Sunday, 22 Mar 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > दक्षिणेश्वर काली मंदिर कोलकाता : इतिहास, दर्शन समय और महत्व
मंदिर

दक्षिणेश्वर काली मंदिर कोलकाता : इतिहास, दर्शन समय और महत्व

Ekta Mishra
Last updated: March 22, 2026 10:56 am
Ekta Mishra
Share
दक्षिणेश्वर काली मंदिर कोलकाता में गंगा किनारे स्थित मां काली का भव्य मंदिर
गंगा तट पर बसा दक्षिणेश्वर काली मंदिर – भक्ति, शांति और आस्था का प्रतीक
SHARE

दक्षिणेश्वर काली टेम्पल कोलकाता के निकट गंगा नदी के पूर्वी तट पर स्थित एक अत्यंत प्रसिद्ध और पवित्र धार्मिक स्थल है, जो मां काली को समर्पित है। यह मंदिर न केवल श्रद्धा और भक्ति का केंद्र है, बल्कि बंगाल की समृद्ध संस्कृति, कला और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं और मां भवतारिणी के आशीर्वाद से अपने जीवन में सुख-शांति की कामना करते हैं।

मंदिर का इतिहास और निर्माण
इस भव्य मंदिर की स्थापना 19वीं शताब्दी में रानी रासमणि द्वारा की गई थी। कहा जाता है कि वे काशी यात्रा पर जाने वाली थीं, लेकिन यात्रा से पहले उन्हें स्वप्न में मां काली के दर्शन हुए। देवी ने उन्हें आदेश दिया कि वे गंगा के किनारे एक भव्य मंदिर का निर्माण करें और वहीं उनकी पूजा करें। इस दिव्य संकेत के बाद रानी ने लगभग 20 एकड़ भूमि खरीदी और वर्ष 1847 में मंदिर निर्माण कार्य शुरू करवाया। लगभग आठ वर्षों की मेहनत के बाद 31 मई 1855 को मंदिर का भव्य उद्घाटन हुआ, जिसमें हजारों ब्राह्मणों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

अद्भुत स्थापत्य कला
दक्षिणेश्वर काली मंदिर बंगाल की प्रसिद्ध नव-रत्न शैली में निर्मित है। यह तीन मंजिला संरचना है, जिसके शीर्ष पर नौ शिखर सुशोभित हैं। मंदिर के गर्भगृह में मां काली “भवतरिणी” के रूप में विराजमान हैं, जो शिवा के वक्ष पर खड़ी दिखाई देती हैं। यह मूर्ति चांदी के एक हजार पंखुड़ियों वाले कमल पर स्थापित है, जो इसकी दिव्यता और भव्यता को और बढ़ाता है।

मंदिर परिसर में 12 छोटे-छोटे शिव मंदिर भी स्थित हैं, जिनमें काले पत्थर के शिवलिंग स्थापित हैं। इसके अतिरिक्त, यहां राधा-कृष्ण का एक सुंदर मंदिर भी है, जो वैष्णव परंपरा का प्रतीक है। गंगा के किनारे स्थित घाट इस स्थल की आध्यात्मिक शांति को और अधिक गहरा बना देते हैं।

आध्यात्मिक महत्व
यह मंदिर केवल पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि गहन साधना और आत्मिक अनुभव का केंद्र भी है। महान संत रामकृष्ण परमहंस ने यहां लगभग 14 वर्षों तक साधना की और मां काली की भक्ति में लीन रहे। उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं।

मंदिर परिसर में स्थित पंचवटी, बकुलतला घाट और नहबत खाना जैसे स्थान उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं के साक्षी हैं। यहां का वातावरण आज भी साधकों और भक्तों को ध्यान और भक्ति में डूबने का अवसर प्रदान करता है।

सांस्कृतिक और सामाजिक विशेषता
रानी रासमणि ने इस मंदिर को सभी धर्मों और जातियों के लिए खुला रखा था। यह विचार उस समय अत्यंत प्रगतिशील था और आज भी यह मंदिर समावेशिता और समानता का संदेश देता है। यहां हर वर्ग और धर्म के लोग बिना किसी भेदभाव के दर्शन करने आते हैं और आंतरिक शांति का अनुभव करते हैं।

यात्रा और दर्शन
दक्षिणेश्वर काली मंदिर तक पहुंचना बहुत आसान है। यह कोलकाता शहर से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। निकटतम रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा कोलकाता में ही हैं, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचना सुविधाजनक है।

मंदिर के दर्शन का समय प्रातः 6:30 बजे से सायं 7:30 बजे तक होता है। विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है और पूरा वातावरण भक्ति और उत्साह से भर जाता है।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम है। यहां आने वाला हर व्यक्ति न केवल मां काली के दर्शन करता है, बल्कि आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव भी करता है। यदि आप भी जीवन में आध्यात्मिक संतुलन और शांति की तलाश में हैं, तो यह पावन धाम आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।

पुरी के प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में स्थित बिमला मंदिर देवी शक्ति का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण धाम माना जाता है। यह मंदिर मां दुर्गा के बिमला रूप को समर्पित है और इसे 51 शक्तिपीठों में भी विशेष स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि यहां माता सती का पैर गिरा था, जिससे यह स्थान अत्यंत दिव्य बन गया। बिमला मंदिर की एक खास परंपरा यह है कि जगन्नाथ मंदिर में तैयार महाप्रसाद पहले मां बिमला को अर्पित किया जाता है, तभी वह पूर्ण रूप से पवित्र माना जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है और भक्त बड़ी श्रद्धा से दर्शन करने पहुंचते हैं। यह मंदिर शक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम है।

TAGGED:Dakshineshwar Kali TempleHindu Temples IndiaIndian CultureKali BhaktiKolkata TemplesMaa Kali TempleNavratri SpecialRamakrishna ParamahamsaSpiritual Places IndiaWest Bengal Tourism
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article माता कुंती और श्रीकृष्ण का महाभारत के बाद संवाद आखिर क्यों माता कुंती ने मांगा ईश्वर से दुःख
Next Article नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा और उनकी अष्टभुजा स्वरूप की दिव्य छवि नवरात्रि का चौथा दिन: मां कुष्मांडा की पूजा का महत्व
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

गढ़मुक्तेश्वर मंदिर हापुड़ में गंगा तट पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर
मंदिर

गढ़मुक्तेश्वर मंदिर: इतिहास, रहस्य और धार्मिक महत्व

By Ekta Mishra
केरल के पर्वतीय क्षेत्र में स्थित सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु
मंदिर

सबरीमाला मंदिर: तप, संयम और दिव्य आस्था का अद्वितीय तीर्थ

By Ekta Mishra
चिदंबरम नटराज मंदिर में भगवान शिव का नटराज रूप, आनंद तांडव और आकाश तत्व का दिव्य प्रतीक
मंदिर

चिदंबरम नटराज मंदिर: शिव का आनंद तांडव और आकाश तत्व का रहस्य

By दिव्यसुधा
लखनऊ के अर्जुनगंज स्थित मरी माता मंदिर परिसर में टंगी हजारों घंटियां और श्रद्धालुओं द्वारा जलाए गए दीपक।
मंदिर

मां का अनोखा दरबार: जहां सिर्फ घंटियां बांधने से पूरी हो जाती हैं मुरादें

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?