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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > अन्नपूर्णा जयंती 2025: मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व व पूजा मुहूर्त
व्रत और त्योहार

अन्नपूर्णा जयंती 2025: मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व व पूजा मुहूर्त

दिव्यसुधा
Last updated: December 4, 2025 12:52 pm
दिव्यसुधा
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अन्नपूर्णा जयंती 2025: देवी अन्नपूर्णा की पूजा, मार्गशीर्ष पूर्णिमा का महत्व और धार्मिक अनुष्ठान
मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर माता अन्नपूर्णा की आराधना—अन्न, धन और समृद्धि की प्राप्ति का दिव्य पर्व।
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हिन्दू धर्म में अन्नपूर्णा जयंती अत्यंत पावन दिन माना जाता है। यह पर्व मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है और इस वर्ष यह शुभ तिथि 4 दिसंबर 2025 को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन मां पार्वती ने संसार के पोषण हेतु देवी अन्नपूर्णा का दिव्य रूप धारण किया। देवी अन्नपूर्णा को भोजन, अन्न, धन-धान्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री माना जाता है। उनकी कृपा से घर-परिवार में कभी अन्न की कमी नहीं होती, दरिद्रता दूर रहती है और जीवन में सुख-समृद्धि का विस्तार होता है।

पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 4 दिसंबर की सुबह 08:37 बजे होगा और इसका समापन अगले दिन 5 दिसंबर की सुबह 04:43 बजे पर होगा। पंचांग के अनुसार, पूजा-अर्चना का शुभ समय 4 दिसंबर को ही माना गया है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर माता अन्नपूर्णा विशेष कृपा प्रदान करती हैं और जीवन में स्थायी समृद्धि आती है।

भगवान शिव और मां अन्नपूर्णा की कथा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, एक समय भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा कि संसार मायामयी है और भोजन का कोई विशेष महत्व नहीं है। इस पर माता पार्वती अप्रसन्न हुईं और संसार को भोजन के महत्व का बोध कराने के लिए उन्होंने अन्न को लुप्त कर दिया। कुछ ही दिनों में धरती पर भयंकर अकाल फैल गया। लोग भूख से व्याकुल हो गए और स्वयं भगवान शिव भी अन्न के अभाव से कष्ट महसूस करने लगे।

तभी भगवान शिव ने माता पार्वती के अन्नपूर्णा स्वरूप का दर्शन किया और विनम्रता से भिक्षा पात्र बढ़ाकर अन्न की याचना की। उसी क्षण मां अन्नपूर्णा ने शिवजी को अन्न प्रदान किया और पुनः संसार में भोजन, पोषण और समृद्धि का प्रवाह लौट आया। इस घटना से यह दिव्य संदेश मिलता है कि अन्न ही जीवन है, और उसका सम्मान करना सबसे बड़ा धर्म है।

अन्नपूर्णा जयंती पर किए जाने वाले प्रमुख उपाय

  1. अन्नदान का महापुण्य
    इस दिन गरीबों, जरूरतमंदों और भूखे लोगों को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से जीवन में कभी अन्न का अभाव नहीं होता और घर में मातृकृपा बनी रहती है।
  2. रसोई की स्वच्छता
    मां अन्नपूर्णा को स्वच्छता अत्यंत प्रिय है। रसोई को साफ-सुथरा रखना, भोजन शुद्ध मन से बनाना और अनाज व्यवस्थित रखना देवी की विशेष कृपा दिलाता है।
  3. अन्नपूर्णा स्तोत्र या मंत्र का पाठ
    ‘ॐ अन्नपूर्णे सदापूर्णे’ मंत्र का जप घर में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और स्थायी समृद्धि का संचार करता है।
  4. पशुओं को भोजन कराना
    भूखे पशु-पक्षियों को भोजन कराना मां अन्नपूर्णा को विशेष प्रिय है। इससे घर में करुणा, शांति और देवी का आशीर्वाद बढ़ता है।
  5. भोजन का सम्मान
    अन्न व्यर्थ न करना, थाली में बचा भोजन न छोड़ना और भोजन को ईश्वर का प्रसाद समझकर ग्रहण करना ये सभी कार्य देवी अन्नपूर्णा की पूजा का सर्वोच्च रूप हैं।
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