प्राचीन सनातन मान्यताओं के अनुसार, प्रत्येक मनुष्य के भाग्य का लेखन स्वयं ब्रह्मा जी द्वारा उसकी हथेली में किया गया है। यही कारण है कि भारतीय परंपरा में हस्तरेखा विज्ञान को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। माना जाता है कि मनुष्य के जीवन की दिशा, उसकी मानसिक प्रवृत्ति, भावनात्मक स्थिति और संभावनाओं का संकेत हथेली पर बनी रेखाओं में छिपा होता है, जिसे अनुभवी हस्तरेखा विशेषज्ञ पढ़कर भविष्य का अनुमान लगाते हैं।
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, यद्यपि हथेली पर कई प्रकार की रेखाएं विद्यमान होती हैं, लेकिन किसी भी व्यक्ति के जीवन का प्रारंभिक और सटीक अध्ययन करने के लिए तीन रेखाओं का ज्ञान सबसे आवश्यक माना गया है। ये तीन रेखाएं हैं- जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा। इन्हें हस्तरेखा विज्ञान की आधारशिला कहा जाता है।
हथेली की मुख्य और गौण रेखाएं
हस्तरेखा विज्ञान में सामान्यतः हथेली पर सात प्रमुख रेखाएं और बारह गौण रेखाएं मानी जाती हैं। सभी लोगों की हथेली में सभी गौण रेखाओं का होना आवश्यक नहीं होता। यहां तक कि कुछ व्यक्तियों के हाथों में सात मुख्य रेखाओं में से भी कुछ रेखाएं अनुपस्थित हो सकती हैं। फिर भी, जीवन, मस्तिष्क और हृदय रेखा लगभग हर व्यक्ति की हथेली में पाई जाती हैं और इन्हीं के आधार पर प्रारंभिक फलकथन किया जाता है।
हस्तरेखा का गंभीर अध्ययन करने वाले व्यक्ति के लिए यह आवश्यक माना गया है कि वह अपने आसपास के अनेक लोगों की हथेलियों में इन तीन प्रमुख रेखाओं का सूक्ष्म अवलोकन करे। इससे रेखाओं के स्वरूप, गहराई और दिशा को समझने में सहायता मिलती है।
जीवन रेखा: आयु और जीवन शक्ति का संकेत
जीवन रेखा, जिसे आयु रेखा या लाइफ लाइन भी कहा जाता है, हथेली की सबसे महत्वपूर्ण रेखाओं में से एक है। यह रेखा तर्जनी उंगली और अंगूठे के बीच से प्रारंभ होकर अंगूठे के निचले भाग को घेरते हुए कलाई की ओर जाती है। यह रेखा शुक्र पर्वत को घेरे रहती है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, जीवन रेखा व्यक्ति की आयु से अधिक उसकी जीवन ऊर्जा, स्वास्थ्य, साहस और जीवन की स्थिरता को दर्शाती है। गहरी और स्पष्ट जीवन रेखा अच्छे स्वास्थ्य और दृढ़ इच्छाशक्ति का संकेत मानी जाती है।
मस्तिष्क रेखा: बुद्धि और विचार शक्ति का दर्पण
मस्तिष्क रेखा व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता और मानसिक प्रवृत्ति को दर्शाती है। इस रेखा का कोई एक निश्चित उद्गम स्थान नहीं होता। सामान्यतः यह जीवन रेखा के पास से शुरू होकर हथेली के मध्य भाग से होती हुई द्वितीय मंगल क्षेत्र या चंद्र क्षेत्र की ओर जाती है। हस्तरेखा विज्ञान में मस्तिष्क रेखा के उद्गम के पाँच प्रमुख स्वरूप बताए गए हैं। इन स्वरूपों के अध्ययन से व्यक्ति की बुद्धिमत्ता, रचनात्मकता, व्यावहारिकता और कल्पनाशीलता के बारे में गहरी जानकारी प्राप्त होती है।
हृदय रेखा: भावनाओं और संबंधों का संकेत
हृदय रेखा व्यक्ति की भावनात्मक प्रकृति, प्रेम, करुणा और संबंधों की गहराई को दर्शाती है। यह रेखा मस्तिष्क रेखा के समानांतर चलती है और सामान्यतः हथेली पर छोटी उंगली के नीचे बुध क्षेत्र से प्रारंभ होकर सूर्य और शनि क्षेत्र को पार करते हुए गुरु पर्वत की ओर जाती है।
हालांकि, सभी व्यक्तियों की हथेली में इसका स्वरूप समान नहीं होता। हस्तरेखा अध्ययन में हृदय रेखा की पाँच प्रमुख स्थितियों का विश्लेषण किया जाता है, जिनसे व्यक्ति की भावनात्मक स्थिरता और संबंधों के प्रति उसकी सोच को समझा जाता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से हस्तरेखा का महत्व
हस्तरेखा विज्ञान केवल भविष्य जानने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मज्ञान का एक साधन भी है। हथेली की रेखाएं यह संकेत देती हैं कि मनुष्य को अपने जीवन में किन गुणों को विकसित करना चाहिए और किन प्रवृत्तियों से सावधान रहना चाहिए। यही कारण है कि सनातन परंपरा में हस्तरेखा को आध्यात्मिक विज्ञान का दर्जा दिया गया है।