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दिव्य सुधा > अन्य > मां नर्मदा आरती का महत्व: पापों से मुक्ति और आत्मिक शांति का दिव्य मार्ग
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मां नर्मदा आरती का महत्व: पापों से मुक्ति और आत्मिक शांति का दिव्य मार्ग

दिव्यसुधा
Last updated: January 25, 2026 5:27 pm
दिव्यसुधा
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माँ नर्मदा आरती करते श्रद्धालु और पवित्र नर्मदा नदी का दिव्य दृश्य
माँ नर्मदा की आरती करते श्रद्धालु – पाप नाश और आत्मिक शांति का दिव्य क्षण।
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सनातन धर्म में प्रकृति को केवल संसाधन नहीं, बल्कि दिव्य सत्ता का रूप माना गया है। पर्वत, नदियां , पशु-पक्षी और समस्त जीव-जगत हमारे शास्त्रों में पूजनीय हैं। इसी परंपरा में मां नर्मदा का विशेष स्थान है। नर्मदा नदी को हिंदू धर्म में साक्षात देवी स्वरूप माना जाता है, जिनकी धारा जीवन को पवित्र करने वाली मानी जाती है। श्रद्धालु दूर-दूर से मां नर्मदा के दर्शन, स्नान और आरती के लिए आते हैं।

मान्यता है कि मां नर्मदा को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त है। जो भक्त श्रद्धा भाव से उनकी पूजा करता है और नर्मदा जल में स्नान करता है, उसके जाने-अनजाने किए गए पापों का क्षय होता है। मां नर्मदा को सुख, शांति और आनंद प्रदान करने वाली देवी कहा गया है। नर्मदा आरती करने या सुनने से मन की चंचलता शांत होती है और भीतर एक अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

नर्मदा मैया की आरती न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का माध्यम है, बल्कि यह जीवन में धैर्य, विश्वास और संतुलन भी प्रदान करती है। नियमित रूप से आरती करने से मानसिक तनाव दूर होता है और भक्त को आत्मिक शांति की अनुभूति होती है। आइए, मां नर्मदा की आरती के माध्यम से उनके चरणों में श्रद्धा अर्पित करें और अपने जीवन को पवित्रता व प्रकाश से भरें।

श्री नर्मदा जी की आरती

ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनन्द कन्दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा, शिव हरि शंकर रुद्री पालन्ती॥
ॐ जय जय जगदानन्दी।

देवी नारद शारद तुम वरदायक, अभिनव पदचण्डी।
सुर नर मुनि जन सेवत, सुर नर मुनि शारद पदवन्ती॥
ॐ जय जय जगदानन्दी।

देवी धूमक वाहन, राजत वीणा वादयन्ती।
झूमकत झूमकत झूमकत, झननन झननन रमती राजन्ती॥
ॐ जय जय जगदानन्दी।

देवी बाजत ताल मृदंगा, सुर मण्डल रमती।
तोड़ीतान तोड़ीतान तोड़ीतान, तुरड़ड़ तुरड़ड़ तुरड़ड़ रमती सुरवन्ती॥
ॐ जय जय जगदानन्दी।

देती सकल भुवन पर आप विराजत, निश दिन आनन्दी।
गावत गंगा शंकर सेवत रेवा शंकर, तुम भव मेटन्ती॥
ॐ जय जय जगदानन्दी।

मैया जी को कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
अमरकंठ में विराजत, घाटनघाट कोटी रतन ज्योति॥
ॐ जय जय जगदानन्दी।

मैया जी की आरती निशदिन पढ़ि गावें, हो रेवा जुग-जुग नर गावें।
भजत शिवानन्द स्वामी जपत हरि, मनवांछित फल पावें॥

ॐ जय जगदानन्दी, मैया जय आनन्द कन्दी।
ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा, शिव हरि शंकर रुद्री पालन्ती॥
ॐ जय जय जगदानन्दी।

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