स्कंद षष्ठी व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित माना जाता है। यह व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर रखा जाता है। मार्गशीर्ष मास की स्कंद षष्ठी 26 नवंबर को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है तथा जीवन में सुख, समृद्धि, विजय और आत्मबल की वृद्धि होती है।
स्कंद षष्ठी तिथि एवं शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, षष्ठी तिथि की शुरुआत 25 नवंबर रात 10:56 बजे से होगी और इसका समापन 27 नवंबर रात 12:01 बजे पर होगा। मार्गशीर्ष माह की स्कंद षष्ठी का पर्व 26 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन पूजा के लिए विजय मुहूर्त अत्यंत शुभ माना गया है। आप दोपहर 1:54 बजे से 2:36 बजे के बीच पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
स्कंद षष्ठी व्रत की पूजा विधि
स्कंद षष्ठी के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ कर भगवान शिव, माता पार्वती, श्री गणेश और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। शुभ मुहूर्त में फूल, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित कर भगवान की आराधना करें। अंत में भगवान कार्तिकेय की आरती कर व्रत का संकल्प पूर्ण करें।
व्रत का आध्यात्मिक महत्व
मान्यताओं के अनुसार स्कंद षष्ठी विजय, शक्ति और साहस का पावन उत्सव है। इस दिन भगवान कार्तिकेय की आराधना से व्यक्ति को मानसिक मजबूती, आत्मविश्वास और कठिनाइयों पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। भक्त इस व्रत से जीवन को आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण करते हैं।
स्कंद षष्ठी पूजा मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विधमहे: महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कंद: प्रचोदयात॥
ॐ श्री स्कंदाय नमः
ॐ सर्वणभवाय नमः
देव सेनापते स्कंद कार्तिकेय भवोद्भव।
कुमार गुह गांगेय शक्तिहस्त नमोस्तु ते॥