सनातन परंपरा में नवरात्रि का पर्व केवल व्रत और देवी आराधना का ही समय नहीं माना जाता, बल्कि यह घर और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का भी विशेष अवसर होता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से होने जा रही है। इन नौ दिनों में भक्तजन श्रद्धा के साथ मां दुर्गा की पूजा करते हैं और घर में आध्यात्मिक वातावरण बनाते हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार ऊर्जा के प्रवेश का सबसे महत्वपूर्ण स्थान होता है। यहीं से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की ऊर्जा घर में प्रवेश करती हैं। इसलिए नवरात्रि के दौरान मुख्य द्वार को साफ-सुथरा, पवित्र और शुभ बनाए रखना बहुत जरूरी माना जाता है। यदि पूजा के साथ कुछ सरल वास्तु उपाय भी किए जाएं, तो घर में सुख-समृद्धि और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहने की मान्यता है।
आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाएं
नवरात्रि के दौरान घर के मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों से बना तोरण लगाना बहुत शुभ माना जाता है। हिंदू परंपरा में यह समृद्धि, मंगल और शुभता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यह तोरण नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकता है और वातावरण को पवित्र बनाए रखता है। इसके साथ ही यह घर में खुशहाली और सकारात्मकता को बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है।
स्वास्तिक और शुभ-लाभ का चिन्ह बनाएं
नवरात्रि के दिनों में स्नान के बाद घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर कुमकुम या हल्दी से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना अत्यंत शुभ माना जाता है। चाहें तो एक ओर ‘शुभ’ और दूसरी ओर ‘लाभ’ भी लिखा जा सकता है। सनातन धर्म में स्वास्तिक को मंगल और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है।
लक्ष्मी जी के चरण-चिह्न बनाएं
नवरात्रि के नौ दिनों तक घर के मुख्य द्वार से अंदर की ओर आते हुए माता लक्ष्मी के छोटे-छोटे चरण-चिह्न बनाना भी शुभ माना जाता है। यह प्रतीक होता है कि घर में धन, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन हो रहा है। यह परंपरा विशेष रूप से त्योहारों के दौरान की जाती है और इसे घर में बरकत लाने वाला माना जाता है।
गुलाब और जल का उपाय
वास्तु शास्त्र के अनुसार एक तांबे के पात्र में साफ पानी भरकर उसमें गुलाब की पंखुड़ियां डालकर मुख्य द्वार के पास रखना भी शुभ माना जाता है। गुलाब की सुगंध और जल का संयोजन घर में सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक माना जाता है। इससे घर का वातावरण भी सुगंधित और शांत बना रहता है।
संध्या के समय दीपक जलाएं
नवरात्रि के दिनों में सूर्यास्त के बाद घर के मुख्य द्वार के पास घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि दीपक की पवित्र रोशनी से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है। यह उपाय मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए भी विशेष माना जाता है।
इस प्रकार नवरात्रि के पावन दिनों में यदि देवी पूजा के साथ इन सरल वास्तु उपायों को अपनाया जाए, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक वातावरण बढ़ने की मान्यता है।