उत्तराखंड को “देवभूमि” कहा जाता है और यह नाम किसी भी तरह अतिशयोक्ति नहीं है। यहां के हर कण-कण में आस्था और श्रद्धा की गहराई दिखाई देती है। नैनीताल जैसी पवित्र वादियों में कई ऐसे देवस्थान हैं, जिनकी अपनी महिमा, पुराणों से जुड़ी कथाएं और अद्भुत चमत्कारिक घटनाएं हैं। इन्हीं में से एक है पाषाण देवी मंदिर, जो नैनी झील के किनारे पहाड़ी पर स्थित है और अपनी प्राकृतिक आकृति और दिव्य ऊर्जा के कारण श्रद्धालुओं को दूर-दूर से आकर्षित करता है।
पाषाण देवी: प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई मां की नौ पिंडियां
पाषाण देवी मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मां भगवती की प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई नौ पिंडियां हैं। इन नौ पिंडियों में मां के नौ स्वरूपों के दर्शन होते हैं, इसलिए भक्त यहां आकर एक ही स्थान पर मां के सभी रूपों की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। यही वजह है कि यह मंदिर न केवल नैनीताल बल्कि पूरे उत्तराखंड में श्रद्धा का एक प्रमुख केंद्र बन गया है।
मंदिर के पुजारी जगदीश भट्ट बताते हैं कि इन पिंडियों को प्रतिदिन प्रातःकालीन शंख के जल से स्नान कराया जाता है। शंख का जल अत्यंत पवित्र माना जाता है और इसे विशेष मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित किया जाता है। इस अभिमंत्रित जल को लेने के लिए श्रद्धालु मंदिर में आते हैं और इसे अपने साथ ले जाते हैं।
अभिमंत्रित जल का चमत्कारिक लाभ
पुजारी जगदीश भट्ट के अनुसार, इस अभिमंत्रित जल का प्रयोग करने से कई रोगों में लाभ मिलता है। विशेष रूप से: त्वचा संबंधी रोग, सफेद दाग हकलाहट, हाथ-पैर और जोड़ों में सूजन इन रोगों में राहत मिलने की मान्यता के कारण इस जल की मांग दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है।
देशभर से श्रद्धालुओं की आस्था
यह जल सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़, लखनऊ और अन्य कई शहरों से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। लोग इस अभिमंत्रित जल को पीने के साथ-साथ नहाने के पानी में मिलाकर भी उपयोग करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार के रोगों से छुटकारा मिलता है।
जल निकालने की प्रक्रिया और नियम
पुजारी ने बताया कि इस जल को हर 10 दिन में एक बार निकाला जाता है। जल निकालने के लिए दिन, वार और तिथि का विशेष महत्व होता है और इन सभी का मिलान करके ही जल निकाला जाता है। पहले इस जल की मांग कम थी, इसलिए इसे कम मात्रा में निकाला जाता था। लेकिन अब श्रद्धा बढ़ने के साथ-साथ मांग भी बढ़ी है, इसलिए अब इसे महीने में तीन बार, 10-10 दिन के अंतराल में निकाला जाता है। एक बार में निकाला गया जल लगभग 20 से 25 लीटर होता है। यही जल भक्तों के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक बन गया है।
आस्था का प्रतीक: पाषाण देवी मंदिर
पाषाण देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का जीवंत उदाहरण है। जहां प्राकृतिक चमत्कार, पुरातन मान्यताएं और लोगों की श्रद्धा एक साथ मिलकर एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव बनाते हैं। यह मंदिर दर्शाता है कि कैसे एक छोटा सा स्थान भी लोगों के जीवन में बड़ी उम्मीद और सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। यदि आप नैनीताल की यात्रा पर हैं तो पाषाण देवी मंदिर की पवित्रता और चमत्कारिक जल का अनुभव जरूर लें यह आपके लिए एक आत्मिक यात्रा साबित हो सकती है।