Thursday, 5 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > Deepawali 2025 : चारों युगों में दीपावली, अंधकार से प्रकाश की अनंत यात्रा
व्रत और त्योहार

Deepawali 2025 : चारों युगों में दीपावली, अंधकार से प्रकाश की अनंत यात्रा

दिव्यसुधा
Last updated: October 14, 2025 10:56 am
दिव्यसुधा
Share
SHARE

कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला दीपावली का पर्व भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व केवल दीप जलाने या मिठाइयां बाँटने का नहीं, बल्कि आत्मिक जागृति और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। माना जाता है कि जैसे साधक ध्यान के माध्यम से अपने मन के अंधकार को मिटाता है, वैसे ही दीपावली में दीपक जलाकर व्यक्ति अपने जीवन से अज्ञान और नकारात्मकता को दूर करता है। सनातन धर्म के अनुसार, दीपक को भगवान विष्णु का प्रतीक माना गया है, इसलिए दीपावली आत्मा के जागरण और ईश्वरीय प्रकाश का उत्सव है। इस दिन घरों में दीप जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में माता लक्ष्मी का आगमन माना जाता है।

सतयुग में दीपावली की शुरुआत
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। इस मंथन से कई दिव्य रत्नों के साथ भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। यह तिथि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी थी, जिसे आज धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। समुद्र मंथन के दौरान ही माता लक्ष्मी का भी प्राकट्य हुआ, जो कमल के फूल पर विराजमान थीं। माता लक्ष्मी की कृपा से ही समृद्धि और वैभव प्राप्त होता है, इसलिए देवताओं ने उनके प्रकट होने की खुशी में दीप जलाए। उसी क्षण से दीपावली मनाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी जारी है।

त्रेतायुग की दीपावली कथा
त्रेतायुग में दीपावली का महत्व भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़ा है। वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास की रामचरितमानस के अनुसार, जब भगवान राम 14 वर्षों का वनवास पूर्ण कर माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे, तो नगरवासियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पूरे अयोध्या नगरी को दीपों से सजाया गया। हर घर, हर गली, हर मार्ग प्रकाश से जगमगा उठा। यह दिन कार्तिक अमावस्या का था। भगवान राम के लौटने से अंधकार मिटा और धर्म की पुनर्स्थापना हुई। इसी खुशी में दीपावली का त्योहार मनाया गया और तब से यह दिन अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक बन गया।

द्वापरयुग की दीपावली कथा
द्वापरयुग में भी दीपावली से जुड़ी एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि इस युग में नरकासुर नामक एक दानव था जिसने देवताओं और मनुष्यों पर अत्याचार बढ़ा दिए थे। उसने कई कन्याओं को बंदी बना रखा था। जब उसके अत्याचार असहनीय हो गए, तब भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी सत्यभामा, जो पृथ्वी देवी का अवतार थीं, ने राक्षस नरकासुर का संहार किया। यह दिन कार्तिक मास की चतुर्दशी का था। नरकासुर के वध की खुशी में लोगों ने अपने घरों में दीपक जलाए और उल्लास मनाया। तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी और अगले दिन कार्तिक अमावस्या को दीपावली के रूप में मनाने की परंपरा चली आ रही है।

दीपावली का आध्यात्मिक महत्व
दीपावली केवल बाहरी प्रकाश का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आंतरिक ज्योति को प्रज्वलित करने का संदेश भी देती है। हर दीपक यह प्रतीक है कि हमें अपने भीतर की अच्छाई को जगाना चाहिए और अंधकार यानी नकारात्मक विचारों को मिटाना चाहिए। दीपक का प्रकाश यह दर्शाता है कि भले ही अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, एक छोटी सी लौ भी पूरे वातावरण को रोशन कर सकती है। यह पर्व आत्मचिंतन और कृतज्ञता का समय है अपने जीवन में ईश्वर के आशीर्वाद को पहचानने और दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाने का अवसर है।

दीपावली का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
दीपावली केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पर्व एकता, भाईचारा और प्रेम का प्रतीक बन गया है। लोग एक-दूसरे को मिठाइयां देते हैं, रिश्तों में नई गर्माहट लाते हैं और समाज में सौहार्द का संदेश देते हैं। इस दिन व्यापारी नया लेखा-जोखा शुरू करते हैं और इसे अपने व्यवसाय की नई शुरुआत मानते हैं। देश के हर राज्य में दीपावली की अपनी विशेष परंपराएँ हैं कहीं इसे काली पूजा के रूप में मनाया जाता है, तो कहीं गोवर्धन पूजा के रूप में।

युगों से चला आ रहा प्रकाश का उत्सव
चारों युगों में दीपावली अलग-अलग रूपों में मनाई गई, लेकिन इसका मूल संदेश सदैव एक ही रहा अंधकार पर प्रकाश की विजय। यह त्योहार हमें सिखाता है कि चाहे समय कितना भी बदल जाए, सच्चाई, धर्म और प्रकाश की शक्ति कभी कम नहीं होती। यही कारण है कि दीपावली आज भी पूरे भारत और विश्व में सबसे प्रिय और उत्साहपूर्ण पर्व के रूप में मनाई जाती है। यह त्योहार हर हृदय में आशा, प्रेम और आत्मिक प्रकाश का दीप प्रज्वलित करता है।

TAGGED:Deepawali 2025कार्तिक मास का महत्वदीपावली 2025दीपावली की कथालक्ष्मी पूजन 2025समुद्र मंथन
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article कार्तिक अमावस्या 2025: भगवान विष्णु और लक्ष्मी की पूजा करते हुए श्रद्धालु कार्तिक अमावस्या 2025: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और उपाय
Next Article गोवर्धन पूजा 2025 – भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की दिव्य लीला और अन्नकूट उत्सव गोवर्धन पूजा 2025 : जानिए कब है तारीख, महत्व और विधि
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

pradosh vart
व्रत और त्योहार

शिव और शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनि प्रदोष पर अपनाएं ये उपाय

By दिव्यसुधा
व्रत और त्योहार

सावन 2025: जानें तिथियां, व्रत, शिव पूजन विधि और अभिषेक के खास फल

By दिव्यसुधा
shree ram
व्रत और त्योहार

नवरात्रि विशेष… राम नवमी पर बन रहे कई दुर्लभ संयोग, करिये ये 3 उपाय चमक सकती है किस्मत!

By दिव्यसुधा
संकष्टी चतुर्थी 2025 पर भगवान गणेश की पूजा और व्रत का शुभ मुहूर्त
व्रत और त्योहार

विनायक चतुर्थी 2025: कब है और क्यों मनाई जाती है

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?