चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली चैत्र पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी मानी जाती है। यह दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन प्राप्त होता ह
चैत्र पूर्णिमा व्रत 2026 कब रखें?
इस वर्ष चैत्र पूर्णिमा की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि पूर्णिमा तिथि 1 और 2 अप्रैल दोनों दिन पड़ रही है। पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का आरंभ 1 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 7 मिनट पर होगा और इसका समापन 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 42 मिनट पर होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस दिन संध्या काल में पूर्णिमा तिथि रहती है, उसी दिन व्रत रखना श्रेष्ठ माना जाता है। इसलिए वर्ष 2026 में चैत्र पूर्णिमा का व्रत 1 अप्रैल को रखा जाएगा। वहीं, 2 अप्रैल की सुबह स्नान और दान का विशेष महत्व रहेगा।
चैत्र पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि
चैत्र पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल को साफ कर एक लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का वस्त्र बिछाया जाता है। इस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित किए जाते हैं।
पूजा के दौरान भगवान का अभिषेक कर उन्हें पीले वस्त्र, पुष्प, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ या श्रवण किया जाता है, जो इस व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। अंत में भगवान की आरती कर उन्हें भोग लगाया जाता है और दिनभर श्रद्धा के साथ व्रत रखा जाता है। शाम के समय चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है, जिसके बाद व्रत का पारण किया जाता है।
चैत्र पूर्णिमा व्रत का महत्व
चैत्र पूर्णिमा व्रत का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में चल रही आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और धन-संपत्ति में वृद्धि होती है। इसके साथ ही मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
जिन लोगों की कुंडली में चंद्र दोष होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने से मनोबल मजबूत होता है और मानसिक तनाव कम होता है।
चैत्र पूर्णिमा का व्रत श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है, जो व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाने का मार्ग प्रशस्त करता है। इस पावन दिन पर पूजा, व्रत और दान-पुण्य करने से न केवल आध्यात्मिक उन्नति होती है, बल्कि जीवन की कई परेशानियों से भी मुक्ति मिलती है। इसलिए इस दिन पूरे विधि-विधान और सच्ची आस्था के साथ व्रत करना अत्यंत फलदायी माना गया है।