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दिव्य सुधा > व्रत और त्योहार > मासिक शिवरात्रि व्रत: महत्व, पूजा विधि और शुभ समय
व्रत और त्योहार

मासिक शिवरात्रि व्रत: महत्व, पूजा विधि और शुभ समय

दिव्यसुधा
Last updated: November 16, 2025 2:58 pm
दिव्यसुधा
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मासिक शिवरात्रि व्रत पूजा – शिवलिंग अभिषेक व आराधना
मासिक शिवरात्रि व्रत पर शिवलिंग अभिषेक करते भक्त—शिव कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर।
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हिंदू धर्म में शिवरात्रि का व्रत अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। वर्ष में कुल 12 मासिक शिवरात्रियाँ आती हैं, जिनमें हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की जाती है। इस बार मार्गशीर्ष माह की मासिक शिवरात्रि 18 नवंबर को मनाई जाएगी। यह दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मान्यता है कि इस तिथि पर सच्चे मन से की गई शिव-पूजा मनोकामनाओं को पूर्ण करती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनाए रखती है।


मासिक शिवरात्रि का महत्व
माना जाता है कि इस दिन शिव-पार्वती का पूजन करने से दांपत्य जीवन में सौहार्द बढ़ता है, ग्रहदोष शांत होते हैं और व्यक्ति के जीवन से बाधाएँ दूर होती हैं। मासिक शिवरात्रि का व्रत आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत प्रभावशाली है। यह मन और आत्मा को शुद्ध करता है तथा साधक के भीतर भक्ति और ऊर्जा का संचार करता है। विशेषकर मार्गशीर्ष माह की शिवरात्रि को भगवान शिव की कृपा प्राप्ति का शुभ समय माना गया है।


तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 18 नवंबर सुबह 7:12 बजे से प्रारंभ होकर 19 नवंबर सुबह 9:43 बजे तक रहेगी। शिवरात्रि का पूजन रात्रि में निशिता काल में करना विशेष फलदायी होता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त:
• रात 11:42 बजे से 12:36 बजे तक
इस समय में की गई पूजा का फल अत्यंत शुभ माना जाता है।


मासिक शिवरात्रि पर बन रहे शुभ योग
इस वर्ष नवंबर की मासिक शिवरात्रि पर दो शुभ योगों का संयोग हो रहा है:

  1. आयुष्मान योग – प्रातःकाल से सुबह 08:09 बजे तक
    यह योग स्वास्थ्य, आयु वृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के लिए शुभ माना जाता है।
  2. सौभाग्य योग – आयुष्मान योग के बाद आरंभ
    सौभाग्य योग में शिव-पूजन करने से भाग्य का उदय होता है और जीवन में उन्नति के अवसर बढ़ते हैं।
    इसके अलावा, इस दिन स्वाति नक्षत्र पूर्ण रात्रि तक रहेगा, जो शिव उपासना के लिए अत्यंत मंगलकारी माना गया है।

मासिक शिवरात्रि की पूजा-विधि
मासिक शिवरात्रि के व्रत का पालन करते समय सादगी और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा इस प्रकार करें—
• प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
• घर और पूजास्थल की सफाई करें।
• भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
• शिवलिंग पर जल, दूध, गंगाजल और मधु से अभिषेक करें।
• भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
• शिव चालीसा, रुद्राष्टक और महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
• गहरी श्रद्धा से आरती करें और अपनी मनोकामना प्रकट करें।


‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप
मासिक शिवरात्रि के दिन ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 बार जाप अत्यंत शुभ माना गया है। यह मंत्र सभी प्रकार की बाधाओं को दूर करता है, मन को शांत करता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।


आस्था का उजास
मार्गशीर्ष की यह पावन शिवरात्रि भक्तों को भगवान शिव की कृपा पाने का सुनहरा अवसर देती है। इस दिन किया गया व्रत, पूजा और मनन न केवल जीवन को आध्यात्मिक दिशा देता है, बल्कि भक्त के भीतर शांति, शक्ति और विश्वास का नया प्रकाश जगाता है।

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