दिसंबर 2025 में आज यानी 2 दिसंबर को मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। इस तिथि पर प्रदोष व्रत का पालन किया जाता है। शास्त्रों में प्रदोष काल को भगवान शिव की आराधना का श्रेष्ठ समय माना गया है। इसलिए यह दिन शिव भक्तों के लिए अत्यंत शुभ फल देने वाला होता है। एस्ट्रोलॉजर आनंद सागर पाठक के अनुसार, आज का पंचांग अत्यंत पवित्र योग लेकर आया है और व्रत-पूजन से साधक को विशेष लाभ प्राप्त होगा।
प्रदोष व्रत का महत्व
आज यानी 2 दिसंबर को किया जाने वाला प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का उत्तम माध्यम है। विशेष रूप से संध्याकाल में की गई पूजा साधक के जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और संतोष लेकर आती है। मान्यता है कि जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक व्रत रखता है, उस पर महादेव प्रसन्न होकर सभी प्रकार के कष्टों को दूर कर देते हैं।
शिव पुराण में भी प्रदोष व्रत को अत्यंत फलदायी व्रत कहा गया है। इस व्रत को करने से व्यक्ति के जीवन में मानसिक शांति, स्वास्थ्य लाभ और पारिवारिक सौहार्द की वृद्धि होती है।
आज का पंचांग (2 दिसंबर 2025)
तिथि: शुक्ल द्वादशी – प्रातः 03:57 बजे तक
मास (पूर्णिमांत): मार्गशीर्ष
दिन: मंगलवार
संवत्: 2082
योग: वारियाना – रात्रि 09:08 बजे तक
करण 1: बालव – प्रातः 03:57 बजे तक
करण 2: कौलव – 3 दिसंबर को प्रातः 02:14 बजे तक
सूर्योदय-सूर्यास्त एवं चंद्र ग्रहण संबंधी समय
सूर्योदय: 06:57 बजे
सूर्यास्त: 05:24 बजे
चंद्रोदय: 02:29 बजे (दोपहर)
चंद्रास्त: 3 दिसंबर, 04:53 बजे
सूर्य राशि: वृश्चिक
चंद्र राशि: मेष
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 11:50 से 12:31 बजे
अमृत काल: 02:23 से 03:49 बजे
अशुभ समय
राहुकाल: 02:47 से 04:06 बजे
गुलिकाल: 12:11 से 01:29 बजे
यमगण्ड: 09:34 से 10:52 बजे
आज का नक्षत्र – अश्विनी नक्षत्र
आज चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। अश्विनी नक्षत्र के जातकों में तेज बुद्धि, उत्साह, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता होती है। यह नक्षत्र नए कार्यों की शुरुआत, वाहन खरीद और चिकित्सा संबंधी कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।
नक्षत्र समाप्ति समय: रात्रि 08:51 बजे
शासक ग्रह: केतु
देवता: अश्विनी कुमार
प्रतीक: घोड़े का सिर
भौम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
भौम प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष के दिन मनाया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित है और माना जाता है कि इसे करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं। मंगलवार को प्रदोष व्रत रहने से मंगल दोष शांत होता है और स्वास्थ्य, भूमि-वाहन, कोर्ट-कचहरी तथा करियर संबंधी समस्याओं में भी सुधार मिलता है। यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति और मन की शांति प्रदान करता है।
शास्त्रों के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत करने से—
- गृहकलह समाप्त होता है
- आर्थिक स्थिति में सुधार होता है
- नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
- मानसिक तनाव कम पड़ता है
भौम प्रदोष व्रत की विधि
प्रातःकाल स्नान करके साफ एवं पवित्र वस्त्र धारण करें। उस बाद भगवान शिव का ध्यान करें और घर या मंदिर में शिवलिंग स्थापित करके पूजा प्रारंभ करें। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धूप, दीप और फल अर्पित करें। व्रत के दौरान फलाहार या निर्जल उपवास रखने का नियम है।
- संध्याकाल के प्रदोष काल में शिव आराधना, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है।
- पूजन मंत्र: “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप अवश्य करें।
- पूरे दिन क्रोध, तनाव और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। अगले दिन प्रातः पारण करके जरूरतमंद या ब्राह्मण को दान दें।