सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और इस पावन अवसर पर काशी, शिवनगरी बन जाती है। नाथों के नाथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन को लाखों की संख्या में शिवभक्त काशी पहुंचते हैं। खास बात यह है कि सावन में बाबा विश्वनाथ अपने भक्तों को पांच अलग-अलग दिव्य रूपों में दर्शन देते हैं। हर सोमवार उनका विशिष्ट श्रृंगार किया जाता है, जो भक्तों के लिए आध्यात्मिक आनंद और आस्था का केंद्र होता है।
पहला सोमवार: पारिवारिक स्वरूप
सावन के पहले सोमवार को बाबा की चल प्रतिमा का पारिवारिक रूप में श्रृंगार किया जाता है। इस दिन बाबा अपने पूरे परिवार मां पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और नंदी के साथ विराजमान होते हैं। यह अद्वितीय दृश्य सिर्फ साल में एक बार सावन के पहले सोमवार को ही देखने को मिलता है।
दूसरा सोमवार: गौरी-शंकर रूप
दूसरे सोमवार को बाबा विश्वनाथ गौरी-शंकर स्वरूप में दर्शन देते हैं। इस दिन रजत (चांदी की) विशेष प्रतिमा का गर्भगृह में विधिवत श्रृंगार किया जाता है। यह रूप शिव और शक्ति की एकता का प्रतीक माना जाता है।
तीसरा सोमवार: अर्धनारीश्वर रूप
तीसरे सोमवार को बाबा अर्धनारीश्वर स्वरूप में दिखाई देते हैं। इस अद्भुत रूप में शिव आधे पुरुष और आधे स्त्री के रूप में होते हैं, जो शिव और शक्ति के अभिन्न संबंध को दर्शाता है। यह रूप भक्तों को अत्यंत आकर्षित करता है।
चौथा सोमवार: रुद्राक्ष श्रृंगार
चौथे सोमवार को बाबा का रुद्राक्ष श्रृंगार होता है। इस दिन लाखों रुद्राक्ष के दानों से बाबा का अलौकिक श्रृंगार किया जाता है, जो भक्तों को ऊर्जा और शांति प्रदान करता है।
सावन पूर्णिमा: झूला श्रृंगार
सावन की पूर्णिमा को बाबा विश्वनाथ झूले पर विराजते हैं। इस झूला श्रृंगार के दर्शन दुर्लभ होते हैं और भक्त पूरे वर्ष इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं।