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दिव्य सुधा > वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा > वास्तु उपाय : किचन की सिंक की सही दिशा से बढ़ेगी सुख- समृद्धि और सेहत
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

वास्तु उपाय : किचन की सिंक की सही दिशा से बढ़ेगी सुख- समृद्धि और सेहत

सही दिशा का सिंक, घर में सुख-समृद्धि का लिंक

Ekta Mishra
Last updated: February 11, 2026 12:57 pm
Ekta Mishra
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उत्तर-पूर्व दिशा में सही स्थान पर लगा किचन सिंक और गैस चूल्हे से उचित दूरी दर्शाता हुआ आधुनिक रसोईघर
ईशान कोण में सिंक – घर में शांति, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का आधार
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वास्तु शास्त्र के अनुसार किचन केवल भोजन बनाने की जगह नहीं होता है, बल्कि यह पूरे घर की ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि का केंद्र भी माना जाता है। जिस प्रकार शरीर को पोषण भोजन से मिलता है, उसी प्रकार घर की सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह भी रसोईघर से जुड़ा होता है। किचन में रखी हर वस्तु चूल्हा, फ्रिज, पानी का स्थान और विशेष रूप से सिंक घर के वातावरण पर सीधा प्रभाव डालते हैं। यदि इनका स्थान वास्तु के अनुरूप हो, तो परिवार में सुख-शांति और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।

किचन सिंक की सही दिशा
वास्तु शास्त्र में किचन सिंक के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना गया है। यह दिशा जल तत्व से संबंधित मानी जाती है और सिंक भी जल का प्रतीक है, इसलिए इस दिशा में सिंक का होना संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। उत्तर-पूर्व में रखा गया सिंक घर में शुद्धता, मानसिक शांति और समृद्धि का वातावरण बनाता है।

साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बर्तन धोते समय व्यक्ति का मुख उत्तर दिशा की ओर हो। उत्तर दिशा को धन और अवसरों की दिशा माना जाता है। इस दिशा की ओर मुख करके कार्य करने से मानसिक संतुलन बना रहता है और घर में खुशहाली का प्रवाह बढ़ता है।

किन दिशाओं में न रखें सिंक
वास्तु के अनुसार दक्षिण-पश्चिम दिशा में किचन सिंक का होना अशुभ माना गया है। यह दिशा स्थिरता और संबंधों की मजबूती से जुड़ी होती है। यहां जल तत्व का होना संतुलन बिगाड़ सकता है, जिससे पारिवारिक तनाव, आपसी मतभेद और आर्थिक अस्थिरता जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए इस दिशा में सिंक लगाने से बचना चाहिए।

गैस चूल्हे के पास न रखें सिंक
वास्तु शास्त्र में पंच तत्वों अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। गैस चूल्हा अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि सिंक जल तत्व का प्रतीक है। अग्नि और जल एक-दूसरे के विपरीत तत्व हैं। यदि चूल्हा और सिंक एक-दूसरे के बहुत पास रखे जाएं, तो यह ऊर्जा संतुलन को बिगाड़ सकता है। इससे घर में अनावश्यक तनाव, मतभेद और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बेहतर है कि दोनों के बीच उचित दूरी रखी जाए ताकि ऊर्जा का संतुलन बना रहे।

सिंक के नीचे डस्टबिन रखने से बचें
अक्सर जगह की कमी के कारण लोग सिंक के नीचे डस्टबिन रख देते हैं, लेकिन वास्तु के अनुसार यह उचित नहीं माना जाता। सिंक जल तत्व से जुड़ा है, जो शुद्धता और स्वच्छता का प्रतीक है। उसके नीचे कचरा रखने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ सकता है और इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं। बेहतर होगा कि डस्टबिन को किचन के किसी अलग, ढके हुए और साफ स्थान पर रखा जाए।

अंततः, किचन का वास्तु केवल परंपरा नहीं, बल्कि ऊर्जा संतुलन का विज्ञान है। यदि रसोईघर और विशेष रूप से सिंक की दिशा सही हो, तो घर में स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि का स्थायी वास होता है।

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