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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > गीता जयंती 2025: मोक्षदा एकादशी, तिथि, महत्व और शुभ मुहूर्त
व्रत और त्योहार

गीता जयंती 2025: मोक्षदा एकादशी, तिथि, महत्व और शुभ मुहूर्त

दिव्यसुधा
Last updated: November 29, 2025 11:42 am
दिव्यसुधा
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गीता जयंती 2025 पर श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया गीता उपदेश – मोक्षदा एकादशी का पवित्र समारोह
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी पर मनाई जाने वाली गीता जयंती—श्रीकृष्ण के कालातीत ज्ञान का उत्सव।
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गीता जयंती हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व है, जो हर वर्ष मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में मोहग्रस्त अर्जुन को धर्म, कर्म और मोक्ष का वह अनंत ज्ञान प्रदान किया था, जो आगे चलकर “श्रीमद्भगवद्गीता” के नाम से अमर हुआ। गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन का मार्गदर्शक, अज्ञान के अंधकार को मिटाने वाला प्रकाश और सत्य की ओर ले जाने वाली दिव्य धारा है।

2025 में गीता जयंती कब है?
पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी तिथि 30 नवंबर 2025 को रात 9:29 बजे आरंभ होगी और इसका समापन 1 दिसंबर 2025 को शाम 7:01 बजे होगा। उदयातिथि की मान्यता के अनुसार गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी दोनों ही 1 दिसंबर, सोमवार के दिन मनाई जाएंगी। इस दिन उपवास, गीता पाठ और भगवान विष्णु की उपासना से जीवन की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

गीता जयंती का शुभ मुहूर्त और योग
इस वर्ष गीता जयंती अत्यंत विशेष है क्योंकि इस दिन अनेक शुभ योगों का निर्माण होगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 से 12:31 बजे तक रहेगा, जो अत्यंत शुभ माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त 5:08 से 6:02 बजे तक रहेगा, जो आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम समय है। इस दिन रेवती नक्षत्र रात 11:18 बजे तक रहेगा तथा व्यतीपात योग भी पूरे दिन बना रहेगा, जिससे यह तिथि और भी पवित्र मानी जाती है। हालांकि इस वर्ष भद्रा सुबह 8:20 बजे से शाम 7:01 बजे तक रहेगी, इसलिए इस अवधि में कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। पंचक भी रहेगा, परंतु यह पंचक अशुभ नहीं माना जा रहा है।

गीता की उत्पत्ति कैसे हुई?
जब महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था, अर्जुन अपने सामने अपने ही परिजनों को देखकर मोह और दुख से भर गए। वे युद्ध करने की स्थिति में नहीं थे और अपने रथ में बैठकर उन्होंने हथियार त्याग दिए। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना विराट स्वरूप दिखाया और बताया कि जीवन का मूल आधार कर्म है, न कि उसके फल की चिंता। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो दिव्य ज्ञान दिया, वही “श्रीमद्भगवद्गीता” के रूप में संसार के लिए अमृत बनकर समक्ष आया। इसी कारण इस तिथि को गीता जयंती मनाई जाती है।

गीता के श्लोक और अध्यायों का महत्व
महाभारत के भीष्म पर्व में वर्णित गीता में कुल 18 अध्याय और 710 श्लोक हैं, जिनमें जीवन का सम्पूर्ण सार छिपा है। कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने 575 श्लोक अर्जुन को एक ही दिन सुनाए थे। यह ज्ञान अर्जुन के संशय, मोह और दुख को समाप्त कर उन्हें धर्म के मार्ग पर दृढ़ करता है। आज भी गीता के उपदेश उन सभी लोगों के लिए मार्गदर्शक हैं, जो जीवन में चुनौतियों, भ्रम और मानसिक संकटों से गुजर रहे होते हैं।

आज के समय में गीता का महत्व
आधुनिक युग की तेज़ रफ्तार में लोग मानसिक तनाव, रिश्तों में उलझन और जीवन के असंतुलन से जूझते रहते हैं। गीता का ज्ञान व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है, सोच को सकारात्मक करता है और जीवन के उद्देश्य को स्पष्ट करता है। गीता हमें सिखाती है कि कर्म करते रहना ही वास्तविक पूजा है और परिणाम की चिंता छोड़ देना ही सच्चा त्याग है। यही कारण है कि गीता जयंती पर गीता पाठ करने से मन निर्मल होता है, बुद्धि तेज होती है और आत्मा दिव्यता से भर जाती है।

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