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दिव्य सुधा > अन्य > 28 या 29 मार्च कब है कामदा एकादशी जानें शुभ मुहूर्त ,समय और पूजा विधि
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28 या 29 मार्च कब है कामदा एकादशी जानें शुभ मुहूर्त ,समय और पूजा विधि

दिव्यसुधा
Last updated: March 28, 2026 6:35 pm
दिव्यसुधा
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भगवान विष्णु की पूजा करते श्रद्धालु – कामदा एकादशी 2026
कामदा एकादशी 2026: व्रत के दौरान भगवान विष्णु की भक्ति और पूजा
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हिंदू धर्म में कामदा एकादशी अत्यंत पवित्र और फलदायी मानी जाती है। इसे भगवान विष्णु के उपासकों के लिए विशेष महत्व प्राप्त है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति आती है। पुराणों के अनुसार, कामदा एकादशी का पालन करने वाले भक्तों के पाप नष्ट होते हैं और वे मोक्ष की प्राप्ति के योग्य बनते हैं।  

पौराणिक कथा

प्राचीन काल की कथाएँ हमें भक्ति और विश्वास की शक्ति सिखाती हैं। ऐसी ही कथा कामदा एकादशी की है। पुंडरीक राजा के राज्य में ललित नाम का गंधर्व अपनी पत्नी ललिता के साथ रहता था। जो एक कुशल गायक था और राजसभा में गाता था। एक दिन सभा में गाते समय उसका ध्यान पत्नी पर चला गया और उसका सुर बिगड़ गया। क्रोधित राजा ने उसे राक्षस बनने का श्राप दे दिया। दुखी ललिता एक ऋषि के पास गई, जिन्होंने उसे कामदा एकादशी का व्रत करने को कहा। ललिता ने श्रद्धा से व्रत किया, जिससे भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और ललित को श्राप से मुक्ति मिल गई। यह व्रत सभी कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है।

कामदा एकादशी का व्रत क्यों रखा जाता हैं

कामदा एकादशी व्रत का मुख्य उद्देश्य भगवान विष्णु की पूजा और भक्ति के माध्यम से जीवन की सभी परेशानियों और पापों से मुक्ति पाना है। इस व्रत को रखने से व्यक्ति को स्वास्थ्य, संपत्ति और संतान सुख की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि यह व्रत हर प्रकार के कष्टों और विपत्तियों को दूर करता है।

इस साल की  तिथि और समय

इस बार एकादशी तिथि की शुरुआत 28 मार्च को सुबह 08 बजकर 45 मिनट पर होगी और इसका समापन 29 मार्च को सुबह 07 बजकर 46 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार 29 मार्च को कामदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। पारण का समय 30 मार्च को प्रातः 6 बजकर 31 मिनट से 7 बजकर 9 मिनट के मध्य रहेगा।

व्रत की तैयारी और विधि

  1. सफाई और पवित्रता:
    व्रत से पूर्व घर और मंदिर की सफाई करनी चाहिए। शरीर और मन दोनों को पवित्र बनाए रखना आवश्यक है।
  2. पूजा सामग्री:
    पूजा के लिए कलश, नारियल, फूल, धूप, दीप और फल आदि की व्यवस्था करें।
  3. उपवास का प्रकार:
    श्रद्धालु इस दिन पूर्ण उपवास रख सकते हैं या केवल फलाहार/निर्जला व्रत रख सकते हैं। व्रत के दौरान हिंसा, झूठ और लोभ से परहेज करना चाहिए।
  4. भगवान विष्णु की पूजा:
    दिनभर भगवान विष्णु का ध्यान और भजन करें। विशेष रूप से श्री विष्णु सहस्रनाम या अन्य स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है।

कामदा एकादशी का महत्व

  • पापों से मुक्ति: इस व्रत के पालन से पिछले जन्म के पाप और वर्तमान के दोष दूर होते हैं।
  • सुख-समृद्धि: व्रत रखने वाले के जीवन में धन, स्वास्थ्य और खुशहाली आती है।
  • संतान सुख: जो दंपति संतान सुख के लिए प्रयासरत हैं, उनके लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी है।
  • मोक्ष की प्राप्ति: धार्मिक मान्यता है कि इस एकादशी का पालन करने से मोक्ष की प्राप्ति संभव होती है।

कामदा एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आध्यात्मिक शुद्धि और मानसिक शांति भी प्रदान करता है। इस साल 29 मार्च को व्रत रखने वाले श्रद्धालु पारण 30 मार्च के प्रातः समय में करें। इस दिन मन, वचन और कर्म की शुद्धि पर ध्यान देने से व्रत का सर्वोत्तम फल प्राप्त होता है।

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