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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > बिठूर के बप्पा की अद्भुत मूर्ति : सूर्य-चंद्र की पहली किरण और दाहिनी नाक का रहस्य
मंदिर

बिठूर के बप्पा की अद्भुत मूर्ति : सूर्य-चंद्र की पहली किरण और दाहिनी नाक का रहस्य

दिव्यसुधा
Last updated: June 3, 2025 6:01 pm
दिव्यसुधा
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हम जीवन के प्रत्येक कार्य के शुरुआत में बप्पा की मंगलमूर्ति का हम स्मरण करते हैं। भगवान गणेश की छवि हमारे मन में सहज रूप से बस जाती है, क्योंकि वे भक्तों के प्रेम में बंधे रहते हैं। ऐसी दिव्य अनुभूति कानपुर के पास स्थित तीर्थ स्थल बिठूर के गणेश मंदिर में आसानी से होती है, जहां बप्पा की कृपा हर भक्त महसूस कर सकता है।

मंदिर का इतिहास

बिठूर के गणेश मंदिर का इतिहास आदि काल से जुड़ा हुआ है ल यह मंदिर 400 साल से भी ज्यादा पुराना है। क्रांतिकारी नानाराव पेशवा और रानी लक्ष्मीबाई भी यहां दर्शन के लिए आते थे। मंदिर में स्थापित गणपति बप्पा की मूर्ति का मुख पूर्व दिशा की ओर है, इसलिए सूर्य और चंद्रमा की पहली किरण सीधे बप्पा पर पड़ती है। यहां भगवान को सिद्ध विनायक रूप में पूजा जाता है और उन्हें सिंदूर चढ़ाया जाता है। बिठूर का यह गणेश मंदिर इतना सिद्ध और चमत्कारी माना जाता है कि यहां मांगी गई मनोकामनाएं बप्पा जल्दी पूरी कर देते हैं। सिंदूर से सजे हुए गणपति बप्पा के दर्शन और पूजा करने से व्यक्ति को अच्छा स्वास्थ्य, पापों से मुक्ति, अच्छे लोगों का साथ, योग्य संतान, लंबी आयु और आठों सिद्धियां प्राप्त होती हैं।

प्रगट हुई मां गंगा

यहाँ प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक बार अंग्रेज सेना ने इस मंदिर को तोप से उड़ाने की कोशिश की, तब मां गंगा खुद प्रकट हो गईं। अचानक गंगा में बाढ़ आ गई और मंदिर बालू में पूरी तरह ढंक गया। बहुत खोजने के बाद भी अंग्रेज सैनिक गणेश प्रतिमा ढूंढ नहीं पाए। काफी समय बाद लोगों ने बालू के नीचे से गणेश जी की प्रतिमा को निकाला और फिर से पूजा शुरू की। तब से यह स्थान और भी चमत्कारी माना जाने लगा। इस प्राचीन मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा बाकी मंदिरों से अलग है। यहां बप्पा की सूंड़ दाहिनी ओर मुड़ी हुई है और वे अपने वाहन चूहे पर सवार हैं। ऐसी प्रतिमा बहुत ही दुर्लभ होती है और बहुत खास मानी जाती है।

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