बजरंग बाण भगवान हनुमान जी को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र माना जाता है। हिंदू धर्म में इसे संकट और बाधाओं को दूर करने वाला पाठ माना जाता है। “बजरंग” शब्द का अर्थ होता है वज्र के समान मजबूत शरीर वाला, जो हनुमान जी का एक नाम है। “बाण” का अर्थ होता है तीर। इसलिए बजरंग बाण का अर्थ हुआ — वह शक्तिशाली प्रार्थना जो सीधे हनुमान जी तक पहुंचती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बजरंग बाण का पाठ विशेष परिस्थितियों में किया जाता है। जब व्यक्ति जीवन में बहुत ज्यादा परेशानी, डर, बाधा, शत्रु भय या मानसिक तनाव से गुजर रहा होता है, तब बजरंग बाण का पाठ करने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इसका पाठ करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और व्यक्ति को सुरक्षा का अनुभव होता है।
पाठ करतें समय कुछ विशेष बातों का रखें ध्यान
बजरंग बाण की रचना तुलसीदास जी द्वारा की गई मानी जाती है। इसमें हनुमान जी की वीरता, शक्ति और भगवान राम के प्रति उनकी भक्ति का वर्णन मिलता है। इस पाठ में भक्त हनुमान जी से प्रार्थना करता है कि वे उसके जीवन की परेशानियों को दूर करें और उसे साहस व शक्ति प्रदान करें।
बजरंग बाण का पाठ करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। इसे हमेशा साफ मन और सच्ची श्रद्धा से करना चाहिए। कई लोग मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ करना शुभ मानते हैं। पाठ शुरू करने से पहले हनुमान जी की पूजा, दीपक जलाना और लाल फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार बजरंग बाण का पाठ जल्दी असर दिखाने वाला माना जाता है। लेकिन यह भी कहा जाता है कि इसका पाठ बिना कारण या मजाक में नहीं करना चाहिए। इसे तभी करना चाहिए जब व्यक्ति को वास्तव में हनुमान जी की शरण और सहायता की जरूरत हो।
नकारात्मक विचारों को करता है दूर
आधुनिक समय में भी कई लोग मानसिक तनाव, डर और नकारात्मक विचारों से बचने के लिए बजरंग बाण का पाठ करते हैं। इससे व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मविश्वास मिलता है। नियमित पाठ से मन मजबूत होता है और व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहता है।
सच्ची भक्ति, विश्वास और साहस का संदेश
बजरंग बाण का एक आध्यात्मिक संदेश भी है — सच्ची भक्ति, विश्वास और साहस। यह हमें सिखाता है कि अगर हम सच्चे मन से भगवान को याद करें तो जीवन की कठिनाइयों को पार किया जा सकता है।
अंत में यही कहा जाता है कि बजरंग बाण केवल एक पाठ नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है। इसे श्रद्धा और नियम के साथ करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस हो सकता है। हनुमान जी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें सही मार्ग दिखाते हैं — यही बजरंग बाण का मुख्य संदेश माना जाता है।
॥बजरंग बाण॥
॥ दोहा ॥
निश्चय प्रेम प्रतीति ते,बिनय करै सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ,सिद्ध करै हनुमान॥
॥ चौपाई ॥
पाय परौं कर जोरि मनावों। यह अवसर अब केहि गोहरावों॥जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका॥
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा॥
बाग उजारि सिन्धु महं बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुर पुर महं भई॥
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहुं उर अन्तर्यामी॥
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होइ दुःख करहुं निपाता॥
जय गिरिधर जय जय सुख सागर। सुर समूह समरथ भटनागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले। बैरिहिं मारू बज्र की कीले॥
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो॥
ॐकार हुंकार महाप्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो॥
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमन्त कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा॥
सत्य होउ हरि शपथ पायके। रामदूत धरु मारु धाय के॥
जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
वन उपवन मग गिरि गृह माहीं। तुमरे बल हम डरपत नाहीं॥
जय अंजनि कुमार बलवन्ता। शंकर सुवन धीर हनुमन्ता॥
बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल काल मारीमर॥
इन्हें मारु तोहि शपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
जनकसुता हरि दास कहावो। ताकी शपथ विलम्ब न लावो॥
जय जय जय धुनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दुःख नाशा॥
चरण शरण करि जोरि मनावों। यहि अवसर अब केहि गोहरावों॥
उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई। पांय परौं कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता॥
ॐ हं हं हांक देत कपि चञ्चल। ॐ सं सं सहम पराने खल दल॥
अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनन्द हमारो॥
यहि बजरंग बाण जेहि मारो। ताहि कहो फिर कौन उबारो॥
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की॥
यह बजरंग बाण जो जापै। तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे॥
धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहे कलेशा॥
॥ दोहा ॥
प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै,सदा धरै उर ध्यान।
तेहि के कारज सकल शुभ,सिद्ध करै हनुमान॥