अच्छी आय होने के बावजूद धन का न टिक पाना आज कई लोगों की बड़ी समस्या बन गया है। मेहनत के बाद भी बचत न हो पाना केवल आय-व्यय के असंतुलन का परिणाम नहीं, बल्कि घर में मौजूद वास्तु दोष भी इसका एक कारण माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि घर की ऊर्जा संतुलित हो तो धन का प्रवाह स्थिर रहता है और अनावश्यक खर्चों में कमी आती है। कुछ सरल उपाय अपनाकर आर्थिक स्थिरता प्राप्त की जा सकती है।
उत्तर दिशा का महत्व
वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन की देवी मां लक्ष्मी और कुबेर महाराज की दिशा माना गया है। यदि यह दिशा साफ, खुली और हल्की रखी जाए तो धन का प्रवाह बेहतर बना रहता है। उत्तर दिशा में गंदगी, कूड़ा-कचरा या भारी सामान रखने से आर्थिक रुकावटें आ सकती हैं। इसलिए इस स्थान को हमेशा स्वच्छ और व्यवस्थित रखें।
टूटी-फूटी वस्तुओं से बचें
घर में टूटे बर्तन, चटका हुआ शीशा या अनुपयोगी सामान नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। विशेष रूप से उत्तर दिशा और रसोई में ऐसी वस्तुएं रखना अशुभ माना गया है। वास्तु विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घर की नियमित साफ-सफाई करें और गैर-जरूरी वस्तुओं को तुरंत बाहर कर दें। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।
तिजोरी की सही दिशा
घर में धन या तिजोरी रखने का स्थान भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। तिजोरी को उत्तर या पूर्व दिशा में रखना शुभ माना गया है। साथ ही, पैसों की अलमारी का मुख उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। यह व्यवस्था धन की आवक को स्थिर और शुभ बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।
विष्णु पूजन का उपाय
धन संबंधी समस्याओं से मुक्ति के लिए प्रत्येक गुरुवार भगवान विष्णु की पूजा करना लाभकारी माना गया है। पीले वस्त्र धारण कर भगवान को पीले पुष्प, चने की दाल और गुड़ अर्पित करें। पीली वस्तुओं का दान भी शुभ फलदायी होता है। इससे आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
मुख्य द्वार पर दीपक
प्रतिदिन संध्या समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का सरल उपाय है। दीपक इस प्रकार रखें कि घर से बाहर निकलते समय वह दाहिनी ओर पड़े। यह उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
इन सरल वास्तु उपायों को अपनाकर न केवल धन की बचत बढ़ाई जा सकती है, बल्कि घर में सुख, शांति और समृद्धि का स्थायी वातावरण भी बनाया जा सकता है।