Thursday, 5 Feb 2026
  • About Divysudha
  • Contact Us
Subscribe
दिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
    • भगवान
    • मंदिर
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Facebook X-twitter Youtube Instagram
Font ResizerAa
दिव्य सुधादिव्य सुधा
  • सनातन धर्म
  • राशिफल
  • पंचांग
  • आरती/मंत्र
  • ग्रह-नक्षत्र
  • व्रत और त्योहार
  • वास्तु शास्त्र/हस्त रेखा
  • अन्य
Search
  • About Divysudha
  • Contact Us
Follow US
दिव्य सुधा > अन्य > रविवार का आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ: सूर्य कृपा, लाभ और महत्व
अन्य

रविवार का आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ: सूर्य कृपा, लाभ और महत्व

दिव्यसुधा
Last updated: November 16, 2025 11:53 am
दिव्यसुधा
Share
रविवार को आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करते हुए भक्त सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हुए
रविवार को आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से सूर्य देव की कृपा और आत्मिक शक्ति बढ़ती है।
SHARE

रविवार को आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने का महत्व और चमत्कारी लाभ
हिंदू धर्म में रविवार का दिन विशेष रूप से सूर्य देव को समर्पित माना जाता है। सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है, क्योंकि उनका प्रकाश हर जीव को जीवन प्रदान करता है। ज्योतिष में सूर्य को ‘आत्माकारक’ ग्रह कहा गया है यानी वह ग्रह जो व्यक्ति की ऊर्जा, आत्मविश्वास, बुद्धि, यश और तेज को नियंत्रित करता है। इसलिए रविवार के दिन सूर्य देव की उपासना विशेष फलदायी मानी गई है। इन्हीं उपासना विधियों में से एक है आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ जो संकट दूर करने, आत्मबल बढ़ाने और विजय प्राप्त करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

आदित्य हृदय स्तोत्र क्या है?
आदित्य हृदय स्तोत्र वाल्मीकि रामायण के युद्धकांड में वर्णित एक दिव्य स्तुति है। जब भगवान राम युद्ध में रावण का सामना करते हुए मानसिक रूप से थक चुके थे, तब ऋषि अगस्त्य ने उन्हें आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ करने का उपदेश दिया। इस स्तोत्र का जप करते ही श्रीराम ने नई ऊर्जा प्राप्त की और रावण पर विजय हासिल की। इस घटना से स्पष्ट होता है कि यह स्तोत्र व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाकर उसे हर चुनौती से लड़ने का शक्ति देता है।

रविवार को आदित्य हृदय स्तोत्र पढ़ने के लाभ

  1. आत्मविश्वास और तेज में वृद्धि
    सूर्य देव जीवन शक्ति के देवता हैं। रविवार को आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से शरीर और मन दोनों मजबूत होते हैं। व्यक्ति के व्यक्तित्व में चमक, ऊर्जा और आकर्षण बढ़ता है।
  2. बाधाओं और कठिनाइयों से मुक्ति
    यह स्तोत्र सभी प्रकार की शत्रु बाधाओं, नकारात्मक शक्तियों और जीवन की रुकावटों को दूर करता है। जैसे यह स्तोत्र राम जी के लिए विजय का मार्ग बना, वैसे ही साधक के जीवन में भी सफलता का द्वार खोलता है।
  3. नौकरी, करियर और व्यापार में तरक्की
    ज्योतिष के अनुसार सूर्य ग्रह की कृपा से सरकारी नौकरी, प्रमोशन, सम्मान और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होती है। नियमित पाठ से करियर में उन्नति और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होती है।
  4. मानसिक शांति और एकाग्रता
    यह स्तोत्र मन के भ्रम, चिंता और भय को दूर कर मानसिक स्थिरता देता है। साधक का मन शांत रहता है और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
  5. स्वास्थ्य लाभ और आयु में वृद्धि
    आदित्य हृदय स्तोत्र को आयु-वर्धक और स्वास्थ्यप्रद माना गया है। सूर्य की ऊर्जा शरीर में सकारात्मक कंपन पैदा करती है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

