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दिव्य सुधा > वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा > वास्तु शास्त्र : बिना गृह प्रवेश पूजा के नए घर में रहना क्यों माना जाता है अशुभ?
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

वास्तु शास्त्र : बिना गृह प्रवेश पूजा के नए घर में रहना क्यों माना जाता है अशुभ?

Ekta Mishra
Last updated: February 2, 2026 12:23 pm
Ekta Mishra
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बिना गृह प्रवेश पूजा के नए घर में रहना क्यों अशुभ माना जाता है – वास्तु शास्त्र
गृह प्रवेश पूजा घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि का प्रवेश कराती है
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जब हम अपने नए घर में प्रवेश करते हैं, तो उसके साथ अनगिनत सपने, उम्मीदें और भावनात्मक जुड़ाव भी जुड़ा होता है। नया घर केवल ईंट, सीमेंट और दीवारों का ढांचा नहीं होता, बल्कि यह जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक होता है। भारतीय संस्कृति में नए घर में प्रवेश करने से पहले गृह प्रवेश पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यह पूजा न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार भी अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।

गृह प्रवेश पूजा का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, जब कोई नया घर बनता है या लंबे समय तक खाली रहता है, तो उसमें विभिन्न प्रकार की ऊर्जाएं एकत्रित हो जाती हैं। इनमें सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की ऊर्जाएं हो सकती हैं। गृह प्रवेश पूजा का मुख्य उद्देश्य घर को शुद्ध करना, नकारात्मक शक्तियों को दूर करना और देवताओं का आह्वान कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना होता है। इस पूजा के माध्यम से घर में सुख, शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य का वास होता है। यही कारण है कि चाहे स्वयं का घर हो या किराए का, उसमें रहने से पहले पूजा कराना शुभ माना जाता है।

बिना गृह प्रवेश के नए घर में रहने के नुकसान
वास्तु शास्त्र के अनुसार, बिना गृह प्रवेश पूजा के नए घर में रहना अशुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में रहने वाले लोगों को मानसिक तनाव, आपसी मतभेद, आर्थिक परेशानियां और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से यदि कोई घर लंबे समय तक खाली रहा हो, तो उसमें स्थिर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। बिना पूजा के उस घर में प्रवेश करने से वही नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय हो सकती है। यह भी कहा जाता है कि ऐसे घर में माता लक्ष्मी का स्थायी वास नहीं होता, जिससे आर्थिक अस्थिरता बनी रह सकती है।

गृह प्रवेश पूजा कैसे की जाती है?
आमतौर पर गृह प्रवेश पूजा किसी योग्य पंडित की उपस्थिति में कराई जाती है। इसमें सबसे पहले घर का शुद्धिकरण किया जाता है, जिसके लिए गंगाजल का छिड़काव किया जाता है। इसके बाद हवन, यज्ञ और मंत्रोच्चारण के साथ देवताओं का आह्वान किया जाता है। यदि किसी कारणवश पंडित को बुलाना संभव न हो, तो भी घर में सत्यनारायण कथा, वास्तु पूजा या साधारण पूजा-पाठ करके प्रवेश करना चाहिए। इससे घर में सकारात्मकता बनी रहती है और अशुभ प्रभाव कम होते हैं।

बिना गृह प्रवेश रहना पड़े तो करें ये वास्तु उपाय
कई बार परिस्थितियों के कारण लोग बिना गृह प्रवेश पूजा के ही नए घर में रहने लगते हैं। ऐसी स्थिति में वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ सरल उपाय अपनाकर नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है—
• घर की नियमित सफाई रखें और किसी भी कोने में मकड़ी के जाले न बनने दें।
• प्रतिदिन घर में पूजा-पाठ करें और दीपक जलाएं। शाम के समय मुख्य द्वार पर दीपक जलाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
• लौंग या कपूर जलाकर पूरे घर में उसकी सुगंध फैलाएं।
• घर में प्रवेश से पहले और समय-समय पर गंगाजल का छिड़काव करें।
• ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में भगवान की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर छोटा सा मंदिर बनाएं।

वास्तु शास्त्र और हमारी प्राचीन परंपराओं के अनुसार, नए घर में प्रवेश से पहले गृह प्रवेश पूजा अवश्य करनी चाहिए। यह न केवल धार्मिक आस्था का विषय है, बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने का भी माध्यम है। यदि आप चाहते हैं कि आपका नया घर खुशहाली और मंगल से भरा रहे, तो गृह प्रवेश पूजा को कभी भी नजरअंदाज न करें।

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