Friday, 1 May 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > सनातन धर्म > मंदिर > मुंबादेवी: मुंबई की अधिष्ठात्री देवी, पौराणिक कथा, इतिहास और मंदिर का महत्व
मंदिर

मुंबादेवी: मुंबई की अधिष्ठात्री देवी, पौराणिक कथा, इतिहास और मंदिर का महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: November 17, 2025 1:26 pm
दिव्यसुधा
Share
मुंबादेवी मंदिर मुंबई – अधिष्ठात्री देवी, पौराणिक कथा और प्राचीन इतिहास
मुंबई की संरक्षक और शहर के नाम की प्रेरणा मानी जाने वाली मां मुंबादेवी – प्राचीन इतिहास, आस्था और पौराणिक कथा से जुड़ी दिव्य पहचान।
SHARE

मुंबई को आज भले ही भारत की आर्थिक राजधानी, सपनों का शहर और आधुनिकता का केंद्र कहा जाता है, लेकिन इस विशाल महानगर की जड़ें गहरे आध्यात्मिक और पौराणिक इतिहास से जुड़ी हुई हैं। इस शहर का नाम जिस देवी के आशीर्वाद से फलता-फूलता है, वे हैं मां मुंबादेवी, जिन्हें मुंबई की संरक्षक देवी माना जाता है। उनका मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके पीछे जुड़ी पौराणिक कथा, स्थानीय मान्यताएँ और ऐतिहासिक प्रसंग इसे और भी विशेष बनाते हैं।

कौन हैं मां मुंबादेवी?

मां मुंबादेवी को आदिशक्ति दुर्गा का अवतार माना जाता है। किंवदंतियों के अनुसार, वे समुद्र के प्रकोप, तूफानों और प्राकृतिक आपदाओं से मुंबई क्षेत्र की रक्षा करती हैं। इसी कारण स्थानीय समुदाय, विशेषकर कोली और अग्रि समाज, उन्हें अपनी कुलदेवी मानते हैं। समुद्र तट पर रहने वाला यह समुदाय मानता था कि मां मुंबादेवी उनकी नौकाओं, जीविका और परिवार की हर विपत्ति से रक्षा करती हैं।

मंदिर में स्थापित मूर्ति अत्यंत आकर्षक और शक्तिशाली प्रतीत होती है—देवी लाल वस्त्रों से अलंकृत, चांदी के मुकुट से शोभित और स्वर्णाभूषणों से सुसज्जित दिखाई देती हैं। उनकी आठ भुजाओं में त्रिशूल, कमल, धनुष, बाण, खड्ग और माला जैसे दिव्य आयुध हैं। सिंह को उनका वाहन माना जाता है, जो शक्ति, साहस और विजय का प्रतीक है। भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूरी होती है।

मुंबादेवी मंदिर का प्राचीन इतिहास

मुंबादेवी मंदिर मुंबई के प्राचीनतम मंदिरों में गिना जाता है। लगभग 400 वर्ष पुराना यह मंदिर प्रारंभ में कोली समुदाय ने बोरीबंदर क्षेत्र में स्थापित किया था। बाद में अंग्रेज़ शासनकाल में वर्ष 1737 में इसे स्थानांतरित कर वर्तमान स्थल भूलेश्वर में पुनः निर्मित किया गया।

मुंबई शहर का नाम भी इसी देवी के नाम पर आधारित है—“मुंबा” देवी + “आई” (मराठी में माता), यानी “मुंबई”। अंग्रेजों ने उच्चारण के अनुसार इसे “Bombay” कहा, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह हमेशा से “मुंबई” ही थी। वर्ष 1995 में इस शहर का आधिकारिक नाम भी बदलकर मुंबई कर दिया गया।

नवरात्रि, दीपावली, चैत्रोत्सव और विशेष मंगलवारों पर यहां विशाल पूजा, भजन, आरती और उत्सव आयोजित किए जाते हैं। इन दिनों मंदिर में हजारों भक्त दर्शन के लिए उमड़ते हैं।

दैत्य मुम्बारका और देवी के अवतार की पौराणिक कथा

मुंबादेवी की पूजा और मुंबई के नामकरण से जुड़ी सबसे रोचक कथा दैत्य मुम्बारका से संबंधित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस क्षेत्र में मुम्बारका नामक एक अत्याचारी दैत्य रहता था। अपनी अपार शक्ति के बल पर वह देवताओं और मनुष्यों दोनों को परेशान करता था। उसके आतंक से मुक्ति पाने के लिए देवताओं ने आदिशक्ति दुर्गा से प्रार्थना की।

देवी ने उनकी विनती स्वीकारते हुए मुंबा देवी रूप में अवतार लिया। एक भीषण युद्ध के बाद उन्होंने दैत्य मुम्बारका का वध कर इस क्षेत्र को भयमुक्त किया। विजय के सम्मान में इस स्थान का नाम “मुंबा” देवी के नाम पर “मुंबई” प्रचलित हुआ।

मुंबादेवी केवल एक देवी नहीं, बल्कि मुंबई की आत्मा हैं—इस शहर की संस्कृति, आस्था और पहचान की आधारशिला। यहां की हर धड़कन में देवी के संरक्षण की परंपरा बसती है। आज भी लाखों लोग अपनी जीवन-यात्रा की शुरुआत मां मुंबादेवी के दर्शन से करते हैं, और अपने सपनों को साकार करने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

TAGGED:Mumbai Mumbadevi Templeकोली समुदाय कुलदेवीमुंबई आध्यात्मिक इतिहासमुंबई का नामकरणमुंबई की अधिष्ठात्री देवीमुंबई धार्मिक स्थलमुंबई पौराणिक कहानीमुंबादेवीमुंबादेवी मंदिरमुंबादेवी मुंबई इतिहासमुंबादेवी स्टोरीमुम्बारका दैत्य कथा
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article मार्गशीर्ष अमावस्या पर पितृ तर्पण करते श्रद्धालु – पितृ दोष निवारण का शुभ दिन मार्गशीर्ष अमावस्या: पितृ शांति और पितृ दोष निवारण का अत्यंत शुभ दिन
Next Article 19 नवंबर 2025 का राशिफल – सभी 12 राशियों के लिए दैनिक भविष्यफल और आज का भाग्यफल 19 नवंबर 2025 राशिफल: सभी 12 राशियों का आज का भविष्यफल
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

मंदिर

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग: सह्याद्री की गोद में बसा शिव का दिव्य धाम

By दिव्यसुधा
जबलपुर के अधारताल स्थित पचमठा मंदिर में स्थापित मां लक्ष्मी की चमत्कारी प्रतिमा
मंदिर

जहां दिन में तीन बार रंग बदलती है मां लक्ष्मी की प्रतिमा

By Ekta Mishra
मंदिर

तमिलनाडु का करुम्बेश्वर शिव मंदिर – डायबिटीज के रोगियों के लिए आस्था का केंद्र

By दिव्यसुधा
उच्ची पिल्लयार कोइल त्रिची का प्राचीन गणेश मंदिर रॉकफोर्ट की चोटी पर
मंदिर

उच्ची पिल्लयार कोइल: त्रिची की पवित्र चट्टान पर विराजमान भगवान गणेश का प्राचीन धाम

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?