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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: मां कालरात्रि की आराधना का विशेष महत्व
व्रत और त्योहार

चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन: मां कालरात्रि की आराधना का विशेष महत्व

Ekta Mishra
Last updated: March 25, 2026 10:20 am
Ekta Mishra
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मां कालरात्रि की पूजा करते भक्त, गुड़ का भोग और दीपक के साथ नवरात्रि सप्तमी आराधना
नवरात्रि सप्तमी पर मां कालरात्रि की आराधना से भय और नकारात्मकता होती है दूर
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चैत्र नवरात्रि का सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है, जो मां दुर्गा का सबसे उग्र और शक्तिशाली स्वरूप मानी जाती हैं। उनका रंग घने अंधकार के समान काला है और उनके तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह विशाल एवं तेजस्वी हैं। मां कालरात्रि को “शुभंकरी” भी कहा जाता है, क्योंकि उनका उग्र रूप केवल दुष्टों और पापियों के लिए है, जबकि अपने भक्तों के लिए वे सदैव शुभ और कल्याणकारी होती हैं। उनकी कृपा से जीवन के सभी भय और संकट दूर हो जाते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त और समय
मां कालरात्रि की पूजा के लिए सुबह का शुभ समय प्रातः 06:20 बजे से 08:45 बजे तक माना गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:03 बजे से 12:51 बजे तक अत्यंत फलदायी होता है। इन समयों में विधिपूर्वक पूजा करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है और मां की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।

कैसे करें मां कालरात्रि की पूजा?
मां कालरात्रि की पूजा में शुद्धता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन गहरे नीले या लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा की शुरुआत में मां की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं और उन्हें लाल फूल, विशेषकर गुड़हल अर्पित करें। इसके बाद गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं, क्योंकि यह मां को अत्यंत प्रिय है।

पूजा के दौरान श्रद्धा भाव से आरती करें और कपूर जलाकर घर की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करें। यह साधना न केवल आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है, बल्कि मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास भी बढ़ाती है।

मंत्र जाप और आध्यात्मिक लाभ
मां कालरात्रि की पूजा करते समय “ॐ देवी कालरात्र्यै नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस मंत्र का नियमित जप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही यह मंत्र भय, तनाव और नकारात्मकता को समाप्त कर मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

मां कालरात्रि की कृपा से भक्तों को शत्रुओं पर विजय, साहस और निर्भयता का आशीर्वाद मिलता है। पूजा के अंत में भगवान का आभार व्यक्त करना भी आवश्यक है, जिससे साधना पूर्ण होती है।

गुड़ के भोग का विशेष महत्व
मां कालरात्रि को गुड़ का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सप्तमी के दिन गुड़ या उससे बनी मिठाइयों का भोग लगाने से जीवन के अचानक आने वाले संकट टल जाते हैं। यह भोग न केवल मां को प्रिय है, बल्कि यह भक्तों के आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है और मन के भय को दूर करता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से भी गुड़ सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है, जो जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने में सहायक होता है। जब श्रद्धा और विश्वास के साथ मां को यह भोग अर्पित किया जाता है, तो जीवन में सुख-समृद्धि के द्वार खुलते हैं।

मां कालरात्रि की सच्चे मन से की गई आराधना जीवन के अंधकार को समाप्त कर उसे प्रकाश से भर देती है। उनकी कृपा से भय, संकट और नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि का वास होता है।

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