हिंदू धर्म में माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विशेष महत्व प्राप्त है। इस दिन को विनायक चतुर्थी कहा जाता है और इसे भगवान गणेश के व्रत और विधिवत पूजा के लिए जाना जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 22 जनवरी, गुरुवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और विघ्न निवारण होता है। साथ ही, रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं और जीवन की बाधाएँ दूर होती हैं।
विनायक चतुर्थी के दिन पूजा और व्रत का शुभ मुहूर्त इस प्रकार है:
• प्रात: गणेश पूजा मुहूर्त: सुबह 6:37 बजे से सुबह 7:56 बजे तक
• मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त: दोपहर 10:41 बजे से दोपहर 1:21 बजे तक
• माघ शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि: 22 जनवरी 2026, प्रातः 02:01 बजे से 23 जनवरी 2026 प्रातः 01:17 बजे तक
गणेश चतुर्थी और चंद्रमा दर्शन पर वर्जित
धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करना अशुभ माना जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति पर झूठे आरोप, चोरी या चरित्र हनन का कलंक लगने का भय रहता है। इस वर्जित अवधि में चंद्रमा के दर्शन से बचना चाहिए। वर्ष 2026 में भारत में यह वर्जित समय शाम 5:26 बजे से रात 8:47 बजे तक रहेगा, कुल अवधि 3 घंटे 21 मिनट।
यदि अनजाने में चंद्रमा देख लिया जाए तो उपाय
• घी का दीपक जलाकर गणेश जी का ध्यान करें।
• गणेश जी को 21 दूर्वा अर्पित करें।
• “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जाप करें।
• स्यमंतक मणि की कथा का पाठ या श्रवण करें।
• मंत्र जाप:
• सिंहः प्रसेनमवधीत्, सिंहो जाम्बवता हतः।
• सुकुमारक मा रोदीः, स्तव ह्येष स्यमन्तकः॥
पौराणिक कथा
गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन वर्जित होने का कारण पौराणिक कथा से जुड़ा है। कहा जाता है कि एक बार भगवान गणेश अपने वाहन मूषक से गिर गए। यह देख चंद्रमा हंसे, जिससे गणेश जी क्रोधित हुए और चंद्रमा को श्राप दे दिया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन जो भी चंद्रमा को देखेगा, उसे समाज में अपमान का सामना करना पड़ेगा। कथा में यह भी उल्लेख है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अनजाने में इस दिन चंद्रमा के दर्शन कर लिए थे, जिसके कारण उन पर ‘स्यमंतक मणि’ चोरी का झूठा आरोप लगा। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन से बचना अत्यंत आवश्यक है।
विनायक चतुर्थी का महत्व
विनायक चतुर्थी पर गणेश व्रत और मंत्र जाप करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। रुके हुए कार्य सुचारु रूप से पूर्ण होते हैं और परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। यह दिन विशेष रूप से विद्यार्थियों, व्यवसायियों और सभी श्रद्धालुओं के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस पावन दिन गणेश जी की विधिवत पूजा करने से मानसिक शांति, बौद्धिक विकास और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं। इसलिए यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।