7:23 तक
शुभ चौघड़िया: रात 8:58 से 10:33 तक

19 अक्टूबर चौघड़िया मुहूर्त

चल चौघड़िया: सुबह 7:49 से 9:15 तक
लाभ चौघड़िया: 9:15 से 10:40 तक
अमृत चौघड़िया: 10:40 से 12:06 तक
शुभ चौघड़िया: दोपहर 1:31 से 1:52 तक

धनतेरस का धार्मिक महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, धनतेरस का संबंध समुद्र मंथन से जुड़ा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस तिथि को धनत्रयोदशी भी कहा जाता है। धन्वंतरि भगवान विष्णु के अंशावतार हैं और आयुर्वेद के जनक माने जाते हैं। इसी कारण, धनतेरस के दिन उनकी पूजा करने से आरोग्य, दीर्घायु और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
इस दिन माता लक्ष्मी, कुबेर देव और यमराज की पूजा का भी विशेष महत्व है।

धनतेरस पर क्या खरीदें

धनतेरस के दिन शुभ कार्यों की शुरुआत खरीदारी से होती है। इस दिन निम्न वस्तुएं खरीदना अत्यंत शुभ माना गया है —
सोना और चांदी: धन वृद्धि और स्थायी समृद्धि का प्रतीक
बर्तन और धातु की वस्तुएं: घर में सुख और वैभव का संकेत
झाड़ू: लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, जिससे दरिद्रता दूर होती है
दीपक और पूजा सामग्री: सकारात्मक ऊर्जा और घर में शांति का सूचक

धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस के दिन खरीदी गई वस्तुएं 13 गुना अधिक शुभ फल देती हैं, इसलिए इसे ‘धनवृद्धि का पर्व’ कहा जाता है।

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