पुरुषोत्तम मास हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। इसे मलमास और अधिकमास के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पूरा महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दौरान किए गए जप, तप, दान, पूजा-पाठ और भक्ति का कई गुना फल प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में पुरुषोत्तम मास की शुरुआत 16 मई की रात से हो रही है, जो 15 जून तक रहेगा।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस महीने में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नया व्यापार या किसी भी मांगलिक कार्य की शुरुआत नहीं की जाती। हालांकि यह समय आध्यात्मिक साधना, आत्मशुद्धि और भगवान की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति पूरे श्रद्धा भाव से इस माह में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और तुलसी माता की पूजा करता है, उसके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?
पंडित नंद किशोर मुद्गल के अनुसार पुरुषोत्तम मास में तुलसी पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। हिंदू धर्म में तुलसी को भगवान विष्णु की सबसे प्रिय माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में प्रतिदिन तुलसी माता की पूजा होती है, वहां नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि मलमास के दौरान प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद तुलसी के पौधे में जल अर्पित करना चाहिए। वहीं शाम के समय तुलसी के पास घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही घर की आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं और रुके हुए कार्यों में सफलता मिलने के योग बनते हैं।
तुलसी माता और शालिग्राम पूजा का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य के अनुसार पुरुषोत्तम मास में तुलसी माता के साथ शालिग्राम की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि शालिग्राम भगवान विष्णु का साक्षात स्वरूप हैं। यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन शालिग्राम पर तुलसी दल अर्पित करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करता है, तो उसके जीवन के कई कष्ट दूर होने लगते हैं।
ऐसा भी कहा जाता है कि इस दौरान किए गए आध्यात्मिक उपाय ग्रह दोष, पितृ दोष और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक होते हैं। पुरुषोत्तम मास में जरूरतमंदों को भोजन कराना, गरीबों को वस्त्र दान देना और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
तुलसी के पौधे से जुड़ी जरूरी बातें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास में तुलसी के पौधे को कभी सूखने नहीं देना चाहिए और उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए। तुलसी के पत्तों को बिना स्नान किए नहीं तोड़ना चाहिए। साथ ही रविवार और एकादशी के दिन तुलसी दल तोड़ने से बचना चाहिए।
कई श्रद्धालु इस महीने में तुलसी माता के सामने बैठकर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं और घर में नियमित रूप से भजन-कीर्तन करवाते हैं। मान्यता है कि इससे घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम एवं सौहार्द बढ़ता है।
तामसिक भोजन से करें परहेज
पुरुषोत्तम मास को केवल धार्मिक नियमों का समय नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और संयम का महीना भी माना जाता है। इस दौरान लोगों को सात्विक भोजन ग्रहण करने और तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। मांसाहार, शराब, लहसुन-प्याज और क्रोध जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों से बचकर व्यक्ति अपने मन और आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास करता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस पूरे महीने भगवान विष्णु की भक्ति करने से जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा तथा आत्मविश्वास प्राप्त होता है। यही कारण है कि देशभर में पुरुषोत्तम मास को भक्ति, साधना और पुण्य कमाने का सबसे विशेष समय माना जाता है।