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दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > श्री बड़ा हनुमान मंदिर, अमृतसर: आस्था, चमत्कार और अनोखी परंपराओं का संगम
मंदिर

श्री बड़ा हनुमान मंदिर, अमृतसर: आस्था, चमत्कार और अनोखी परंपराओं का संगम

दिव्यसुधा
Last updated: May 4, 2026 4:09 pm
दिव्यसुधा
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अमृतसर के श्री बड़ा हनुमान मंदिर में लंगूर मेले और वटवृक्ष की पूजा का दृश्य
श्री बड़ा हनुमान मंदिर: आस्था, चमत्कार और लंगूर मेले की अनोखी परंपरा
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भारत में धर्म और आस्था का संबंध अत्यंत गहरा है। यहां हर मंदिर अपने साथ एक विशेष कथा, मान्यता और आध्यात्मिक ऊर्जा को संजोए हुए है। इन्हीं पवित्र स्थलों में से एक है श्री बड़ा हनुमान मंदिर, जो पंजाब के ऐतिहासिक शहर अमृतसर में स्थित है। यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की अनोखी परंपराएं इसे पूरे देश में विशेष पहचान दिलाती हैं।

यह मंदिर दुर्ग्याणा मंदिर परिसर के अंतर्गत आता है और स्वर्ण मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हर वर्ष यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर भगवान हनुमान के चरणों में उपस्थित होते हैं।

रामायण काल से जुड़ी पौराणिक मान्यता
इस मंदिर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी पौराणिक कथा से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि यह वही पवित्र स्थान है जहां भगवान राम की सेना और लव-कुश के बीच युद्ध हुआ था। जब भगवान राम ने अश्वमेध यज्ञ के लिए घोड़ा छोड़ा, तब लव-कुश ने उसे एक वटवृक्ष से बांध लिया।

जब हनुमान जी उस घोड़े को छुड़ाने आए, तो लव-कुश ने उन्हें पहचान न पाने के कारण बंदी बना लिया और उसी वटवृक्ष से बांध दिया। बाद में बातचीत के दौरान हनुमान जी को यह ज्ञात हुआ कि वे भगवान राम के पुत्र हैं। यह स्थान उसी दिव्य मिलन और घटना का साक्षी माना जाता है।मंदिर परिसर में आज भी वह पवित्र वटवृक्ष मौजूद है, जिसे श्रद्धालु अत्यंत श्रद्धा से देखते और पूजते हैं।

संतान प्राप्ति की विशेष मान्यता
श्री बड़ा हनुमान मंदिर की सबसे प्रसिद्ध मान्यता संतान प्राप्ति से जुड़ी हुई है। कहा जाता है कि जो दंपत्ति यहां सच्चे मन और श्रद्धा से प्रार्थना करते हैं, उनकी संतान सुख की इच्छा अवश्य पूरी होती है। विशेष रूप से पुत्र प्राप्ति की कामना लेकर आने वाले भक्त यहां वटवृक्ष पर मौली बांधते हैं और भगवान से आशीर्वाद मांगते हैं।

जब उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती है, तो वे अपने बच्चों को “लंगूर” के रूप में सजाकर मंदिर में लाते हैं और भगवान हनुमान के प्रति आभार प्रकट करते हैं। यह परंपरा इस मंदिर की सबसे अनोखी पहचान बन चुकी है।

अनोखा लंगूर मेला
इस मंदिर का सबसे आकर्षक और विशिष्ट आयोजन है “लंगूर मेला”। यह मेला हर वर्ष शारदीय नवरात्रि के प्रथम दिन से प्रारंभ होकर पूरे दस दिनों तक चलता है। इस दौरान मंदिर और पूरे शहर का वातावरण भक्ति और उत्साह से भर जाता है।

देश-विदेश से आए श्रद्धालु अपने छोटे बच्चों को लंगूर के रूप में सजाते हैं। सैकड़ों बच्चे इस वेश में मंदिर में पहुंचते हैं और भगवान हनुमान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। यह दृश्य अत्यंत अद्भुत और भावनात्मक होता है, जो हर भक्त के मन को छू जाता है।

पालन किए जाने वाले नियम
लंगूर मेला केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि एक अनुशासन और साधना का प्रतीक भी है। इस दौरान बच्चों और उनके माता-पिता को कुछ विशेष नियमों का पालन करना होता है। इन नियमों के अनुसार, लंगूर बने बच्चों और उनके माता-पिता को जमीन पर ही सोना होता है। उन्हें सात्विक भोजन करना होता है, जिसमें प्याज और लहसुन का पूर्ण परहेज होता है। माता-पिता को ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है।

इसके अलावा, बच्चों को नंगे पैर रहना होता है और वे अपने घर के अलावा किसी अन्य स्थान पर प्रवेश नहीं कर सकते। वे चाकू से काटी हुई चीजें नहीं खाते और न ही सुई या कैंची का उपयोग करते हैं। ये सभी नियम भक्ति, संयम और अनुशासन का प्रतीक माने जाते हैं।

श्री बड़ा हनुमान मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और चमत्कार का जीवंत उदाहरण है। यहां की पौराणिक कथाएं, संतान प्राप्ति की मान्यता और लंगूर मेले जैसी अनोखी परंपराएं इसे विशेष बनाती हैं। यह मंदिर हमें सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा, विश्वास और समर्पण के साथ की गई प्रार्थना अवश्य फल देती है। यही कारण है कि यह पवित्र स्थान आज भी लाखों श्रद्धालुओं के विश्वास का केंद्र बना हुआ है।

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