हिंदू धर्म में पूजा-पाठ का अत्यंत गहरा और आध्यात्मिक महत्व है। जब भी हम किसी देवी या देवता की आराधना करते हैं, तो दीपक जलाना उस पूजा का सबसे पवित्र हिस्सा माना जाता है। कहा जाता है कि दीपक के प्रकाश से न केवल अंधकार दूर होता है, बल्कि हमारे जीवन से नकारात्मक ऊर्जा भी समाप्त होती है। परंतु, बहुत से लोग यह नहीं जानते कि दीपक में उपयोग की जाने वाली बाती का प्रकार किस देवता के लिए शुभ माना गया है। अगर हम गलत बाती जलाते हैं, तो पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता और घर में अलक्ष्मी का वास हो सकता है।
दीपक और बाती का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों में दीपक को “साक्षात अग्नि देव” का प्रतीक बताया गया है। यह अग्नि हमारे भीतर की ऊर्जा, ज्ञान और श्रद्धा को प्रकट करती है। दीपक का प्रकाश ईश्वर की उपस्थिति का संकेत है, जो अज्ञान के अंधकार को मिटाता है। लेकिन दीपक में प्रयुक्त बाती का स्वरूप भी बहुत मायने रखता है। सामान्यतः दो प्रकार की बाती प्रयोग की जाती है गोल बाती (फूल बाती) और लंबी बाती। दोनों का प्रयोग अलग-अलग पूजा विधियों में किया जाता है।
गोल बाती का धार्मिक उपयोग
गोल बाती को “फूल बाती” भी कहा जाता है। यह देवी-देवताओं की नियमित पूजा में सबसे अधिक प्रयोग की जाती है। शास्त्रों के अनुसार, गोल बाती वाला दीपक भगवान विष्णु, ब्रह्मा जी, भगवान शिव, इंद्र देव और अन्य देवताओं की पूजा में अत्यंत शुभ माना गया है। इसके अतिरिक्त, तुलसी माता की आराधना के समय भी गोल बाती का दीपक ही जलाना चाहिए। ऐसा करने से घर में शांति, स्थिरता और धन-समृद्धि बनी रहती है। इसके साथ ही जब भी आप पीपल या बड़ के पेड़ की पूजा करें, तो केवल गोल बाती का दीपक जलाएं। यह देवताओं को प्रसन्न करने वाला माना गया है और भूलकर भी इस समय लंबी बाती का उपयोग नहीं करना चाहिए। लंबी बाती इस स्थिति में अशुभ मानी जाती है और इसका प्रयोग शास्त्रीय नियमों के विपरीत होता है।
लंबी बाती का धार्मिक उपयोग
लंबी बाती का दीपक शक्ति और उन्नति का प्रतीक माना गया है। इसे मुख्यतः देवियों की पूजा में प्रयोग करना चाहिए। शास्त्रों में बताया गया है कि लंबी बाती का दीपक मां लक्ष्मी, दुर्गा जी और सरस्वती देवी की आराधना के समय अत्यंत शुभ होता है। ऐसा करने से धन, वैभव और ज्ञान में वृद्धि होती है। इसके अलावा कुलदेवता की पूजा और आंवला वृक्ष के नीचे दीपक जलाने में भी लंबी बाती का प्रयोग करना चाहिए। यह पारिवारिक उन्नति, वंशवृद्धि और घर में सुख-शांति का प्रतीक होता है। अगर आप पितृ तर्पण या अमावस्या के अवसर पर दीपक जला रहे हैं, तो केवल लंबी बाती का ही उपयोग करें। क्योंकि गोल बाती पितरों के लिए अशुभ मानी जाती है। इससे घर में दरिद्रता, बीमारियों और कलह का प्रभाव बढ़ सकता है। वहीं लंबी बाती से जलाया गया दीपक पितरों को संतुष्ट करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
गलत बाती का दुष्प्रभाव
कहा जाता है कि यदि आप किसी देवी-देवता की आराधना में गलत प्रकार की बाती का प्रयोग करते हैं, तो आपकी पूजा अधूरी रह जाती है। इससे न केवल पूजा का फल नष्ट हो जाता है, बल्कि घर में अलक्ष्मी का वास भी हो सकता है। शास्त्रों में यह भी वर्णित है कि गलत बाती से दीपक जलाने से नकारात्मक शक्तियाँ सक्रिय हो जाती हैं और जीवन में आर्थिक रुकावटें, पारिवारिक कलह तथा मानसिक तनाव बढ़ सकते हैं।
दीपक जलाना सिर्फ एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि यह आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है। इसलिए हर व्यक्ति को यह जानना आवश्यक है कि किस देवता के सामने कौन-सी बाती जलाना शुभ है। गोल बाती से देवताओं की कृपा प्राप्त होती है, जबकि लंबी बाती से मातृशक्ति और पितृशक्ति का आशीर्वाद मिलता है। इसलिए अगली बार जब भी आप पूजा करें, दीपक की बाती का ध्यान अवश्य रखें। क्योंकि यही छोटी सी सावधानी आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का प्रकाश फैला सकती है।