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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > यशोदा जयंती 2026: सही तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व
व्रत और त्योहार

यशोदा जयंती 2026: सही तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व

Ekta Mishra
Last updated: February 6, 2026 1:52 pm
Ekta Mishra
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माता यशोदा और बाल कृष्ण की पूजा करते भक्त – यशोदा जयंती 2026
यशोदा जयंती पर माता यशोदा के साथ बाल कृष्ण की विशेष पूजा
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हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को श्रीकृष्ण की माता माता यशोदा का जन्मोत्सव, जिसे यशोदा जयंती कहा जाता है, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से संतान सुख की कामना करने वाले भक्तों के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत, पूजा और भक्ति करने से संतान प्राप्ति, संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि तथा परिवार में प्रेम और शांति का वास होता है।

यशोदा जयंती 7 या 8 फरवरी
दृक पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि का प्रारंभ 7 फरवरी को सुबह 2 बजकर 54 मिनट से होता है, जो 8 फरवरी तक रहती है। चूँकि हिंदू धर्म में पर्व उदयातिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, इसलिए यशोदा जयंती 7 फरवरी (शनिवार) को मनाना शुभ माना जाएगा। इस दिन चित्रा नक्षत्र रहेगा, जो 8 फरवरी की सुबह 2 बजकर 28 मिनट तक प्रभावी रहेगा। चंद्रमा का गोचर कन्या राशि में होगा। सूर्योदय सुबह 7:06 बजे और सूर्यास्त शाम 6:05 बजे होगा।

यशोदा जयंती का धार्मिक महत्व
माता यशोदा वात्सल्य, प्रेम और त्याग की प्रतीक हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को पुत्र रूप में पालन-पोषण किया और उनके बाल रूप की लीलाओं से संपूर्ण ब्रजभूमि को आनंद से भर दिया। इस दिन माता यशोदा के साथ बाल गोपाल (लाल कृष्ण) की पूजा करने से माता-पिता और संतान के रिश्ते में मधुरता आती है।

पूजा विधि और प्रसाद
यशोदा जयंती के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में माता यशोदा और बाल कृष्ण की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा में दूध, दही, मक्खन, मिश्री, माखन, फल और पंचामृत अर्पित करें। भजन-कीर्तन, यशोदा-कृष्ण की आरती और कथा का विशेष महत्व है। पूजा के बाद प्रसाद का वितरण करें।

यशोदा जयंती 2026 के शुभ मुहूर्त
• सर्वार्थ सिद्धि योग एवं रवि योग: सुबह 2:28 से 7:05 तक
• अमृत काल: शाम 7:31 से रात 9:15 तक
• अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:57 तक
• विजय मुहूर्त: 2:25 से 3:09 तक
• गोधूलि मुहूर्त: 6:03 से 6:29 तक
इन समयों में पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

अशुभ समय
• राहुकाल: 9:51 से 11:13
• यमगंड: 1:58 से 3:20
• गुलिक काल: 7:06 से 8:28
इन समयों में कोई भी शुभ कार्य या नई शुरुआत न करें।

यशोदा जयंती माता के वात्सल्य भाव को स्मरण करने और अपने जीवन में प्रेम, करुणा और भक्ति को जाग्रत करने का पावन अवसर है। माता यशोदा और बाल गोपाल की कृपा से आपके जीवन में सुख, शांति और संतान सुख बना रहे यही कामना है।

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