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दिव्य सुधा > वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा > वास्तु शास्त्र और स्वास्थ्य: पंचतत्वों के संतुलन से मिलता है रोगमुक्त जीवन
वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा

वास्तु शास्त्र और स्वास्थ्य: पंचतत्वों के संतुलन से मिलता है रोगमुक्त जीवन

दिव्यसुधा
Last updated: December 8, 2025 10:27 am
दिव्यसुधा
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वास्तु शास्त्र और स्वास्थ्य के पंचतत्व संतुलन से रोगमुक्त जीवन का चित्र
वास्तु के पंचतत्व संतुलन से घर में सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य की वृद्धि होती है।
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वास्तु शास्त्र केवल भवन निर्माण की विधि नहीं, बल्कि प्रकृति, ऊर्जा और पंचतत्वों के सामंजस्य का दिव्य विज्ञान है। जब मनुष्य प्रकृति के अनुरूप जीवन जीता है तो उसका शरीर, मन और ऊर्जा सभी संतुलित रहती हैं। लेकिन जब किसी घर या भवन में वास्तु दोष उत्पन्न होते हैं, तब ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है और यह रुकावट कई प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकती है। वास्तु शास्त्र स्पष्ट कहता है कि पंचतत्व (जल, वायु, अग्नि, पृथ्वी और आकाश) में से किसी एक तत्व का असंतुलन भी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकार पैदा कर सकता है। इसलिए प्राचीन ऋषियों ने भवन निर्माण से पहले भूमि, दिशा, ढलान और ऊर्जा केंद्रों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।

कैसे वास्तु दोष बनाते हैं स्वास्थ्य समस्याओं का कारण?
यदि किसी घर में लगातार बीमारी बनी रहती है या परिवार में कोई व्यक्ति लंबे समय से रोगग्रस्त है, तो ज्योतिषीय कारणों के साथ-साथ वास्तु दोषों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। कुछ प्रमुख वास्तु कारण जो स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न कर सकते हैं:

  1. गलत दिशा में ढलान वाली भूमि

नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) में ढलान होना रोग और मानसिक तनाव बढ़ाता है। वायव्य (उत्तर-पश्चिम) में ढलान होने से बार-बार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ आती हैं। विकर्ण ढलान वाली भूमि में कर्ण रोग या कान संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

  1. गलत स्थान से रास्ता निकालना
    यदि घर में गलत दिशा से प्रवेशद्वार बनाया जाए, तो यह वास्तु पुरुष के अंगों को प्रभावित करता है और परिणामस्वरूप घर के सदस्यों के शरीर के वही अंग प्रभावित होने लगते हैं।
  2. खिड़कियों और हवा के प्रवाह में त्रुटि
    जहाँ उचित दिशा में खिड़कियाँ नहीं होतीं, वहाँ ऊर्जा रुकती है, जिससे रोग बढ़ते हैं और मानसिक बोझ महसूस होता है।
  3. दरवाजों की आवाज का अशुभ प्रभाव
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गर्भवती महिला को ऐसे घर में नहीं रहना चाहिए जहाँ दरवाजे आवाज करते हों। ऐसी ध्वनियाँ ऊर्जा को बाधित करती हैं और माँ व शिशु के लिए अशुभ मानी जाती हैं।
  4. बीम के नीचे बैठना या सोना
    बीम मन और शरीर पर दबाव डालती है। इसके नीचे सोने से सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा और अंगों में कमजोरी बढ़ती है।
  5. बिस्तर के नीचे अव्यवस्था
    गद्दे के नीचे दवाइयाँ, कागज, रुपये-पैसे या किसी भी प्रकार की चीज़ें रखना स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और शरीर में दर्द पैदा करता है।
  6. अग्निकोण-दक्षिण और वायव्य-उत्तर के बीच ऊँच-नीच
    यदि इन दिशाओं का स्तर गलत हो, तो घर के लोगों में कमजोरी, रक्त विकार और मानसिक रोग उत्पन्न हो सकते हैं।

वास्तु सुधार से मिलता है रोगमुक्त जीवन

यदि घर में कोई सदस्य वर्षों से बीमार है, तो केवल दवाइयाँ या चिकित्सा ही पर्याप्त नहीं होती। जन्म कुंडली में ग्रहों की दशा सुधारने के साथ-साथ घर के वास्तु दोषों का शमन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब घर की ऊर्जा संतुलित होती है, और पंचतत्व अपने-अपने स्थान पर व्यवस्थित होते हैं तब शरीर रोगमुक्त होने लगता है, मन शांत होता है, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, जीवन में स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि बढ़ती है वास्तु शास्त्र यही सिखाता है कि जहाँ प्रकृति का संतुलन होता है, वहीं जीवन में स्वास्थ्य और खुशहाली का वास होता है।

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