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दिव्य सुधा > अन्य > पौष मासिक शिवरात्रि 2025: वर्ष की अंतिम शिव साधना का पावन अवसर
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पौष मासिक शिवरात्रि 2025: वर्ष की अंतिम शिव साधना का पावन अवसर

दिव्यसुधा
Last updated: December 17, 2025 3:32 pm
दिव्यसुधा
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पौष मासिक शिवरात्रि 2025 पर भगवान शिव की पूजा और अभिषेक
पौष मासिक शिवरात्रि 2025 पर निशिता काल में शिव पूजा का विशेष महत्व
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सनातन धर्म में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व है और मासिक शिवरात्रि को शिव कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ दिन माना गया है। इस वर्ष की अंतिम पौष मासिक शिवरात्रि 18 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी। मासिक शिवरात्रि प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है, जब व्रत रखकर भगवान शिव की विधिपूर्वक पूजा करने का विधान है। शिव पुराण में इस व्रत का विशेष उल्लेख मिलता है, जिससे इसके आध्यात्मिक महत्व का पता चलता है।

शिव पुराण में मासिक शिवरात्रि का महत्व
शास्त्रों के अनुसार मासिक शिवरात्रि का व्रत केवल साधारण उपवास नहीं, बल्कि शिव-शक्ति की उपासना का विशेष माध्यम है। शिव पुराण में उल्लेख मिलता है कि देवी लक्ष्मी, इन्द्राणी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, माता सीता, देवी पार्वती और रति ने भी शिवरात्रि का व्रत रखकर भगवान शिव की कृपा प्राप्त की थी। यह व्रत स्त्री-पुरुष दोनों के लिए कल्याणकारी माना गया है और इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

पौष मासिक शिवरात्रि 2025 की तिथि और मुहूर्त
पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 18 दिसंबर 2025 को प्रातः 2 बजकर 32 मिनट पर होगा और इसका समापन 19 दिसंबर को प्रातः 4 बजकर 49 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर मासिक शिवरात्रि 18 दिसंबर को मनाई जाएगी। इस दिन शिव पूजा के लिए निशिता काल सर्वोत्तम माना गया है, जो रात्रि 11 बजकर 51 मिनट से लेकर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस समय की गई शिव आराधना विशेष फल प्रदान करती है।

राहु-केतु दोष से मुक्ति दिलाने वाला व्रत
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से जीवन में मानसिक तनाव, बाधाएँ और अस्थिरता उत्पन्न होती है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की उपासना करने से राहु-केतु से जुड़े दोष शांत होते हैं। इस दिन निशिता काल में दुर्वा और कुश को जल में मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। जिन जातकों की कुंडली में राहु-केतु की महादशा चल रही हो, उन्हें इस दिन शिव पंचाक्षरी मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का कम से कम 11 माला जप करना चाहिए, जिससे ग्रह दोषों से राहत मिलती है।

असंभव को संभव करने वाला मासिक शिवरात्रि व्रत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मासिक शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा प्रदान करता है। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन के कठिन से कठिन और असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से की गई शिव साधना से भक्त के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं।

मासिक शिवरात्रि व्रत की विधि
मासिक शिवरात्रि के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर या मंदिर में स्थित शिवलिंग पर जलाभिषेक करें और बेलपत्र, फूल, धतूरा व भस्म अर्पित करें। संध्या के समय पुनः शिव पूजा करें और “ॐ नमः शिवाय” या अन्य शिव मंत्रों का जप करें। पूजा के दौरान खीर, फल और मिठाई का भोग लगाएं और अंत में शिव आरती कर भगवान शिव से मनोकामना की प्रार्थना करें।

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