हिंदू धर्म में देव दीपावली का पर्व अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है। यह पर्व हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध कर देवताओं को भयमुक्त किया था। इस विजय के उपलक्ष्य में देवताओं ने स्वर्ग से दीप जलाकर भगवान शिव की आराधना की थी। तभी से यह दिन “देव दीपावली” के रूप में मनाया जाने लगा। इस दिन गंगा घाटों पर दीपों की अद्भुत छटा देखने योग्य होती है।
देव दीपावली 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
कार्तिक पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 4 नवंबर, रात 10:36 बजे
समापन: 5 नवंबर, शाम 6:48 बजे
देव दीपावली 2025 का पर्व: 5 नवंबर (बुधवार)
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:46 से 5:37 तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:56 से 2:41 तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:40 से 6:05 तक
इन मुहूर्तों में की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
देव दीपावली पूजा विधि
इस दिन प्रातःकाल स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में पूजा करना विशेष शुभ होता है।
- पूजा स्थान पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें।
- देसी घी का दीपक जलाएं और फूल-माला अर्पित करें।
- शिवलिंग का कच्चे दूध, दही, शहद, घी और पंचामृत से अभिषेक करें।
- शिव चालीसा या मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जप करें।
- फलों और मिठाइयों का भोग लगाएं तथा परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
ऐसा करने से भगवान शिव की कृपा से जीवन में सभी दुखों और कष्टों का नाश होता है।
दीपदान का धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में देव दीपावली के दिन दीपदान का विशेष स्थान है। वाराणसी, प्रयागराज, हरिद्वार जैसे तीर्थों में गंगा घाटों पर हजारों दीपों से अद्भुत दृश्य बनता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार —
“दीपदानं महापुण्यं सर्वपापप्रणाशनम्।”
अर्थात देव दीपावली के दिन दीपदान करने से पापों का नाश होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
दान का महत्व
देव दीपावली के दिन दान करना अनिवार्य माना गया है। इस दिन अन्न, वस्त्र या जरूरतमंदों को दान करने से जीवन में कभी दरिद्रता नहीं आती। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान सैकड़ों गुना फल देता है और ईश्वर की कृपा सदा बनी रहती है।