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दिव्य सुधा > featured > सुंदरकांड की इस चौपाई का कर लें जाप, शनिदेव संग हनुमान जी भी होंगे प्रसन्न, दूर होंगे संकट
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सुंदरकांड की इस चौपाई का कर लें जाप, शनिदेव संग हनुमान जी भी होंगे प्रसन्न, दूर होंगे संकट

सुंदरकांड की चौपाई "पुनि संभारि उठि सो लंका…" का जाप करने से संकट दूर होते हैं।

दिव्यसुधा
Last updated: September 2, 2025 6:05 pm
दिव्यसुधा
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सुंदरकांड चौपाई का जाप करें, हनुमान जी और शनिदेव की एकसाथ कृपा पाएं।
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Highlights
  • मंगलवार और शनिवार को सुंदरकांड पाठ का विशेष महत्व।
  • कलयुग में हनुमान जी को जाग्रत देवता माना जाता है।
  • इस चौपाई के जाप से शनिदेव भी प्रसन्न होते हैं।

सनातन धर्म में प्रत्येक दिन किसी न किसी देवता को समर्पित माना गया है। ठीक उसी प्रकार मंगलवार और शनिवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है। इस दिन भक्तजन हनुमान मंदिरों में जाकर पूजा, अर्चना, सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से सभी संकट दूर हो जाते हैं और भक्तों पर हनुमान जी की विशेष कृपा बनी रहती है।

साधु-संतों का कहना है कि कलयुग में हनुमान जी ही ऐसे जाग्रत देवता हैं, जिनकी पूजा-अर्चना तुरंत फल देती है। उनके चरणों में सच्चे मन से भक्ति करने से जीवन में आई हर कठिनाई स्वतः समाप्त हो जाती है।

सुंदरकांड का महत्व
रामचरितमानस का एक कांड है जिसे ‘सुंदरकांड’ कहा जाता है। इसमें हनुमान जी की महिमा, उनके साहस और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी भक्ति का विस्तार से वर्णन मिलता है। सुंदरकांड का पाठ करने से न केवल भय और संकट दूर होते हैं, बल्कि यह भी माना जाता है कि इससे शनिदेव भी प्रसन्न हो जाते हैं। विशेषकर एक चौपाई ऐसी है, जिसका जाप करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। यह चौपाई तब लिखी गई थी जब हनुमान जी ने लंका प्रवेश किया और लंकिनी राक्षसी से उनका सामना हुआ।

चौपाई और उसका अर्थ
“पुनि संभारि उठि सो लंका, जोरि पानि कर बिनय संसका।
जब रावनहि ब्रह्म बर दीन्हा, चलत बिरंचि कहा मोहि चीन्हा।।
बिकल होसि तैं कपि कें मारे, तब जानेसु निसिचर संघारे।
तात मोर अति पुन्य बहूता, देखेउँ नयन राम कर दूता।।“

इस चौपाई का भावार्थ इस प्रकार है— पुनि संभारि उठि सो लंका… अर्थात लंकिनी जब हनुमान जी के प्रहार से गिरी तो उसने स्वयं को संभालते हुए हाथ जोड़कर विनम्रता से कहा।

जब रावनहि ब्रह्म बर दीन्हा… अर्थात जब रावण को ब्रह्मा जी ने वरदान दिया था, तो उन्होंने मुझे बताया था कि जब कोई बंदर मुझे मारेगा, तब समझना राक्षसों का नाश होने वाला है।

बिकल होसि तैं कपि कें मारे… अर्थात आज तुमने मुझे मारा है, इसका अर्थ यही है कि राक्षसों का अंत निश्चित है।

तात मोर अति पुन्य बहूता… अर्थात मेरे बहुत पुण्य हैं कि मैंने अपने नेत्रों से भगवान राम के दूत का दर्शन किया।

हनुमान जी के दर्शन और शनि कृपा
इस चौपाई के जाप से न केवल हनुमान जी प्रसन्न होते हैं बल्कि शनिदेव की कृपा भी प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यता है कि शनिदेव स्वयं हनुमान जी के भक्त हैं। जो भी भक्त हनुमान जी की उपासना करता है, उस पर शनिदेव भी अपनी विशेष कृपा बरसाते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि सुंदरकांड का पाठ करने से शनि की ढैया और साढ़ेसाती जैसे कष्टकारी समय का प्रभाव कम हो जाता है। यही कारण है कि शनिवार को हनुमान जी को सरसों के तेल का दीपक अर्पित करने और सुंदरकांड पढ़ने की परंपरा है।

सुंदरकांड पाठ से मिलने वाले लाभ

  • जीवन के सभी संकट और भय दूर होते हैं।
  • घर-परिवार में शांति और सुख-समृद्धि बनी रहती है।
  • शनि की पीड़ा और ग्रहदोष का प्रभाव कम हो जाता है।
  • रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं।
  • मानसिक शांति और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।

साधु-संतों की मान्यता
आध्यात्मिक विद्वान शशिकांत दास बताते हैं कि यह चौपाई हनुमान जी की पहचान को भगवान राम के दूत के रूप में दर्शाती है। जब भी कोई भक्त इस चौपाई का श्रद्धा से जाप करता है, उसके जीवन में हर तरह के कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं। प्रभु राम और हनुमान जी की कृपा से बाधित कार्य पूरे होते हैं और शनिदेव भी कृपा करते हैं।

मंगलवार और शनिवार का विशेष महत्व
धार्मिक परंपरा के अनुसार मंगलवार और शनिवार के दिन विशेष रूप से हनुमान जी का पूजन करना चाहिए। इस दिन सुंदरकांड का पाठ करने से दुगुना फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि इन दिनों मंदिरों में हनुमान जी के दर्शन हेतु भारी संख्या में भक्त जुटते हैं।

TAGGED:hanumanhumare bhgwanशनिदेवसनातन धर्मसुंदरकांडहनुमानचालीसाहनुमानजी
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