सनातन धर्म में भगवान शिव को करुणा, कल्याण और मोक्ष के देवता के रूप में पूजा जाता है। शिव आराधना का सबसे पावन पर्व शिवरात्रि माना गया है, जो शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है, लेकिन पौष माह की शिवरात्रि विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह वर्ष 2025 की अंतिम मासिक शिवरात्रि है। जो श्रद्धालु पूरे वर्ष शिवरात्रि का व्रत नहीं कर पाए, उनके लिए यह अंतिम अवसर है, जब वे भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं। इसके बाद मासिक शिवरात्रि का व्रत सीधे नए वर्ष 2026 में ही आएगा।
दिसंबर मासिक शिवरात्रि 2025 की तिथि
पंचांग के अनुसार, पौष माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 18 दिसंबर 2025 को प्रातः 02 बजकर 32 मिनट पर होगा और इसका समापन 19 दिसंबर 2025 को प्रातः 04 बजकर 59 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर वर्ष 2025 की अंतिम मासिक शिवरात्रि 18 दिसंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की संयुक्त कृपा का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है, जिससे यह तिथि अत्यंत शुभ और फलदायी मानी जा रही है।
मासिक शिवरात्रि पूजा के शुभ मुहूर्त
मासिक शिवरात्रि के दिन शिव पूजा के लिए निशिता काल को सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन निशिता पूजा का शुभ समय रात्रि 11 बजकर 51 मिनट से लेकर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में की गई शिव आराधना शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। इसके अतिरिक्त इस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 05:19 से 06:13 बजे तक रहेगा, जो साधना और जप के लिए उत्तम है। वहीं अभिजीत मुहूर्त 11:57 बजे से 12:38 बजे तक रहेगा। दिन में भी कई शुभ समय प्राप्त हो रहे हैं, जिनमें प्रातः, दोपहर और अमृत काल में शिव पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
पौष शिवरात्रि पर विशेष योग
इस वर्ष की अंतिम मासिक शिवरात्रि पर कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जो इस दिन को और भी विशेष बनाते हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 07:08 बजे से रात्रि 08:07 बजे तक रहेगा, जिसमें किए गए सभी शुभ कार्य सफल माने जाते हैं। इसके साथ ही धृति योग प्रातः काल से लेकर दोपहर 03:06 बजे तक रहेगा, जो स्थिरता, धैर्य और सफलता प्रदान करने वाला माना गया है। इस दिन अनुराधा नक्षत्र प्रातः काल से रात्रि 08:07 बजे तक रहेगा, जिसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र आरंभ होगा।
शिवरात्रि पर भद्रा का प्रभाव
18 दिसंबर को मासिक शिवरात्रि के दिन भद्रा का प्रारंभ प्रातः 07:08 बजे से होकर दोपहर 03:47 बजे तक रहेगा। हालांकि यह भद्रा स्वर्ग लोक में स्थित मानी गई है, इसलिए इसका पृथ्वी पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। ऐसे में भक्त बिना किसी चिंता के भगवान शिव की पूजा, व्रत और आराधना कर सकते हैं।
मासिक शिवरात्रि पर शिववास
मासिक शिवरात्रि के दिन प्रातः काल से लेकर 19 दिसंबर प्रातः 04:59 बजे तक भगवान शिव का वास श्मशान में माना गया है। इसके पश्चात शिववास माता गौरी के साथ हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार शिववास की स्थिति के अनुसार पूजा करने से साधक को विशेष फल की प्राप्ति होती है।
मासिक शिवरात्रि व्रत का आध्यात्मिक महत्व
मासिक शिवरात्रि का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। इस व्रत को रखने से जीवन के कष्ट और बाधाएँ दूर होती हैं तथा मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत विवाह में आ रही समस्याओं को दूर करता है और दांपत्य जीवन को सुखमय बनाता है। कुंवारी कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है, जबकि विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। शिव और गौरी की संयुक्त पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि और संतुलन बना रहता है।