Saturday, 14 Mar 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > दशा माता व्रत 2026: जानें तिथि, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और व्रत कथा
व्रत और त्योहार

दशा माता व्रत 2026: जानें तिथि, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और व्रत कथा

Ekta Mishra
Last updated: March 13, 2026 12:59 pm
Ekta Mishra
Share
पीपल के पेड़ की पूजा करती महिलाएं – दशा माता व्रत 2026
दशा माता व्रत के दिन महिलाएं पीपल के पेड़ की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
SHARE

हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत और त्योहार हैं जो परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और जीवन की कठिनाइयों को दूर करने के लिए किए जाते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण व्रत दशा माता व्रत है। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और घर की आर्थिक स्थिति बेहतर करने के लिए करती हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से दशा माता की पूजा करने से जीवन की विपरीत परिस्थितियां दूर होती हैं और घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

इस दिन महिलाएं पीपल का पेड़ की पूजा करती हैं और पवित्र डोरा बांधकर माता से आशीर्वाद मांगती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत से घर की बिगड़ी हुई दशा सुधरने लगती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं।

कब रखा जाएगा दशा माता व्रत 2026
पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि को दशा माता का व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 13 मार्च, शुक्रवार को रखा जाएगा। दशमी तिथि की शुरुआत 13 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 28 मिनट से होगी और इसका समापन 14 मार्च 2026 को सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर होगा। इस दिन महिलाएं सुबह स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करती हैं और पीपल के वृक्ष के पास जाकर दशा माता की पूजा करती हैं। इसके साथ ही व्रत कथा का पाठ करना भी बेहद शुभ माना जाता है।

दशा माता व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दशा माता का व्रत घर की बिगड़ी हुई परिस्थितियों को सुधारने वाला व्रत माना जाता है। इस व्रत को श्रद्धा और नियम से करने से जीवन की कई समस्याएं दूर होने लगती हैं। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से घर में सुख-समृद्धि आती है, आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम व शांति बनी रहती है। कई क्षेत्रों में इस व्रत को “घर की दशा सुधारने वाला व्रत” भी कहा जाता है क्योंकि इसे करने से जीवन की नकारात्मक परिस्थितियों में बदलाव आने लगता है।

दशा माता व्रत कथा: राजा नल और दमयंती की कहानी
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में राजा नल नाम के एक महान राजा थे और उनकी पत्नी दमयंती थीं। उनके राज्य में सभी लोग सुख-शांति से रहते थे और चारों ओर समृद्धि थी। एक दिन एक ब्राह्मणी रानी के पास आई जिसके गले में पीले रंग का एक पवित्र डोरा बंधा हुआ था। जब रानी ने उससे इसके बारे में पूछा तो उसने बताया कि यह दशा माता का डोरा है। इसे धारण करने से घर में अन्न-धन की कभी कमी नहीं होती। यह सुनकर रानी ने भी वह डोरा अपने गले में धारण कर लिया।

राजा की भूल और देवी का प्रकोप
जब राजा नल ने रानी के गले में वह डोरा देखा तो उन्होंने इसके बारे में पूछा। रानी ने पूरी बात बताई, लेकिन राजा को यह बात पसंद नहीं आई। उन्होंने कहा कि उनके पास सब कुछ है, इसलिए ऐसे डोरे की आवश्यकता नहीं है। क्रोध में आकर राजा ने वह डोरा तोड़कर फेंक दिया। उसी रात राजा को स्वप्न में एक वृद्धा दिखाई दी जो वास्तव में दशा माता थीं। उन्होंने राजा से कहा कि तुमने मेरा अपमान किया है, इसलिए अब तुम्हारे अच्छे दिन समाप्त हो जाएंगे और कठिन समय शुरू होगा।

कठिन समय की शुरुआत
इसके बाद धीरे-धीरे राजा नल का सारा वैभव नष्ट होने लगा। राज्य में संकट आने लगे और उनकी स्थिति इतनी खराब हो गई कि उन्हें अपना राज्य छोड़ना पड़ा। राजा नल और रानी दमयंती अपने दोनों बच्चों के साथ दूसरे देश की ओर निकल पड़े। रास्ते में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई बार भोजन की कमी हुई और कई जगह उन्हें अपमान भी सहना पड़ा। अंततः मजबूरी में रानी ने एक महल में दासी का काम शुरू किया और राजा ने मजदूरी करके जीवन चलाना शुरू कर दिया।

दशा माता की पूजा से बदली किस्मत
एक दिन राजमाता ने दासी के रूप में काम कर रही दमयंती के सिर पर पद्म का निशान देखा और उन्हें अपनी बेटी की याद आ गई। तब दमयंती ने अपनी पहचान बताई और यह भी कहा कि यह सब दशा माता के प्रकोप का परिणाम है। इसके बाद दमयंती ने श्रद्धा और विश्वास के साथ दशा माता का व्रत किया और देवी से अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी। माता की कृपा से धीरे-धीरे उनकी परिस्थितियां बदलने लगीं। राजा नल को फिर से सम्मान मिलने लगा और अंततः उन्हें अपना राज्य और वैभव वापस मिल गया।

दशा माता व्रत से मिलने वाला संदेश
दशा माता की यह कथा हमें कई महत्वपूर्ण संदेश देती है। यह सिखाती है कि देवी-देवताओं का अपमान नहीं करना चाहिए और श्रद्धा व विश्वास से किया गया व्रत जीवन की दिशा बदल सकता है। कठिन समय में धैर्य और विश्वास बनाए रखना भी बहुत जरूरी होता है। इसी कारण दशा माता व्रत के दिन पूजा के साथ इस कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो महिलाएं सच्चे मन से दशा माता का व्रत करती हैं, उनके परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।

TAGGED:Dasha Mata Vrat 2026 dateDasha Mata Vrat significanceHindu fasting ritualsReligious vrat katha Hindiदशा माता व्रत 2026दशा माता व्रत कथादशा माता व्रत कब हैदशा माता व्रत पूजा विधिपीपल पूजा महत्वहिंदू व्रत और त्योहार
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article घर में गाय की मूर्ति रखने के वास्तु नियम: जानें सही दिशा और इसके शुभ लाभ
Next Article कुंभ राशि में बुध ग्रह का उदय और राशियों पर प्रभाव कुंभ राशि में उदित होंगे बुध, इन राशियों के लिए खुल सकते हैं तरक्की के नए रास्ते
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

ganga saptmi
व्रत और त्योहार

गंगा सप्तमी पर करें ये खास उपाय, जीवन में बनी रहेगी सुख-समृद्धि की बरसात

By दिव्यसुधा
बाबा खाटू श्याम जी जन्मोत्सव 2025 की पूजा और भक्ति का दृश्य
व्रत और त्योहार

बाबा खाटू श्याम जी का जन्मोत्सव : देवउठनी एकादशी पर विशेष पूजा और आस्था का पर्व

By दिव्यसुधा
पीपल के पेड़ की पूजा करती महिलाएं – दशा माता व्रत 2026
व्रत और त्योहार

दशा माता व्रत 2026: जानें तिथि, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

By Ekta Mishra
shiv ji
व्रत और त्योहार

प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा: भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का शुभ अवसर

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?