सर्वप्रथम आप सभी का हार्दिक आभार और धन्यवाद। दिव्यसुधा निरंतर प्रयासरत है कि हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति से जुड़ी हर जानकारी को सुंदर, सरल और भावनात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाए। आपके पत्र, मेल और सुझाव ही दिव्यसुधा की असली प्रेरणा हैं।
इस बार दिव्यसुधा का नवंबर अंक आपको एक अनोखी आध्यात्मिक यात्रा पर ले जाएगा- जहां हर परंपरा, हर कथा और हर रहस्य भारतीय संस्कृति की गहराइयों को उजागर करेगा। यह अंक केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि आत्मसात करने के लिए है- जैसे दीपों की ज्योति में श्रद्धा की आभा, तुलसी विवाह के मंत्रों में भक्ति की भावना, और सरयू की लहरों में पवित्रता की गूंज। इसमें अयोध्या के स्वर्ण खनी कुंड की अद्भुत कथा से लेकर कार्तिक मास के दीपदान का आध्यात्मिक महत्त्व तक, सब कुछ मिलेगा जो मन और आत्मा को आलोकित करेगा। गुडीमल्लम शिवलिंग की रहस्यमयी स्थापत्यकला, तुलसी विवाह की पावन परंपरा, और “डाकू से बने रामायण के रचयिता” जैसी प्रेरक कथा आत्मा में परिवर्तन की लौ जगाएगी।
यह अंक आपको सपनों के संकेतों, परंपराओं के अर्थ और आत्मा की शाश्वत यात्रा से जोड़ देगा। दिव्यसुधा का यह विशेष संस्करण भक्ति, ज्ञान और आस्था का सच्चा संगम है। इसे पढ़ें, महसूस करें और अपनी अनुभूति हमारे साथ साझा करें।