Thursday, 5 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > अन्य > 60 फुट विशाल त्रिशूल: छिंदवाड़ा से अयोध्या त्रिशूल यात्रा
अन्य

60 फुट विशाल त्रिशूल: छिंदवाड़ा से अयोध्या त्रिशूल यात्रा

Ekta Mishra
Last updated: February 5, 2026 6:26 pm
Ekta Mishra
Share
छिंदवाड़ा से अयोध्या जा रही 60 फुट लंबी विशाल त्रिशूल सनातन हिंदू एकता यात्रा
छिंदवाड़ा से अयोध्या तक निकली 60 फुट लंबे त्रिशूल के साथ सनातन हिंदू एकता यात्रा
SHARE

सनातन परंपरा और आध्यात्मिक चेतना को सशक्त करने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक ऐतिहासिक और विराट त्रिशूल सनातन हिंदू एकता यात्रा प्रारंभ हो चुकी है। इस यात्रा का केंद्र आकर्षण है 60 फुट लंबा विशाल त्रिशूल, जिसे देश के सबसे बड़े त्रिशूलों में से एक माना जा रहा है। यह यात्रा कई पवित्र नगरों से होकर गुजरते हुए 10 फरवरी को श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या जिले के चौरे बाजार में प्रवेश करेगी।

यह त्रिशूल यात्रा छिंदवाड़ा से प्रारंभ होकर सिवनी, लखनादौन, जबलपुर, कटनी, सतना, रीवा, प्रयागराज, प्रतापगढ़, अमेठी और सुल्तानपुर जैसे प्रमुख नगरों से होते हुए अयोध्या धाम पहुंचेगी। प्रत्येक नगर में त्रिशूल का भव्य नगर भ्रमण और शोभायात्रा निकाली जा रही है, जिससे सनातन संस्कृति के प्रति जनजागरण हो सके।

60 फुट का विशाल त्रिशूल: आस्था और साधना का प्रतीक
इस विशाल त्रिशूल का निर्माण छिंदवाड़ा जिले के एक छोटे से गांव झिरलिंगा में किया गया है। इसे स्थानीय शिल्पकार सुशील विश्वकर्मा ने लगभग एक वर्ष की मेहनत से तैयार किया। स्टील से निर्मित इस त्रिशूल की ऊंचाई 60 फीट, चौड़ाई 11 फीट और वजन लगभग 700 किलोग्राम है। वर्तमान में यह त्रिशूल छिंदवाड़ा के आदि शक्ति दुर्गा माता मंदिर में दर्शन हेतु स्थापित किया गया है।

यात्रा के आयोजकों के अनुसार, त्रिशूल को विशेष रूप से तैयार किए गए वाहन द्वारा अयोध्या तक ले जाया जा रहा है। यात्रा चौबीसों घंटे निरंतर चल रही है, जिसमें लगभग 50 श्रद्धालुओं का दल साथ चल रहा है।

अयोध्या में त्रिशूल की स्थापना और शिव मंदिर की विशेषता
यह विशाल त्रिशूल अयोध्या के विघ्नेश्वर धाम शिव मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही बीकापुर तहसील के रमपुरवा स्थित एक 500 वर्ष पुराने शिव मंदिर का भी विशेष उल्लेख किया जा रहा है, जहां इस क्षेत्र की अद्भुत परंपराएं देखने को मिलती हैं। इस मंदिर में प्रतिवर्ष पुजारी बदलते हैं और सूर्य देव की किरणों द्वारा शिवलिंग का प्राकृतिक अभिषेक होता है, जो इसे आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।

सनातन हिंदू एकता यात्रा के प्रमुख संकल्प
यात्रा के आयोजकों और संरक्षकों ने इस यात्रा के माध्यम से कुछ प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संकल्प रखे हैं, जिनमें सनातन परंपराओं का संरक्षण, सामाजिक समरसता और हिंदू समाज की एकता को सुदृढ़ करना शामिल है। इनमें हर घर में धर्म, संस्कार, पूजा-पाठ, तुलसी, दीपक, रामचरितमानस पाठ और मंदिरों में सभी वर्गों की सहभागिता जैसे विचार प्रमुख हैं।

यह यात्रा केवल एक भौतिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और चेतना की जीवंत अभिव्यक्ति है। त्रिशूल, जो भगवान शिव का प्रमुख अस्त्र है, इस यात्रा के माध्यम से शक्ति, संरक्षण और धर्म की स्थापना का प्रतीक बनकर जनमानस को आध्यात्मिक रूप से जागृत कर रहा है।

TAGGED:अयोध्या धामआध्यात्मिक यात्राछिंदवाड़ा समाचारत्रिशूल यात्राधार्मिक समाचारशिव भक्तिशिव मंदिरसनातन धर्मसनातन हिंदू एकताहिंदू परंपराहिंदू संस्कृति
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article कोलकाता स्थित कालीघाट मंदिर में मां काली का दिव्य स्वरूप और श्रद्धालुओं की भीड़ कालीघाट मंदिर: कोलाहल के बीच शक्ति का साक्षात्कार
Next Article 6 फरवरी शुक्रवार राशिफल लक्ष्मी नारायण योग मेष वृषभ कर्क कन्या कुंभ 6 फरवरी शुक्रवार का विशेष राशिफल: लक्ष्मी नारायण योग से चमकेगा भाग्य, मेष से कुंभ तक पांच राशियों पर बरसेगी कृपा
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

सूर्य ग्रहण 2025: 21 सितंबर को लगने वाले ग्रहण का 12 राशियों पर प्रभाव
ग्रह-नक्षत्र

सूर्य ग्रहण 2025: क्या आपकी राशि पर पड़ेगा असर? जानिए कौन होगा लाभ में और किसे रखना होगा सावधान

By दिव्यसुधा
shree krishn
अन्य

क्यों लिया जाता है राधा का नाम श्री कृष्ण के पहले

By दिव्यसुधा
सनातन धर्म

कब से शुरू हो रहा है पितृ पक्ष? जानिए पितृ पक्ष की तिथि और नियम, इस समय भूल कर भी न करें ये गलती

By दिव्यसुधा
divyasudha magazine
अन्य

‘ दिव्यसुधा ‘ भक्ति की अमृत धारा, अप्रैल अंक

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?