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दिव्य सुधा > वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा > वास्तु शास्त्र के अनुसार कार में भगवान की मूर्ति: सही दिशा, सही मुद्रा और जरूरी नियम
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

वास्तु शास्त्र के अनुसार कार में भगवान की मूर्ति: सही दिशा, सही मुद्रा और जरूरी नियम

Ekta Mishra
Last updated: February 5, 2026 11:55 am
Ekta Mishra
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कार के डैशबोर्ड पर जागृत मुद्रा में भगवान गणेश की मूर्ति – वास्तु शास्त्र अनुसार शुभ व्यवस्था
वास्तु शास्त्र अनुसार कार में जागृत मुद्रा वाली भगवान गणेश की मूर्ति शुभ मानी जाती है।
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वास्तु शास्त्र में केवल घर ही नहीं, बल्कि वाहन को भी ऊर्जा का वाहक माना गया है। आज के समय में कार हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है, इसलिए उसमें सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। यही कारण है कि अधिकांश लोग अपनी कार में भगवान की मूर्ति या तस्वीर अवश्य रखते हैं। मान्यता है कि इससे यात्रा सुरक्षित रहती है, मन एकाग्र रहता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। लेकिन वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, कार में हर प्रकार की मूर्ति या तस्वीर रखना शुभ नहीं होता।

कार एक गतिशील स्थान है, जहां निरंतर गति बनी रहती है। ऐसे में वहां रखी गई मूर्ति की मुद्रा का सीधा प्रभाव चालक के मन और एकाग्रता पर पड़ता है। विशेष रूप से ध्यान मुद्रा में बैठे भगवान की मूर्तियां कार में रखने से बचना चाहिए।

ध्यान मुद्रा वाली मूर्तियां क्यों नहीं रखनी चाहिए?
वास्तु शास्त्र के अनुसार, ध्यान मुद्रा शांति, स्थिरता और आत्मचिंतन का प्रतीक होती है। यह अवस्था साधना और स्थिर स्थानों के लिए उपयुक्त मानी जाती है, जबकि कार एक चलता हुआ माध्यम है। ध्यान मुद्रा वाली मूर्ति ड्राइवर के मन को भीतर की ओर मोड़ सकती है, जिससे एकाग्रता कम होने और ध्यान भटकने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ कार में ध्यान मुद्रा वाली मूर्तियों या तस्वीरों को अशुभ मानते हैं। खासतौर पर गणेश जी की ध्यान मुद्रा वाली तस्वीर या मूर्ति से बचना चाहिए। भले ही भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, लेकिन वाहन के लिए उनकी जागृत या आशीर्वाद मुद्रा अधिक शुभ मानी जाती है।

कार में कौन-सी मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ होता है?
कार में ऐसी मूर्ति या तस्वीर लगानी चाहिए जिसमें भगवान की आंखें खुली हों और मुद्रा जागृत अवस्था की हो। जागृत मुद्रा सतर्कता, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती है। भगवान गणेश की आशीर्वाद देती हुई मुद्रा या भगवान शिव की शांत लेकिन जागृत तस्वीर वाहन के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। ऐसी मूर्तियां यात्रा के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखती हैं और दुर्घटनाओं की संभावना को कम करने में सहायक मानी जाती हैं।

कार में मूर्ति लगाने के सही नियम
यदि आप कार में भगवान की मूर्ति या तस्वीर रखना चाहते हैं, तो कुछ वास्तु नियमों का पालन अवश्य करें। मूर्ति को डैशबोर्ड के बीच ऐसी जगह रखें, जहां आपकी नजर बार-बार उस पर न जाए और ड्राइविंग के दौरान ध्यान न भटके। मूर्ति लगाने से पहले गंगाजल से शुद्धिकरण करें और संक्षिप्त पूजा अवश्य करें।

कभी भी टूटी या खंडित मूर्ति कार में न रखें, क्योंकि इसे वास्तु दोष का कारण माना जाता है। मूर्ति पर फूल, माला या भारी सजावट न करें, इससे ड्राइविंग में बाधा आ सकती है। समय-समय पर मूर्ति की साफ-सफाई करते रहें, ताकि उस पर धूल या गंदगी जमा न हो।

सही मूर्ति से मिलने वाले लाभ
वास्तु मान्यताओं के अनुसार, कार में सही प्रकार की मूर्ति या तस्वीर रखने से यात्रा सुरक्षित रहती है, मन शांत और केंद्रित रहता है तथा नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। जागृत मुद्रा वाली मूर्ति विघ्नों को दूर करती है और आत्मविश्वास बढ़ाती है। इससे वाहन में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और हर सफर मंगलमय होता है।

कुल मिलाकर, कार में भगवान की मूर्ति रखना आस्था का विषय जरूर है, लेकिन यदि इसे वास्तु नियमों के अनुसार किया जाए, तो यह आध्यात्मिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है और जीवन यात्रा को अधिक सुरक्षित व सुखद बनाता है।

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