रविवार को कैसी करें उपासना?
रविवार सुबह स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद विनियोग मंत्र के साथ आदित्य हृदय स्तोत्र का शांत मन से पाठ करें। अंत में सूर्य मंत्रों —
“ॐ सूर्याय नमः”
“ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः”
का जप करें और मनोकामना व्यक्त करें।

आध्यात्मिक दृष्टि से स्तोत्र का महत्व
आदित्य हृदय स्तोत्र केवल मंत्रों का समूह नहीं है, बल्कि यह सूर्य देव की दिव्य ऊर्जा से जुड़ने का एक माध्यम है। यह साधना व्यक्ति को ईश्वरीय तेज से भर देती है। कहा जाता है कि जो साधक ईमानदारी से रविवार को इस स्तोत्र का जप करता है, उसके जीवन में प्रकाश, आत्मिक शांति और सकारात्मकता स्थायी रूप से स्थापित होती है। यही कारण है कि आदित्य हृदय स्तोत्र को संकट मोचक स्तोत्र भी कहा जाता है — क्योंकि यह साधना हमें ईश्वर, आत्मा और आंतरिक शांति से जोड़ती है।

TAGGED:आत्मविश्वास बढ़ाने के उपायआदित्य हृदय स्तोत्रआध्यात्मिक लाभमानसिक शांति उपायरविवार सूर्य उपासनारामायण स्तोत्रसूर्य अर्घ्यसूर्य देव के मंत्रसूर्य देव पूजास्वास्थ्य और आयु वृद्धि मंत्र
Share This Article
Email Copy Link Print
Previous Article हथेली में V निशान का अर्थ और भाग्यशाली लोगों के शुभ संकेत हथेली में V का निशान: 35 की उम्र के बाद खुलता भाग्य, हस्तरेखा शास्त्र के शुभ संकेत
Next Article अयोध्या रामलला मंदिर की नई समय सारिणी के अनुसार दर्शन और आरती का अद्यतन कार्यक्रम रामलला नई समय सारिणी लागू: अयोध्या मंदिर की आरती और दर्शन समय में बड़ा बदलाव
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सटीक और सामयिक अपडेट के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत!
सटीक, निष्पक्ष और तत्काल खबरों के लिए आपका विश्वसनीय स्रोत। हर पल के अपडेट्स के साथ रहें एक कदम आगे।
FacebookLike
XFollow
InstagramFollow
YoutubeSubscribe
- विज्ञापन -

You Might Also Like

पौष पूर्णिमा 2026 पर गंगा स्नान और दान करते श्रद्धालु
अन्य

पौष पूर्णिमा 2026: स्नान-दान, शुभ तिथि, दान के लाभ और धार्मिक महत्व

By दिव्यसुधा
मार्कण्डेय पुराण
अन्य

मार्कण्डेय पुराण हिंदी में

By दिव्यसुधा
shree ram hanuman
अन्य

हनुमान जी ने श्री राम की सौगंध खाकर, उनसे से युद्ध क्यों किया

By दिव्यसुधा
ram darbar
अन्य

राम नाम से बड़ा राम नाम की महिमा

By दिव्यसुधा
अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

दिव्यसुधा के बारे में!

दिव्य सुधा एक धार्मिक पत्रिका है जिसका उद्देश्य हिन्दू देवी-देवताओं की महिमा और सभी तीर्थ स्थलों की महत्ता, महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार, पूजन विधि एवं अन्य धार्मिक जानकारियों को साझा करना है।

Facebook X-twitter Youtube Instagram
Top Categories

सनातन धर्म

भगवान

मंदिर

राशिफल

पंचांग

आरती/मंत्र

गृह/नक्षत्र

व्रत और त्योहार

वास्तु शास्त्र /हस्त रेखा

अन्य

Useful Links

About Divysudha

Contact Us

Contact Us
  • Dozen Hands Media Publication
    1/8 Vivek Khand, Gomti Nagar, Lucknow – 226010, Uttar Pradesh
  • Contactus@divysudha.com

Privacy policy      Terms & Conditions  
© 2025 Divysudha. All Rights Reserved.

© 2026 Divysudha. All Rights Reserved.
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?