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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > कालाष्टमी 2026 : भगवान काल भैरव का पावन व्रत, तिथि, पूजा विधि और महत्व
व्रत और त्योहार

कालाष्टमी 2026 : भगवान काल भैरव का पावन व्रत, तिथि, पूजा विधि और महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: May 9, 2026 10:56 am
दिव्यसुधा
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कालाष्टमी 2026 पर भगवान काल भैरव की पूजा करते श्रद्धालु, सरसों के तेल का दीपक और काले तिल अर्पित करते हुए
कालाष्टमी 2026 पर निशिता काल में भगवान काल भैरव की पूजा करने से भय, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
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भगवान काल भैरव को समर्पित कालाष्टमी व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह पर्व हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने से जीवन के सभी भय, नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं का नाश होता है तथा साधक को साहस, सुरक्षा और आत्मबल की प्राप्ति होती है।

इस वर्ष मई 2026 की कालाष्टमी को लेकर लोगों के बीच 9 और 10 मई की तिथि को लेकर भ्रम बना हुआ है। लेकिन पंचांग के अनुसार सही तिथि को समझना आवश्यक है ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।

मई 2026 में कालाष्टमी कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार, मई 2026 की कालाष्टमी 9 मई 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि की शुरुआत 9 मई को दोपहर 2:02 बजे से होगी और यह 10 मई को दोपहर 3:06 बजे तक रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कालाष्टमी व्रत उसी दिन रखा जाता है जिसमें निशिता काल (मध्यरात्रि समय) में अष्टमी तिथि उपलब्ध हो। इसी कारण इस वर्ष व्रत 9 मई को ही करना शुभ और फलदायी माना गया है।

निशिता काल में पूजा का महत्व
कालाष्टमी पर निशिता काल का विशेष महत्व बताया गया है। यह रात का वह समय होता है जब वातावरण अत्यंत शांत और ऊर्जा से भरपूर होता है। मान्यता है कि इस समय भगवान काल भैरव की आराधना करने से साधक को शीघ्र फल प्राप्त होता है।

इस समय भैरव चालीसा, मंत्र जाप और ध्यान करने से मन एकाग्र होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है। यह साधना भय और मानसिक अशांति को दूर करने में अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।

काल भैरव पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर या भैरव मंदिर में पूजा आरंभ करें। भगवान काल भैरव की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें धूप, दीप, फूल, अक्षत और काले तिल अर्पित करें। सरसों के तेल का दीपक जलाना विशेष शुभ माना जाता है। नारियल, मीठा प्रसाद और उड़द से बने पदार्थ अर्पित करना भी अत्यंत फलदायी होता है। रात्रि में निशिता काल के समय पुनः पूजा करें और भैरव मंत्रों का जाप करें। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

कुत्तों को भोजन कराने का महत्व
काल भैरव को कुत्ता अत्यंत प्रिय माना जाता है और इसे उनका वाहन भी कहा जाता है। इसलिए कालाष्टमी के दिन कुत्तों को रोटी, दूध या मीठा भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह सेवा भाव और दया का प्रतीक है तथा इससे भगवान काल भैरव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।

कालाष्टमी पर क्या सावधानियाँ रखें?
इस पवित्र दिन पर व्रत रखने वाले व्यक्ति को झूठ, क्रोध, नकारात्मक विचार और विवादों से दूर रहना चाहिए। मन को शांत और पवित्र रखना अत्यंत आवश्यक है। पूरे दिन संयमित आचरण और श्रद्धा के साथ किया गया व्रत ही पूर्ण फल प्रदान करता है।

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